आप क्या चाहते हैं? मोदी आकर पूछें – क्या हुक्म है मेरे आका!

गत चार वर्षों में जो भी मेरे लेखन के साथ जुड़े हैं, जानते होंगे कि कितनी बार मैंने व्यक्तिगत तथा सामूहिक रक्षा संबन्धित ऐसे तथ्य शेयर किए हैं जो पूरी तरह वैध हैं। अवैध बातें मैं कभी शेयर नहीं करता।

फिर भी, कितने लोगों ने आज तक उनपर अमल किया होगा? प्रतिशत तो छोड़िए, गिनती के दस एक लोगों ने कुछ करने की बात की, बाकी जो है सो हईये ही।

याने परिस्थिति यह है कि लगभग सभी लोग जहां भी रहते हैं, तत्वत: ‘महागुण’ के ही निवासी हैं। ‘महागुण’ वही नोएडा की पॉश हाउसिंग सोसायटी जहां जुलाई 2017 में लगभग दंगा सा हुआ था, याद होगा ही। अवैध बांग्लादेशियों के एक झुंड ने सैकड़ों पढे लिखे, बड़ी बड़ी सैलरी कमाने वाले लोगों को बाथरूम में या पलंगों के नीचे काँपते हुए छुपने को मजबूर किया था। पुलिस समय पर नहीं पहुँचती तो चंद सिक्यूरिटी वालों से स्थिति संभालनी मुश्किल थी।

कई बार यह तो लिख ही चुका हूँ कि आप को कितनी मस्जिदों ने घेरा है, कुकुरमुत्ते की तरह अवैध मज़ार आप के एरिया में ही अचानक कैसे उग आते हैं। यह भी लिख चुका हूँ कि उनके लोकेशन्स गूगल मैप में देखिये और रोड ब्लॉक करने की उनकी क्षमता समझिए।

यह भी लिख चुका हूँ कि पुलिस आप को बचा पाएगी इस बात पर कतई विश्वास न करें। पुलिस लाख चाहेगी तो भी बचा नहीं पाएगी अगर आप तक आने के रास्ते में रोड ब्लॉक लगाए जाएँ। स्क्रैप टायर को जलाकर रास्ते में फेंकना पर्याप्त है।

सब बातें आप समझ तो रहे हैं फिर भी आप कुछ नहीं कर रहे हैं क्योंकि… छोड़िए, मुझे कोई स्पष्टीकरण नहीं चाहिए। लेकिन आज यह सब याद इसलिए दिला रहा हूँ ताकि आप को स्मरण रहे कि आप ने इन्शुरंस में पैसे इन्वेस्ट किए होंगे (आवश्यक हैं) लेकिन खुद की सुरक्षा में कोई समय अभी तक नहीं इन्वेस्ट किया होगा।

इन्शुरंस अपनी जगह सही है, अगर आप का ‘डॉ नारंग’ हो गया तो आप की विधवा पत्नी या अनाथ बच्चों को काम आयेगा – उनको भीड़ ने बख्श दिया तो।

ऐसी परिस्थिति में कौन नेता या पार्टी ऐसा निर्णय ले सकता है जिसका परिणाम देशव्यापी दंगे हो सकते हैं? जहां जो बहुसंख्य जनता under threat है वह बिलकुल निरीह ब्रॉइलर सी ज़िंदगी जी रही है, जो भेड़ियों का तनिक भी प्रतिकार करने की क्षमता नहीं रखती? जिनके लिए सुविधाएं व्यसन सी बन गई हैं और सुविधाओं के और चंद कम पैसों के लिए अपने हत्यारों को ही अपने घरों में एंट्री दे रही है? क्या कोई नेता ऐसा निर्णय ले सकता है?

