हाँ, मोदी ने रेवड़ियां नहीं बांटी इसलिए शायद दिखाई न दें अच्छे दिन

मोदी सरकार लगातार शासन व्यवस्था को सुधारने के प्रयास में एक के बाद एक इस तंत्र में बदलाव कर रही है, आधुनिक तकनीक से भ्रष्टाचार को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है।

लोगों को, लेकिन ये सब छोटे छोटे बदलाव दिखाई नहीं देते, लोगों को सब कुछ इसी 5 साल में चाहिए, तुरंत चाहिए। लोग चाहते हैं सब कुछ एक झटके में ही सही हो जाए।

मोदी ने जहां कई दशकों पुराने 1700 से अधिक कानूनों को खत्म किया है, वहीं इस सरकारी सिस्टम में व्याप्त लूप होल्स को बंद किया जा रहा है, इसमें तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है।

अब जैसे ऊपर प्रदर्शित तस्वीर को देख लीजिए। यह तस्वीर लखनऊ-रायबरेली हाईवे की है। हाईवे पर अब इस तरह ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों को पकड़ा जाएगा। अगर आपकी गाड़ी निर्धारित गति से अधिक तेज़ चल रही है तो चालान स्वतः आपके घर पहुंच जाएगा।

हो सकता है आपने इसको पहले देखा हो, या आपके शहर में यह पहले से ही हो, पर मैं यह बदलाव पहली बार देख रहा हूं।

हमारे यहां पिछले साल तक आरटीओ में दलालों का राज हुआ करता था। आज स्थिति यह है कि दलालों का रोज़गार छीन गया। अब बताइए ये लोग मोदी की तारीफ करेंगे क्या?

अब लोग पूछते है कि अच्छे दिन कहां है? आरटीओ में 3000 रूपए देकर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना पड़ता था, अब सब धीरे धीरे ऑनलाइन हो रहा है। 3000 का काम अब 1500 में ही हो रहा है, क्या यह अच्छे दिन नहीं है?

ऐसे ही अनेक क्षेत्रों में अनेक उदाहरण भरे पड़े हैं। राशन वाले पहले गरीबों के हक़ का राशन बेच के खा जाते थे, राशन कार्ड को आधार से लिंक करने के बाद यह दलाली भी बंद हो गई। अब बताइए राशन विक्रेता मोदी से खुश रहेगा क्या?

मोदी ने एलपीजी कनेक्शन को आधार से लिंक किया, एलपीजी सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग पूरी तरह बंद हो गई। जहां 2014 से पहले गैस सिलेंडर लेने के लिए लंबी लंबी लाइनें लगानी पड़ती थीं, वहीं आज आराम से घर बैठे मिल जा रहा है। फोन पर बुकिंग हो रही है और अगले दिन एलपीजी सिलेंडर घर पहुंचा दिया जा रहा है। अब बताइए जिस ब्लैक मार्केटिंग करने वाले का धंधा बंद हो गया क्या वो मोदी की तारीफ करेगा?

मोदी सरकार के खिलाफ ये जितनी नकारात्मकता फैलाई गई है, सब इन्हीं लोगों द्वारा फैलाई गई है जिनका 2 नंबर का धंधा बंद हो गया। जिनका घर सिर्फ दलाली से ही चलता था, वो मोदी की तारीफ थोड़े करेगा।

पहले व्यापारी टैक्स देने से बच जाता था क्योंकि कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी, कोई अकाउंटेबिलिटी नहीं थी। जीएसटी के बाद सभी व्यापारी स्वत: ही इसके दायरे में आ चुके है, जिन्होंने जीएसटी लिया है वो भी, जिन्होंने नहीं लिया वो भी।

और जब व्यापारी अपनी जेब से जीएसटी नहीं भरता है तो वो इतना रोता क्यों है? व्यापारी जब कोई माल थोक में खरीदता है, तो उसपर जीएसटी देता है। जब वो वही माल बेचता है जो उसमें वो जीएसटी जोड़ कर ही बेचता है। अंततः जीएसटी का पैसा जनता से ही लेता है। अब ऐसा व्यापारी जो कभी टैक्स नहीं देटा था उसको टैक्स देना पड़ेगा तो क्या वो मोदी से खुश होगा?

लोग कहते हैं मोदी ने ये गलत किया वो गलत किया, पर मै कहता हूं मोदी ने कुछ गलत नहीं किया है, मोदी ने गलत को सही किया है। बस वो जो हम बरसों से करते आ रहे थे जो हमको लगता था कि ये सही है, ऐसा करना हमारा अधिकार है पर असल में वो होता नहीं था लेकिन कोई ठोस व्यवस्था ना होने के कारण दशकों तक वैसी ही व्यवस्था चलती रही।

सरकारें भी लूटने में व्यस्त थी, जनता को भी मलाई मिल रही थी। मोदी ने बस हमको उस गलत ट्रैक से सही ट्रैक पर ला दिया, हम अब जब सही ट्रैक पर चल रहे है तो हमको गलत ट्रैक सही लग रहा है और सही ट्रैक गलत लग रहा है।

यही कारण है कि कुछ लोग मोदी से नाराज़ है। सरकारी केंद्रीय कर्मचारी इसलिए मोदी से नाराज़ नहीं है कि मोदी राज में उसकी तनख्वाह नहीं बढ़ी बल्कि इसलिए नाराज़ है कि पहले कामचोरी चल जाती थी अब काम करना पड़ रहा है। पहले सिर्फ कुर्सी तोड़ते थे अब अपनी चप्पलें भी घिसना पड़ रहा है, इसलिए सरकारी कर्मचारी मोदी से नाराज़ है। बाकी तनख्वाह की बात करें तो अच्छी खासी सैलरी बढ़ी है जबकि महंगाई दर इस 5 साल के कार्यकाल में कभी भी औसत 4% के उपर नहीं गई है।

मोदी राज में हर चीज आसान हुई है, पारदर्शी हुई है, और आम जन, गरीब जन की पहुंच में आई है। लोग कहते है मध्यम वर्ग के लिए मोदी ने क्या किया? नोट बंदी से क्या फायदा मिला? नोट बंदी से सभी वर्ग को कई फायदे मिले हैं, पर मध्यम वर्ग को जो सबसे बड़ा फायदा मिला है वो है कि प्रॉपर्टी के रेट कम हो गए। जो प्रॉपर्टी 50 लाख की थी 2016 से पहले वो 2017 में 25-30 लाख की हो गई। सीधा सीधा 20-25 लाख का फायदा हुआ है। ऐसे ही अनेक फायदे हुए है पर लोग देखना नहीं चाहते।

क्या ये सब अच्छे दिन नहीं है? ज़रा अपने आस पास हुए उस हर छोटे छोटे बदलाव को महसूस कीजिए, तब पता चलेगा कि जिस अच्छे दिन का वादा मोदी ने किया था वो वादा पूरा किया है या नहीं।

हां, मोदी ने रेवड़ियां नहीं बांटी है इसलिए शायद आपको अच्छे दिन नहीं दिखाई देंगे।

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