संभलो, वरना लात खाओ…

2019 के पहले घटनाएं तेज़ी से बदल रही हैं। पिछले छह महीनों में कुछ दक्षिणपंथी और मोदी समर्थक पत्रकारों ने पलटी मारी है। जिसकी क्या वजह हो सकती है, मैं नहीं जानता।

पहली, शायद यह कि उन्हें अपने अस्तित्व का संकट नज़र आता हो… क्योंकि कोई भी बौद्धिक मोदी समर्थक होकर नहीं रह सकता। वह लाख समर्थ हो, बुद्धिमान हो, तार्किक हो उसे झुकना ही पड़ता है। अगर वह बौद्धिक पत्रकार, कवि या लेखक के रूप में जीवित रहना चाहता है तो उसे तटस्थ होने का स्वांग रचना ही होगा। जो कि पाखंड का पर्वत होना है।

दूसरी, शायद यह कि हिन्दू स्वभाव से ही मूर्ख और आत्मघाती भावुक, सहिष्णु होता है। बल्कि सहिष्णुता का कीट उसे काटता ही रहता है। लात खाने का अभ्यासी होकर भी… वह लातामृत पीता है।

अब कुछ लोगों को अखबारों में और यहां-वहां निरंतर प्रलाप करते हुए पढ़ रहा हूं कि बुलंद शहर में ये हो गया वो हो गया। बीजेपी सरकार ने कुछ नहीं किया लेकिन देवी जी या देवता जी इस प्रश्न पर विचार ही नहीं करते कि वहीं दो दिन पहले की रैली में काफिरों के खिलाफ वोट करने की सामूहिक कर्कश अपील की गई थी। वहीं कोई बोल गया था कि मोदी का सिर कलम कर दो।

खैर, गायें तो काटी ही गईं। गायें कट गईं तो कट गईं… इन सब बातों की प्रतिक्रिया क्यों होनी चाहिए… गायें थीं… हिन्दू आस्था की प्रतीक… पूजनीय… साक्षात धर्माधार… पर थीं गायें ही ना… तो उनके काटे जाने का क्या सांकेतिक अर्थ…? कुछ भी तो नहीं!

अब तो नसीर भाई को भी डर लगने लगा है और उनके दूसरे भाईजान को पाकिस्तान में बैठे-बैठे भारत के मुसलमानों की फिक्र सताने लगी है इसलिए भारत के हिन्दू दुःख में डूब गए हैं।

बड़ी चिन्ता की बात है! नसीर भाई को डर लग रहा है। उधर इमरान भाई भी डर में हैं। पाकिस्तान में हिन्दू राज कर रहे हैं, न जाने कितने तो हिन्दू सितारे भरे पड़े हैं वहां! कितने हिन्दू पुलिस अधिकारी, नेता, वकील, पत्रकार पाकिस्तान में राज करते फिर रहे हैं! बस नाम ही हम एक का न जान सके…

आबादी भी तीन करोड़ से बढ़कर कुछ लाख रह गई है! इन छह दशकों में पाकिस्तान में कितने ही यज्ञ, हवन किये गए! कितने ही मंदिरों का निर्माण हुआ! हिन्दू लड़कियों को देखते ही वहां के लड़के लोट जाते हैं! उनकी चरणधूलि सिर पर लगा लेते हैं! और ऐसी ही स्थिति बांग्लादेश में है…

भारत में तो कश्मीर घाटी हिन्दू भाइयों से लहलहा उठी है! केरल, बंगाल, पूर्वोत्तर के राज्यों समेत सभी जगहों पर हिन्दू आबादी कितनी बढ़ रही है! पश्चिमी उत्तरप्रदेश के कई जिलों में घूमते हुए आपको किसी इस्लामिक देश में होने का अनुभव हो जाय तो घबराइये मत! यही तो तहज़ीब है… इसे ही कहते हैं सच्ची सहिष्णुता! भारत में भी सन सैंतालीस में मुसलमान साढ़े तीन करोड़ थे, अब घटते-घटते बीस करोड़ ही बचे हैं! कितना भय लगता है! फिल्मों में भी उनकी बिलकुल नहीं चलती! फटीचर शायरों पर हमारी परबुद्ध हिन्दू जनता लहालोट है… वाह वाह…!

कुल मिलाकर..अभी लात खाने की तैयारी करो… और इस बार जब लात खाओगे तो आने वाली पीढ़ियों में लिखा जाएगा कि कहीं कोई एक सभ्यता हुआ करती थी भारत, जहां विमूढ़ हिन्दू रहा करते थे… स्नेक चार्मर्स… उन्हें सांपों से इतना प्रेम था कि ज़हर पी कर मर गए।

मैं किसी से अल्पसंख्यक विरोधी होने की अपील नहीं कर रहा। मैं सपने में भी किसी अल्पसंख्यक का अहित नहीं चाहता। मैं तो यही चाहता हूं कि भारत आपसी सौहार्द्र का अदृष्टपूर्व उदाहरण बने। हा हा हा। ऐसा हो जाता तो खुशी से मर न जाता। यह तो सिर्फ मूर्ख सपना है।

अब संकट विकराल है। अस्तित्व की लड़ाई है और ग़लत का विरोध होना चाहिए। सत्य बोलो… धर्म पर चलो। नसीरुद्दीन शाह जैसों को आईना दिखाने की ज़रूरत है और उस चूसी हुई गुठली, पाकिस्तानी पिरधानमंत्री को बताना आवश्यक है कि तू अपने भुक्खड़ देश को संभाल… भारत के मुसलमानों की चिन्ता मत कर! मगर हमारे बुद्धिमान पत्तलकार तो चाटने में पीएचडी हैं… इमरान को देखते ही उनका मन बनाना स्विंग की तरह पहले इधर फिर उधर हो जाता है। घिन आती है…

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