वे कौन से ऐसे निर्णय हैं जिनको लेने के लिए केवल दबाव की राजनीति की जा रही है, मुद्दे उठाने वालों को परिणामों का या तो ख्याल नहीं या अपने एजेंडा के सामने परवाह नहीं? लीजिये कुछ मुद्दे

370 हटाना, 35A हटाना 

फेसबुक और व्हाट्सएप्प पर कई लोग आकर लिख देते हैं कि यह कोई बाधा नहीं है, सरकार बहाने बना रही है, फलां चीज कर देने से यह हो जाएगा इत्यादि इत्यादि।

मेरा एक ही वास्तविकता से जुड़ा सवाल है – क्या जम्मू कश्मीर के हालात आप को पता हैं? किस तरह लोहे का बुर्का पहनकर सेना की गाड़ियों को घूमना पड़ रहा है कभी वीडियो देखे नहीं आप ने? दमनचक्र के इंटरनेशनल परिणाम जानते भी हैं आप?

जब म्यानमार में रहते रोहिंग्याओं के लिए हज़ारों मील दूर मुंबई में दंगे हो सकते हैं, इससे क्या हालात होंगे, क्या उनसे टकराने के लिए आपकी तैयारी है? क्या आप का शहर तैयार है? क्या आप को देश के अन्य राज्यों की कल्पना है? क्या आप ऐसा निर्णय लेंगे या केवल जनता को इस बात पर भड़काना ही आपका एजेंडा है नोटा दबवाने के लिए, यह भी साफ हो।

राम मंदिर 

अपने शहर में विधर्मियों द्वारा जान बूझकर शक्ति प्रदर्शन में तोड़े जाते मंदिरों पर केवल विधवा विलाप करनेवाले, या कुकुरमुत्ते की तरह उग आनेवाले फर्जी मज़ारों के केवल फेसबुक पर फोटो डालनेवाले लोगों का क्या कहें?

एक जांबाज़ वकील मिले थे मुझे जो लड़ने के लिए तैयार भी थे। लेकिन जब हम मुद्दों की रिविज़न करने लगे तो एक मुद्दा आया – स्थानीय लोगों का भी सहभाग आवश्यक होगा, उनको भी सामने आकर लिखकर देना होगा कि यह कंस्ट्रक्शन अवैध है और उन्हें उससे तकलीफ है।

भोंपू (लाउड स्पीकर) उतरवाने की केस के लिए ऐसे लोग ढूँढने के लिए मेरे दिल्ली के एक दिलेर स्नेही को क्या पापड़ बेलने पड़े थे, मुझे याद है। शांत हो गए।

और भी कई मुद्दे हैं, याद दिलाने का यह समय नहीं, लोगों को वे मुद्दे याद नहीं तो विपक्ष के सामने पत्ते खोलने का मतलब नहीं। बस एक बात कहूँगा – कोलकाता में साल पहले रोहिंग्याओं को भारत में रहने देने के समर्थन में निकली रैली शायद मंदिर समर्थन में निकाली रैली से बड़ी थी और निश्चित रूप से अधिक खतरनाक दिख रही थी अगर सरकार पर दबाव की बात हो। बुलंद शहर तो ताज़ा मिसाल है।

बाकी नगर निगम द्वारा तोड़े जाते मंदिरों की बात न करें, उनके विरोध में नगर निगम के रेकॉर्ड में आप को किसी हिन्दू का ही कम्प्लेंट मिलेगा। आप ने पुलिस में मस्जिद या दरगे का कम्प्लेंट लिखवाया? क्या आप चाहते हैं कि मोदी आ कर कम्प्लेंट लिखे, पुलिस को मैनेज करे और आ कर आप से पूछे – और कोई हुक्म, मेरे आका?

और भी मुद्दे हैं लेकिन उनपर 2019 के बाद काम करेंगे। 2019 में निर्भय जीना है तो भाजपा को वापस लाएं, बाकी कमलनाश, गहलोत और बघेल के काम आप देख ही रहे हैं। वहाँ से लिखनेवाले फेसबुकिए भी ठंडे पड़े हैं, कहानियाँ लिख रहे हैं, चुट्कुले लिख रहे हैं, अपनी सेहत के किस्से लिख रहे हैं। फर्क दिख रहा है, नर्क महसूस हो रहा है जिसमें चंद लोगों ने सबक सिखाने के नाम पर उनको डाल दिया है।

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