बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना

शनि, रवि दो दिन छुट्टियां होने की वजह से स्कूल में रेड डे मनाया जा रहा है। हमारे छोटे साहबजादे कल घर आये और बोले कि मुझे कल सांताक्लॉज बनकर स्कूल जाना है। हमारी टीचर ने बोला है।

हालांकि ये मेरे साथ हर साल होता है। मेरा बड़ा बेटा भी उसी स्कूल में पढ़ता है। मैंने पत्नी जी से कह दिया कि रेड है तो लाल शर्ट पहना कर भेज दो। पर सांता बनाकर भेजने की कोई ज़रुरत नहीं है।

आज बच्चे को स्कूल छोड़ने गया तो बहुत से बच्चों को सांता बनकर आये हुए देखा। मेरे बेटे का मन थोड़ा उदास हो गया। पर कोई बात नहीं। जब धरती में बीज बोया जाता है तब धरती का सीना चीरना ही पड़ता है।

आज उसकी छोटी सी नाराज़गी कल उसके लिए बहुत बड़ा सबक बनेगी। वो सीखेगा कि हमारी परंपरा क्या है? और दूसरों की क्या है। अगर मैं भी उसे उसी गुलामी की मानसिकता के आधीन रहकर जीना सीखाऊंगा तो मेरा बेटा मानसिक तौर पर गुलाम ही बनेगा।

मेरा कम है अपने धर्म को मानना और दूसरों का सम्मान करना। मुझे तरस आता है उन माँ बाप की सोच पर जो ये भी नहीं जान पाते हैं कि ये हमारी परंपरा नहीं है।

क्या अमेरिका में कृष्ण जन्मोत्सव पर सभी बच्चों को कृष्ण के पात्र में आने को कहा जाता है?जबकि वहां बहुत बड़ी मात्रा में हिन्दुओं की आबादी है। क्या रूस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया जैसे मुल्क कभी उनके स्कूल में पढ़ने वाले हिन्दू बच्चों की ख़ुशी के लिए सभी बच्चों को कृष्ण या राम जन्मोत्सव के दिन राम, कृष्ण बनकर आने का फरमान देते हैं?

अरे खुद भारत में भी कॉन्वेंट स्कूल में राम या कृष्ण जन्मोत्सव क्या चीज़ है ये बताया नहीं जाता। तो फिर हम क्यों ये बोझ अपनी पीठ में लिए घूमते है सर्वधर्म समभाव की?

एक ईसाई को हिन्दू मेरी क्रिसमस कहे तो समझ ठीक है। एक मुस्लिम को हिंदू ईद मुबारक कहे तो समझ ठीक है। पर एक हिन्दू दूसरे हिन्दू को मेरी क्रिसमस कहे ये कैसा खेल है भाई? क्या कभी दो मुसलमान या दो ईसाई एक दूसरे को हैप्पी दिवाली या जयश्री कृष्ण कहेंगे? कभी सुना है? नहीं ना।

हम अगर हमारे धर्म हमारी परम्पराओं को समझेंगे तो बेहतर है। क्यों दूसरे के की परम्पराएं हमारे माथे थोपी जा रही है? इन चीज़ों को हमें ही बदलना होगा। वरना हमारी आने वाली नस्ल सिर्फ शारीरिक तौर पर हिन्दू होगी। दिमागी तौर पर तो वो मानसिक गुलाम ही होगी।

हिंदुत्व ही भारत की पहचान है। बाकी आप जानो और आपकी सोच।

जयहिंद

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  1. हमने भी बेटे को बचपन मे रेड डे पर हनुमान जी का स्वरूप बनाया था,जबकि ज्यादातर बच्चे सांता बन कर आये थे।

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