किसी भी व्यक्ति या संस्थान के कंप्यूटर डेटा को जांच सकेंगी खुफिया एजेंसी

केंद्र सरकार ने सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को किसी भी व्यक्ति या संस्थान के कंप्यूटर के डेटा को जांचने का अधिकार दे दिया है।

एजेंसियों को यह अधिकार सूचना और प्रौद्योगिकी (आईटी) एक्ट की धारा-69 के तहत दिया गया है।

इस धारा में कहा गया है कि यदि एजेंसियों को किसी संस्थान या व्यक्ति पर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने का शक होता है तो वे उनके कंप्यूटर की जांच कर सकती हैं।

इस बारे में गृह मंत्रालय द्वारा सभी एजेंसियों को आदेश जारी किया जा चुका है।

कम्प्यूटर संसाधन के माध्यम से सूचना को कानूनी तरीके से खंगालने, निगरानी करने के बारे में कुछ बिन्दु

सूचना प्रौद्योगिकी (सूचना खंगालने, निगरानी करने और जांच करने हेतु प्रक्रिया और सुरक्षा) नियमावली 2009 के नियम 4 में यह प्रावधान है कि ‘सक्षम अधिकारी किसी सरकारी एजेंसी को किसी कम्प्यूटर संसाधन में सृजित, पारेषित, प्राप्त अथवा संरक्षित सूचना को अधिनियम की धारा 69 की उप धारा (1) में उल्लेखित उद्देश्यों के लिए खंगालने, निगरानी करने अथवा जांच करने के लिए अधिकृत कर सकता है’।

वर्ष 2009 में तैयार की गई नियमावली और तब से लेकर प्रभावी नियमों के अनुसार वैधानिक आदेश, दिनांक 20.12.2018 को जारी किया गया है।

वैधानिक आदेश दिनांक 20.12.2018 के द्वारा किसी सुरक्षा अथवा कानून का अमल करने वाली एजेंसी को कोई नया अधिकार नहीं दिया गया है।

मौजूदा आदेशों को कूटबद्ध करने के लिए आईएसपी, टीएसपी, मध्यवर्तियों आदि को अधिसूचित करने के लिए अधिसूचना जारी की गई है।

खंगाले जाने, निगरानी से जुड़े और जांच से जुड़े प्रत्येक मामले के लिए सक्षम अधिकारी यानि केन्द्रीय गृह सचिव द्वारा मंजूरी प्राप्त करनी होगी। सूचना प्रौद्योगिकी (सूचना खंगालने, निगरानी करने और जांच करने हेतु प्रक्रिया और सुरक्षा) नियमावली 2009 के अनुसार राज्य सरकारों में भी सक्षम अधिकारी के पास ये शक्तियां उपलब्ध हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी (सूचना खंगालने, निगरानी करने और जांच करने हेतु प्रक्रिया और सुरक्षा) नियमावली 2009 के नियम 22 के अनुसार, खंगालने अथवा निगरानी करने अथवा जांच करने के ऐसे सभी मामले को मंत्रिमंडल सचिव की अध्यक्षता में समीक्षा समिति में रखना होगा, जिसकी ऐसे मामले की समीक्षा के लिए दो माह में कम से कम एक बार बैठक होगी। राज्य सरकारों के मामले में ऐसे मामले की समीक्षा संबंधित मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा की जाएगी।

वैधानिक आदेश दिनांक 20.12.2018 से निम्नलिखित रूप में मदद मिलेगी –

यह सुनिश्चित करना कि किसी कम्प्यूटर संसाधन के माध्यम से किसी सूचना को खंगाले जाने, निगरानी करने अथवा जांच करने का कार्य यथोचित कानूनी प्रक्रिया के साथ किया गया है।

इन शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अधिकृत एजेंसियों के बारे में और किसी एजेंसी, व्यक्ति अथवा मध्यवर्ती द्वारा इन शक्तियों का किसी रूप में अनधिकृत इस्तेमाल की रोकथाम के बारे में अधिसूचना जारी करना।

उपर्युक्त अधिसूचना यह सुनिश्चित करेगी कि कम्प्यूटर संसाधन को कानूनी तरीके से खंगाला गया है अथवा निगरानी की गई है और इस दौरान कानून के प्रावधानों का पालन किया गया है।

स्रोत : http://pib.nic.in/PressReleseDetail.aspx?PRID=1556988

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