जर्मनी को पछाड़ कर भारत बना दुनिया का 7वां सबसे बड़ा शेयर बाज़ार

अमेरिका, चीन, जापान, हांग कांग, ब्रिटेन, फ्रांस के बाद भारत विश्व का सातवां सबसे बड़ा स्टॉक मार्केट बन चुका है, भारत का स्टॉक मार्केट 2.08 लाख करोड़ डॉलर का हो चुका है. भारत ने यूरोप कि सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी को पछाड़ कर यह उपलब्धि हासिल की है.

एक देश के परिपेक्ष्य में आए दिन भारत के लिए पिछले साढ़े चार सालों में कई अच्छी खबरें आईं है, जो यह दर्शा रही है कि एक चाय वाले ने इस देश को कितने बेहतरीन ढंग से चलाया है और चला रहा है.

अर्थशास्त्री पीएम के जमाने में देश की अर्थव्यवस्था फ्रजाइल फाइव में थी लेकिन पिछले चार सालों में एक चाय वाले ने देश की अर्थव्यवस्था को फ्रजाइल फाइव की श्रेणी से बाहर निकाल कर दुनिया की 6वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना दिया, आने वाले 5 सालों में भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवथा बनने की ओर तेज गति से आगे बढ़ रहा है.

यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि इसी साढ़े चार साल में कई बड़े आर्थिक फैसले भी लिए गए जिनमें से एक नोट बंदी का फैसला था, पूरे विश्व ने भारत के इस कदम की प्रशंसा की, जो एजेंसियां भारत के लिए “इस देश का कुछ नहीं हो सकता” सोचती थी, वहीं एजेंसियां पिछले साढ़े चार वर्षो में भारत को कई अच्छी रेटिंग्स दिए जा रही है.

आज भारत ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग में 142 स्थान से लंबी छलांग लगाते हुए 77वें स्थान पर पहुंच गया, और यह सब मात्र चार साल में हुआ है.

अक्सर कुछ लोग जमीनी हकीकत का हवाला देते हुए मोदी सरकार के विरुद्ध रोते गाते रहते हैं, व्यापारी वर्ग के कुछ लोग मोदी को गालियां देते है, विपक्षियों ने तो पूरी कोशिश की है मोदी सरकार को बदनाम करने की, लोगों में भ्रम फैलाने की, लेकिन सच्चाई बिल्कुल उलट है.

वैश्विक स्तर पर आज भारत का जो नाम और पहचान है, वह भारत ने पिछले साढ़े चार सालों में हासिल किया है, तमाम मुश्किल हालातों का सामना करते हुए कैसे मोदी सरकार ने भारत को आज इस मुकाम पर खड़ा किया है इसकी हम सभी देशवासियों को प्रशंसा करनी चाहिए, पर बजाय इसके कुछ लोग दिन रात सिर्फ मोदी सरकार के विरुद्ध कोई ना कोई भ्रम फैलाते रहते हैं, लोगों को गुमराह करते रहते हैं.

अगर जीएसटी और नोट बंदी से देश को नुकसान हुआ होता तो ये विदेशी एजेंसियां भारत के लिए इतनी अच्छी रेटिंग्स क्यों दे रही होती? सोचने वाली बात यही है. नुकसान सिर्फ उनका हुआ है जो गलत रास्ते पर थे, मोदी सरकार के विरुद्ध वही आलोचना कर रहे हैं जिनको जीएसटी के बाद टैक्स देना पड़ रहा है, नोट बंदी से अनअकांउटेड करोड़ों रुपया, रुपया नहीं रहा.

इतना सब कुछ कैसे संभव हो पा रहा है? मोदी सरकार ने समस्याओं का जड़ सहित समाधान किया है, नई टेक्नोलॉजी की सहायता ली है, पुराने कानूनों को समाप्त किया है, सरकारी तंत्र को सुलभ बनाया गया है, सभी सरकारी विभाग और उनके कार्यों को ऑनलाइन किया है, जिसके कारण पारदर्शिता बढ़ी है.

समय समय पर समीक्षा की जाती है, और आवश्यकता पड़ने पर आवश्यक बदलाव भी किए जाते हैं. उदाहरण के लिए जीएसटी को ले लीजिए, डेढ़ साल पहले जीएसटी जब लागू हुआ तो उसकी टैक्स दर, रिटर्न फाइल इत्यादि को समय समय पर आसान किया गया है, वस्तुओं के टैक्स स्लैब को घटाया गया है. मोदी जी ने तो यहां तक कह दिया है कि आने वाले कुछ ही दिनों में सिर्फ 1% वस्तुएं 28% जीएसटी स्लैब में होंगी, बाकी 99% वस्तुएं 18% या इससे कम जीएसटी स्लैब में होने जा रही है.

मोदी सरकार ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाते हुए ऑनलाइन कर दिया है, सरकार ने ई-व्हीकल, सीएनजी व्हीकल के लिए परमिट/लाइसेंस राज को समाप्त किया, सरकार इंस्पेक्टर राज को समाप्त कर रही है, बड़े उद्योगों, लघु व सूक्ष्म उद्योगों के लिए पर्यावरणीय क्लीयरेंस प्रक्रिया को ऑनलाइन किया और आसान किया, सरकार ने विदेशी कंपनियों द्वारा भारत में निवेश करने की संपूर्ण प्रक्रिया को आसान किया इत्यादि ऐसे अनेक नीतिगत निर्णय पिछले साढ़े चार सालों में मोदी सरकार ने किए है और उसको सफलतापूर्वक लागू भी किया है.

यह सब चीजें आलोचकों को नहीं दिखाई देती, लोगों को नहीं दिखाई देती, पर वैश्विक एजेंसियों को दिखाई देती है, इसीलिए वैश्विक स्तर पर भारत की साख बहुत मजबूत हुई है, इसका अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि ओपेक संगठन जिसका भारत सदस्य तक नहीं है उसमें कच्चे तेल के दामों को तय करने के लिए भारत की राय लेना महत्वपूर्ण समझा जाने लगा है. भारत अब डॉलर की जगह रुपयों में व्यापार कर रहा है.

यही सब बातें है जो भारत को वैश्विक परिदृश्य में बड़ा बना रही है, महान बना रही है. और यह सब सिर्फ पिछले साढ़े चार वर्षो में एक चाय वाले प्रधानमंत्री, देश के इमानदार चौकीदार की मेहनत और नीतियों का नतीजा है.

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