मोदी भक्त नहीं हूं मैं

लेख लंबा है लेकिन अगर ध्यान से पढ़ेंगे तो आपको आपके सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे।

मध्यप्रदेश में हुई भाजपा की हार के पश्चात शिवराज सिंह चौहान पर मैंने गत 13 दिसम्बर को एक लेख लिखा था कि उनकी हार से खिन्न और बहुत क्षुब्ध हूं। जबकि शिवराज सिंह चौहान से मेरा किसी प्रकार का कोई सम्बन्ध कभी नहीं रहा। सच तो यह है कि उप्र में चुनावी प्रचार के दौरान शिवराज सिंह चौहान का चेहरा दो-चार बार दूर से ही देखा है।

[इसलिए खिन्न और क्षुब्ध कर रही है शिवराज सिंह चौहान की हार]

भाजपा का प्राथमिक सदस्य भी मैं कभी नहीं रहा। आज भी नहीं हूं। मोबाइल से मिस कॉल कर के सदस्यता लेने की सुविधा से बना सदस्य तक भी नहीं हूं। संघ की किसी शाखा में भी आजतक नहीं गया हूं। मप्र में मेरा कोई घरद्वार भी नहीं है। फिर शिवराज सिंह चौहान की हार से खिन्न और क्षुब्ध क्यों हूं मैं?

इसका कारण है पिछले 13 वर्षों में मप्र के आम आदमी, विशेषकर गरीब आदमी के जीवन में आए वो बदलाव जिसकी प्रतीक्षा वो 50 से अधिक वर्षों से कर रहा था।

जो बदलाव शिवराजसिंह चौहान ने 13-15 वर्षों में किये वो बदलाव जब कांग्रेस ने अपने 50 वर्षों के शासनकाल में नहीं किये थे तो अब वो कोई ऐसा बहुत बड़ा कमाल करेगी, ऐसी मूर्खतापूर्ण सोच के शेखचिल्ली सपनों के संसार में मैं नहीं रहता।

मप्र में सत्ता जिन कांग्रेसी नेताओं के हाथ पहुंची है वो किसी पुष्पक विमान से किसी देवलोक से मप्र में अचानक नहीं पधारे हैं। जिस कमलनाथ के हाथ सत्ता लगी है वो पिछले 40 वर्षों से मप्र की उच्च स्तरीय राजनीति में सक्रिय हैं।

आने वाले दिन यह सिद्ध करेंगे कि मैं क्या कह रहा हूं। क्योंकि संवेदनशील हूं। कड़वी राजनीतिक सच्चाईयों को भी समझता हूं इसलिए भलीभांति यह जान समझ भी रहा हूं कि लगभग सवा आठ करोड़ की आबादी वाले मप्र में गरीब और आम आदमी पर अब क्या गुज़रने वाली है?

दुःख इस बात का है कि वो उस पाप/अपराध की सज़ा भोगेगा जो उसने किया ही नहीं है। उसने तो शिवराज सिंह चौहान को ही चुना था। लेकिन डेढ़ दर्जन से ज्यादा सीटों पर 1000-500 वोटों से हुई शिवराज सिंह चौहान की हार ने उन करोड़ो गरीबों की उम्मीदों-सपनों और भविष्य पर कालिख पोत दी है।

चुनाव आयोग का रिकॉर्ड बताता है कि केवल 7 सीटों पर कुल 4300 वोट यदि भाजपा को मिल गए होते तो कांग्रेस बहुमत से बहुत दूर 107 सीटों पर होती और शिवराज सिंह चौहान 116 सीटों के साथ बहुमत के आंकड़ें को पार कर गए होते।

ध्यान रहे कि सोशल मीडिया में झूठी गलत अफवाहों का ज़हर महीनों तक लगातार फैलाकर 4-5 हज़ार लोगों को भ्रमित करना, बरगलाना कोई कठिन काम नहीं है। यह काम तब और सरल हो जाता है जब राष्ट्रवाद/ हिन्दूवाद की नकाब पहनकर यह कुकर्म किया जाए।

