एक पिता का डर

सन 2014… मेरे बड़े बेटे ने किसी अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमीशन पाने के लिए जरुरी JEE Mains और फिर JEE Advanced की परीक्षा दी थी।

रैंक बहुत अच्छी नहीं थी – पर बुरी भी नहीं थी। JEE- Adv में 7152. पर इस रैंक पर किसी भी IIT में जनरल कोटे में कुछ नहीं मिलता।

उसने अन्य कुछ कॉलेज के लिए कोशिश करने के अलावा Indian Institutes of Science Education and Research (IISER) के किसी कॉलेज में एडमीशन के लिए भी फॉर्म भरा था।

अब तो IISER के 2 नये कॉलेज भी शुरु हो गये हैं, पर तब सिर्फ 5 जगह ही IISER के कॉलेज थे।

  1. भोपाल
  2. कोलकाता
  3. मोहाली
  4. पुणे और
  5. तिरुवनंतपुरम.

हमने तिरुवनंतपुरम को पहली choice बनाया (क्योंकि वह इन पांचों में बेहतरीन था) और आगे अन्य को।

काउंसलिंग हुई, बेटे को तिरुवनंतपुरम ही मिल गया। अब मैं और मेरी पत्नी परेशान। परेशानी की वजह सिर्फ एक – वह राज्य, जहां यह बेहतरीन कॉलेज है।

और वह राज्य है – केरल।

हकीकत यह है कि मुझे फॉर्म भरने के समय तक केरल के विषय में लगभग न के बराबर जानकारी थी। पर उसके बाद जब हमने कुछ दिन लगातार केरल के विषय में Google को खंगाला, वहां के माहौल के बारे में पढ़ा तो कुछ चीज़ें पता चली।

केरल अति शिक्षित प्रदेश है। केरल में अनेकों बहुत सुन्दर स्थान हैं जहां बतौर टूरिस्ट पूरे भारत से लोग जाते रहते हैं। लेकिन, वहां अधिकतर कम्युनिस्ट पार्टियों का ज़ोर रहता है। शहर में आपका हिन्दू होना – और वह भी हिन्दी भाषी प्रदेशों का हिन्दू होना अच्छी नज़र से नहीं देखा जाता।

केरल में 27-28% मुस्लिम आबादी है। और कॉलेज कैम्पस के बाहर आप कब किस समस्या में फंस जायें, कोई नहीं बता सकता। उसी बीच एक समाचार आया कि एक क्षेत्र विशेष में खुलेआम बोर्ड लगा दिया गया था कि यह शरिया कन्ट्रोल्ड इलाका है, यहां कोई सरकारी अधिकारी न आए। (वैसे, बहुत बाद में इसी प्रदेश में सड़क पर गोहत्या करके वहीं खुलेआम गोमांस खाने का पाप भी किया गया था।)

मेरी बहुत इच्छा थी कि मेरा बेटा एक साइंटिस्ट बने। एडमीशन भी उसी के अनुसार एक अच्छे कॉलेज में हो रहा था। पर मैं डर गया।

हां नसीरुद्दीन साहब, मैं डर गया था केरल के बारे में इतना कुछ पढकर। यह सच है कि केरल में 2014 के बाद अभी तक कोई बहुत बड़े दंगे नहीं हुये और कश्मीर की तरह हिन्दुओं का खुलेआम कत्लेआम भी नहीं हुआ, पर फिर भी एक बाप डर गया था।

मैंने अपनी पत्नी से अपना डर शेयर किया। उसने कहा कि मुझे बेटे के विषय में सोच समझकर फैसला लेना चाहिए। कोई ज़रुरी नहीं कि बेटा साइंटिस्ट ही बने। फिर उस डरे हुये पिता ने अपने बेटे से बात की – बेटे ने बिना किसी विरोध के पिता की बात मान ली (दरअसल वह खुद एक साइंटिस्ट की जगह पर खुद को ‘फिट’ नहीं पा रहा था और सिर्फ मेरी खुशी के लिये इस कॉलेज में जाने को तैयार हो गया था)।

बस, फैसला हो गया। हमने बेटे को कॉलेज के केरल में होने की मुख्य वजह से सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध कॉलेज में न भेजकर दूसरे उपलब्ध अच्छे कॉलेज IIIT Delhi (IIT नहीं, IIIT -ओखला, दिल्ली) में कम्प्यूटर इंजीनियरिंग के कोर्स में एडमीशन दिला दिया।

नसीरुद्दीन साहब, यह था डर एक पिता का – अपने बेटे की सुरक्षा के लिए। और क्यों था? – इसका उत्तर उस बोर्ड से पूछिये जिस पर लिखा था कि यह शरिया कन्ट्रोल्ड इलाका है, यहां कोई सरकारी अधिकारी न आए.

खैर। नसीरुद्दीन शाह साहेब, आपको केरल में, या 2-3 साल पुराने असम में या पश्चिम बंगाल में, और तो और कश्मीर में भी कोई समस्या नहीं दिखेगी। दरअसल आपकी नज़र ही कमज़ोर है.

कोई नहीं… आपकी नज़र अभी और कमज़ोर हो सकती है क्योंकि 2019 में प्रधानमंत्री तो मोदीजी ही बनेंगे। और हां… जय हिंद

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