मोदी सरकार में यही पुराना percentage कांग्रेसियों को जीने नहीं दे रहा

ये किस्सा शायद 1984 का है। उन दिनों मैं कुश्ती लड़ता था। हम हिमाचल में कांगड़ा जिले के remote गांवों में कुश्तियाँ लड़ने जाते थे।

एक गांव से दूसरे गाँव पैदल जाते थे। जंगल में बनी पगडंडियों से। साथ में स्थानीय पहलवान होते थे जो उन रास्तों से परिचित होते थे। उन्हीं जंगलों में मैंने जीवन में पहली बार जंगली मुर्गा देखा।

अपने स्कूल की लाइब्रेरी में मुझे सलीम अली साहब की किताब Birds Of India हाथ लग गयी थी। उस किताब ने मुझे एक नई दुनिया से परिचित कराया… पक्षियों की दुनिया…

उसी किताब को पढ़ने के बाद मैंने Bird Watching शुरू की… जहां भी कोई नई चिड़िया दिखती, बड़ी खुशी होती। ट्रेन की खिड़की से पटरी के बगल में लगी रेलवे की तारों पर विभिन्न किस्म की birds बैठी दीखतीं। उस किताब और Bird Watching के इस शौक़ ने birds के प्रति मेरा नज़रिया बदल दिया।

सो उस दिन हिमाचल के जंगलों में पहली बार जंगली मुर्गा देखा। बेहद खूबसूरत था… आम सामान्य देसी मुर्गे से थोड़ा छोटा, उससे थोड़ा fit, बहुत तेज़, चपल था… उसका coat shine कर रहा था, एकदम चमकीला…

मैं उसे देख के मुग्ध था… उधर साथ चल रहे पहलवान जी लोगों में क्या चर्चा चल रही थी… कितने किलो का रहा होगा ये? इसका meat गल जाता है? इसका स्वाद कैसा होता है? आम देसी मुर्गे जैसा ही, या उससे कुछ अलग?

मुर्गा एक ही था। मैं उसे Bird Watching की अपनी hobby के नज़रिये से देख रहा था। मेरे साथ के पहलवानों के लिए वो दो किलो Meat से ज़्यादा कुछ न था…

आज शाम को walk पर जाते हुए नितिन गडकरी जी का एक वक्तव्य सुन रहा था… वो किसी कार्यक्रम में Green Highways और नए बन रहे Expressways के बारे में बता रहे थे।

वो जिन परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं या आने वाले सालों में करने वाले हैं उनकी कुल value 10 लाख करोड़ रूपए से ज़्यादा है।

गडकरी और मोदी जी के लिए ये सड़कें राष्ट्र निर्माण है, राष्ट्र की Growth का इंजन है।

परंतु कांग्रेस को इसमें क्या दिखता है?

कांग्रेस की जो कार्य शैली है उसमें हर योजना परियोजना और कुछ नहीं, सिर्फ खाने कमाने का ज़रिया है… हर कार्य, हर योजना का एक percentage है… जैसे कि 15%, 35%, 50%, 65%, 85% और 100%…

मसलन जब भी कोई Project परियोजना बनती है तो उसकी प्लानिंग में ही % fix हो जाता है… जैसे कि 15% योजना में कुल योजना का 85% उस काम में खर्च होगा और 15% खा लिया जाएगा।

वैसे इतनी ईमानदार योजना कांग्रेस ने अपने 65 साल के शासन काल में कभी नही बनाई। जो सबसे ईमानदार योजना होती थी वो 35% होती थी… यानी 65% काम में लगाओ, 35 खा जाओ…

इसी तरह ज़्यादातर योजनाएं 85% होती थी। इसे तो बाकायदे राजीव गांधी ने मंच से स्वीकार किया था कि 100 रूपए ऊपर से चलते हैं, 85 खा लिए जाते हैं… सिर्फ 15% देश के विकास में लगता है…

इसके अलावा 100% योजनाएं भी हुआ करती थीं। ऐसी योजनाएं सिर्फ कागज़ पर ही बना के कार्यान्वित कर दी जाती थीं। सारा का सारा 100% पैसा खा लिया जाता था और कागज़ पर ही सड़क या नहर खोद दी जाती जो कि अगली बरसात में बह जाती।

आज जब गडकरी मंच से 10 लाख करोड़ की परियोजनाओं की बात करते हैं तो कांग्रेसियों के दिल पर सांप लोटते हैं… कांग्रेसी सीधे सीधे हिसाब लगाने लगता है… 35%… यानी साढ़े तीन लाख करोड़ अंदर कर देते अगर अपनी सरकार होती तो…

मोदी सरकार में यही पुराना percentage कांग्रेसियों को जीने नहीं दे रहा।

चौकीदार चोर है… इस वाक्य के मूल में यही छटपटाहट है।

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