यही कारण है कि चुनाव के बाद जब उज्जैनी भिखमंगे सरीखे धूर्त राष्ट्रवादी/ हिन्दूवादी बहुरूपियों ने अपनी दम्भी आपराधिक गर्वोक्तियों का नगाड़ा यह कह कर पीटना शुरू किया कि “भाजपा को बिजली का झटका देकर सबक सिखा दिया” तो मेरा खून खौल उठा क्योंकि सोशल मीडिया में राष्ट्रवाद/ हिन्दूवाद की नकाब पहनकर घूम रहे इन लम्पटों ने अपने नीच घृणित क्षुद्र स्वार्थों से सराबोर सोशल मीडियाई कुकर्म के द्वारा भाजपा को नहीं बल्कि करोड़ों गरीबों के जीवन को बिजली का जोरदार झटका दिया है।

ध्यान रहे इस हार से शिवराज सिंह चौहान के जीवन में फिलहाल यही बदलाव आया होगा कि उनको आराम करने का समय अब ज्यादा मिल रहा होगा। परिवार के साथ समय व्यतीत करने का वह भरपूर सुख भी उन्हें मिल रहा होगा जो पिछले डेढ़ दशकों में उनके लिए दुर्लभ रहा होगा।

सत्ता जाने की मानसिक पीड़ा कुछ दिनों पश्चात स्वतः ही कम हो जाएगी। लेकिन उन लोगों के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आने वाला है जिनका मामा बनकर शिवराज सिंह चौहान ने पूरे मप्र की धरती नाप डाली थी। उनके सुख दुख को स्वयं जाना समझा था। जीवन के दुखों को दूर करने के ठोस प्रयास किये थे।

शिवराज सिंह चौहान के उपरोक्त उदाहरण की लम्बी भूमिका के बाद मैं मोदी विरोधी समस्त गैंगों समेत उज्जैनी भिखमंगे और उसके सरीखे प्रत्येक तथाकथित राष्ट्रवादी/ हिन्दूवादी लम्पट को चुनौती देता हूं कि एक सरकार का जो कार्यक्षेत्र होता है उस कार्यक्षेत्र के किसी भी हिस्से (विभाग) का ऐसा कोई एक उदाहरण साक्ष्य मेरे या आप मित्रों के समक्ष वो प्रस्तुत करे, जिससे यह सिद्ध हो कि इस हिस्से में मोदी सरकार से ज्यादा और बेहतर कार्य कांग्रेस की यूपीए सरकार ने किया था।

केवल यूपीए नहीं बल्कि आज़ादी के बाद से देश में अबतक बनी किसी भी सरकार ने किसी भी हिस्से (विभाग) में मोदी सरकार से ज्यादा और बेहतर कार्य किया हो ऐसा एक भी उदाहरण नहीं मिलता।

अतः जब मोदी के बारे में सोचता लिखता बोलता हूं तो मोदी की भक्ति नहीं करता। इसके बजाय उन करोड़ों गरीबों को ध्यान कर के सोचता लिखता बोलता हूं जिनकी ज़िन्दगी में सुखद बदलाव लाने के सफल प्रयास कर रही है मोदी की सरकार।

मेरे लिए मोदी एक व्यक्ति नहीं प्रतीक हैं, एक विचार हैं, एक संकल्प हैं, एक मानसिकता हैं जो उन करोड़ों गरीबों का जीवन बदल रही है जिन्होंने ज़िंदगी में कभी दो वक्त की रोटी नियमित रूप से नहीं खाई थी। सदियों से जिनकी पीढ़ियों ने सिर पर पक्की छत नहीं देखी थी। अपने घर मे जलता हुआ बिजली का दूधिया LED बल्ब जिनके लिए आकाश के तारे सा दुर्लभ था…

क्रमश: शेष अन्तिम भाग अगले लेख में…

इसलिए खिन्न और क्षुब्ध कर रही है शिवराज सिंह चौहान की हार

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