A tale of two CMs (दो मुख्यमंत्रियों का किस्सा)

किसी जमाने में मगध पाटलिपुत्र में लालू जादो नाम का एक राजा हुआ करता था। उसकी एक दर्जन औलादें थीं, सब एक से बढ़ के एक…

फिर अनपढ़ राजा ने ठान लिया कि वो अपने माथे से जहालत का ये कलंक मिटा देगा। उसने अपनी औलादों को डॉक्टर इंजीनियर बनाने का संकल्प लिया।

सबसे बड़ी बेटी थी मीसा भारती… उसको CPMT का इम्तहान दिलाया गया। वो अव्वल आयी। उसका दाखिला रांची के मेडिकल कॉलेज में हो गया।

अब लालू जादो की लिख लोढ़ा पढ़ पत्थर औलाद PMT कैसे क्लियर कर गयी ये आज तक रहस्य है और लालू जादो की बिटिया की कहानी से प्रेरित होकर ही राजू हिरानी ने मुन्ना भाई MBBS फिल्म बनाई थी…

बहरहाल… रांची मेडिकल कॉलेज में अपनी मुन्ना बहन MBBS करने लगी। 1st year में उसे रांची मेडिकल कॉलेज में Top कराया गया।

अगले साल उसका तबादला पटना मेडिकल कॉलेज में हो गया… वहां भी वो लगातार Topper रही और उसने MBBS की डिग्री प्राप्त कर ली…

वो अलग बात है कि किसी बिहारी ने अपना खुद का तो क्या, अपनी भैंस का भी इलाज मीसा बहन MBBS से नहीं कराया।

कालांतर में जब मीसा बहन MBBS का बियाह हुआ तो एकदम राजू हिरानी की फिल्म के माफ़िक़ पटनहिया सर्किट लोग पटना के Showrooms से नई गाड़ियाँ उठा लाये, बारातियों को ढोने के लिए।

कालांतर में मीसा बहन MBBS भू माफिया बन गयी और उनकी 3000 करोड़ से ज़्यादा की संपत्ति पर जांच बैठी है और उसे ED ने attach मने जप्त कर लिया है।

मुन्ना बेन उर्फ मीसा बेन MBBS अपने पतिदेव के साथ कभी भी जेल जा सकती हैं।

गौरतलब है कि उन्होंने डॉक्टर की डिग्री लेने के बाद कभी किसी मरीज का इलाज नहीं किया… 3000 करोड़ की नाजायज संपति बना ली पर उनके मन में कभी कोई Charitable अस्पताल खोलने का विचार नहीं आया।

यूपी बिहार के गांव देहात में तमाम झोला छाप, बंगाली डॉक्टर चांदसी अस्पताल खोल के बैठे हैं और गरीब लोगों को कम से कम FirstAid तो दे ही देते हैं… मीसा बेन MBBS ज़्यादा न करती तो कम से काम एक चांदसी अस्पताल तो खोल ही सकती थीं…

एक और CM हुए हैं UK बोले तो उत्तराखंड के… रमेश पोखरियाल उर्फ नि:शंक बाबू… उनकी सिर्फ दो बेटियाँ ही हैं… बेटे की आस में उन्होंने डेढ़ दर्जन बच्चे पैदा नहीं किये… बेटियां ही बेटे हैं…

उनकी बिटिया हाल ही में MBBS करके फौज में Doctor भर्ती हुई है…

देश में डॉक्टरी की पढ़ाई के तमाम मेडिकल कॉलेज हैं, उनसे पढ़ के Doctor साहब लोग नोट छापने की मशीन बन जाते हैं। गांव में कोई नहीं जाना चाहता। सब शहर की तरफ भागते हैं।

शहर भी छोटे नहीं… सब बड़े शहरों की ओर भागते हैं… गांव देहात कस्बे की बात तो छोड़िए, बलिया जैसे शहर और District HQ पर भी हमारे मित्र स्व संजीव मिश्रा को सामान्य सा इलाज नहीं मिला, 3 घंटे उनको civil अस्पताल रख के वाराणसी refer कर दिया गया और रास्ते में उनकी मृत्यु हो गयी।

बाद में Post Mortem report में पता चला कि उनको कोई गम्भीर चोट नहीं थी। सिर्फ पैरों में चोट थी। और रक्तस्राव के कारण उनके पैरों में खून जमा हो गया जिसे एक सामान्य Surgical op से drain कर देते तो उनकी जान बच जाती…

रास्ते में पड़ने वाले दो जिला मुख्यालय बलिया और गाज़ीपुर में ये सामान्य चिकित्सा देने वाले doctor भी नहीं मिले क्योंकि सारे doctor साहब लोग दिन में तो गाज़ीपुर बलिया प्रैक्टिस करते हैं पर शाम को बनारस भाग जाते हैं… गाज़ीपुर बलिया कोई रहना नही चाहता… संजीव मिश्रा का accident रात 8 बजे हुआ… पूरे जिले में doctor न मिला…

ऐसे हालात में उत्तराखंड के पूर्व CM, जो इस समय हरिद्वार से सांसद हैं, आपकी बेटी ने MBBS करने के बाद Civil में प्रैक्टिस कर नोट छापने की बजाय Indian Army की AMC बोले तो Army Medical Corps में Doctor बनना मंजूर किया…

पिछले दिनों देहरादून स्थित IMA में उनके पिता नि:शंक जी ने उनके कंधे पर Star लगा के उनको Commission प्रदान किया… एक राष्ट्रभक्त पिता के लिए इससे ज़्यादा गौरवशाली क्षण क्या होगा?

Capt. Dr. श्रेयसी नि:शंक जी को Army में Captain बनने पर ढेर सारी बधाइयाँ… यशस्वी भव…

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