मध्यम वर्ग की भी कुछ सोचिए सरकार!

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, पुरानी कहावत है कि “अब पछताय का होत है जब चिड़िया चुग गई खेत”।

पिछले एक साल में जाने कितनी बार आपको मुझ जैसे बहुत से लोगों ने फेसबुक पर टैग कर कर पोस्ट लिखीं, ट्वीट किए कि क्या गलत हो रहा है जो नहीं होना चाहिए था पर किसी ने न सुना।

नतीजा – हमारे तीन खेत कब्ज़ा लिए धरती को बंजर कर देने वाले कथित किसान ने।

और अब उसकी नज़र हमारे पूरे देश पर है, हम सब तो रोकने की कोशिश करेंगे ही पर आपसे भी कुछ कदम उठाने की अपेक्षा है जिससे हमारी जीत 2019 में सुनिश्चित हो।

सर्वप्रथम, GST में ओरिजिन पर ही एमआरपी पर टोटल टेक्स जमा कराने का ऑप्शनल प्रावधान हो, यानी कोई कम्पनी चाहे तो वो अपने प्रोडक्ट की एमआरपी पर GST जमा कराने के बाद माल आगे भेजे।

इसका फायदा चेन में मौजूद हर व्यापारी को होगा। किसी को भी दुबारा उस माल के संदर्भ में कोई टेक्स जमा नहीं करना होगा। लोग कोशिश करेंगे कि सिर्फ उस कम्पनी का माल बेचें जिसका GST ऑलरेडी पेड है और विभागों पर काम का बोझ कम होगा।

इसके बाद पेट्रोल और डीजल पर कस्टम, वैट/GST प्रति लीटर तय कर दीजिए, न कि प्रतिशत में। इससे क्रूड का रेट बढ़ने पर टैक्स की मात्रा नहीं बढ़ेगी और रेट कंट्रोल में रहेंगे और कोई भी राज्य सरकार इन पर मनमाना टेक्स नहीं वसूल पाएगी।

तीसरी बात, एट्रोसिटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदल कर आप बहुत बड़ी गलती कर चुके हैं, इसको सुधारने का कोई रास्ता खोजिए।

इसके बाद नंबर आता है बीजेपी आईटी सेल का। यह नाकारा है, इनको अपनी उपलब्धियों को प्रचारित प्रसारित करना नहीं आता, इससे बेहतर काम तो हम फेसबुकिये कर लेते हैं, इसको सुधार की जरूरत है।

पांचवी बात… केंद्रीय मंत्रिमंडल में गिनती के लोग हैं जो काम कर रहे हैं, बाकी सिर्फ शोभा बढ़ा रहे हैं, उन सबको तय वक्त में पूरा करने का टास्क दीजिये।

तदुपरांत, न्यायिक व्यवस्था में चार्टर लागू कीजिये कि किस प्रकृति के केस में कितना वक्त अधिकतम लगना चाहिए। अनलिमिटेड टाइम, जैसे सिख नरसंहार का किसी बड़े आदमी के खिलाफ पहला फैसला 34 साल बाद आया, ये न्याय नहीं अन्याय है।

अंत में… जब कर्ज माफ करने जैसे आत्मघाती कदम ही वोट दिलाते हैं तो सिर्फ विकास के नाम पर चुनाव जीतने की सोचना अब बेवकूफी लग रही है। ये देश कभी अक्ल नहीं सीखेगा, मध्यम वर्ग को भी ऐसे तोहफे दीजिये। आपने ऐसा नहीं किया और हार गए, तो आपके किये सभी पर पानी फिर जाना है और आपके इकट्ठा किये सब कुछ का दुरुपयोग अगली सरकार करेगी, क्या वो ठीक होगा?

आशा है आप इसको पढ़ेंगे और मनन करेंगे।

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