असफलता का दोष परिस्थिति को देने वाले इस ‘भिखारी’ से लें प्रेरणा

श्री राम शर्मा आचार्य ने एक बार कहा था… सज्जन अमीरी में गरीब जैसे रहते हैं और गरीबी में अमीर जैसे।

जब से मैंने पढ़ा तब से ऐसे सज्जन की तलाश कर रही थी… अमीरी में गरीब जैसे रहने वाले एक सज्जन मिले थे, पर गरीबी में अमीर जैसे नहीं मिले थे।

गुजरात के मेहसाणा में एक भिखारी है खेमजी भाई।

मंगलवार और शनिवार को हनुमान मंदिर के पास बैठ कर भीख मांगते हैं।

पैरों से लाचार हैं… वैशाखी के सहारे चलते हैं… अधेड़ उम्र के हैं… भीख में मिले पैसों से ही इनका गुजारा होता है।

खेमजी भाई के पास धन नहीं है, पर मन के धनवान है।

जहाँ चाह वहाँ राह… भीख के पैसों में से ही बचत करनी शुरू की और पिछले साल गरीब औरतों के लिए साड़ी दान की।

लोगों को जब इनके दान के विषय में पता चला तब से भीख में ज्यादा पैसे मिलने लगे।

अपनी बचत के पैसों से 100 कम्बल खरीदे और मेहसाणा के सरकारी हॉस्पिटल में गरीबों के लिए दान कर दिए।

गरीब लड़कियों की पढ़ाई में भी बहुत मदद करते हैं… एक जैन मंदिर के पास से भीख माँग कर बारह लड़कियों को सोने की बालियाँ दीं पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए…

खेमजी भाई चाहते हैं कि लड़कियां पढ़-लिख कर आत्मनिर्भर बनें इसलिए उनकी सहायता करते रहते हैं।

रोटरी क्लब ने उनको लिट्रेसी अवार्ड दिया है… उनके साथ तीन और सामाजिक कार्यकर्ताओं और एक संगठन को भी अवार्ड दिया गया… उसमें से सिर्फ खेमजी भाई ही ऐसे थे जिनके पास अपने पैसे नहीं थे।

करोड़पति खानदान में जन्म लेने वाले ऐसे हज़ारों होंगे जिनसे बिना किसी लाभ की आशा के सौ रुपये भी किसी को नहीं दिया जाता है।

दूसरी तरफ खेमजी भाई जैसे लोग भी हैं जिनके पास कुछ भी नहीं है, वो दिल खोल कर सहायता करते हैं।

जब कोई किसी काम को करने का संकल्प दिल से कर लेता है तब परिस्थिति मायने नहीं रखती है।

असफलता का दोष परिस्थिति को देने वालों को खेमजी भाई से प्रेरणा लेना चाहिए।

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