चौकीदार नहीं है चोर, बौखलाहट में कमीशनखोर

सुप्रीम कोर्ट ने टुकड़े-टुकड़े ब्रिगेड को तमाचा मार कर बताया कि चौकीदार चोर नहीं है। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इसे आगे बढ़ाया और कहा कि चौकीदार चोर नहीं है, बौखलाहट में कमीशनखोर है।

आज ही दिन में एक सहपाठी ने लिखा था कि दस जनपथ ने पीआईएल गिरोह के सरगना और भाजपा से लतियाए गए कुछ पूर्व मंत्रियों को रफाल सौदे को पप्पूगिरी से बाहर निकाल कर विश्वसनीय बनाने के लिए इनके साथ साठ करोड़ रुपए की डील की थी।

[पप्पू निकला बोफ़ोर्स ले के]

पैसे डूब गए तो आलू से सोना निकालने वाले ने कहा, “चौकीदार चोर है, सुप्रीम कोर्ट का फैसला झूठ पर आधारित है।”

फैसला सुनाने वाले वही जज थे जो कुछ दिन पहले तक टुकड़े-टुकड़े ब्रिगेड की आंख का तारा थे। चौकीदार को चोर बताने और सुप्रीम कोर्ट को झूठा बताने वाला जनेऊधारी अब जेपीसी से जांच कराना चाहता है।

[रफ़ाल और राजनीति का पप्पू काल]

दरबारियों सहित सारे ओवरग्राउंड जेहादी सिम्पैथाइज़रों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नहीं, सच्चाई जेपीसी की जांच से ही सामने आएगी। इसी जेपीसी ने पाया था कि बोफोर्स सौदे में राजीव गांधी ने एक्को पैसा घूस नहीं खाया था। ये जेपीसी चुटकुला थी। पर चुटकुले और भी हैं। इसी रफाल डील में।

कैसे?

सिर्फ भारत में ही ऐसा हो सकता है। रफाल का पूरा सौदा ही 58,000 करोड़ का है। उसमें भी ऑफ़सेट सिर्फ 30 हजार करोड़ का है। उस आफसेट में अब 100 से ज्यादा साझेदार (मय एचएएल) हो चुके हैं। अनिल अंबानी को मिला है सिर्फ साढ़े तीन हजार करोड़ का ठेका।

और गबन की रकम एक लाख तीस हजार करोड़ की पीक तक पहुंच कर तीस हजार करोड़ पर फिक्स हुई है। अनिल अंबानी अपनी उज्ज्वल धवल को छवि को हुए नुकसान के लिए जितने मुकदमों में जितना हर्जाना मांग रहे हैं, वह रकम 80,500 करोड़ तक पहुंच चुकी है।

[आंख मारने वाले अध्यक्ष को भले इसमें स्कैम दिखे, पर अबतक का सर्वश्रेष्ठ रक्षा सौदा है रफाल]

अब असली बात पर आएं। घोटाला कितने का हुआ वो अहमद पटेल जैसा दरबारी भी नहीं बता सकता। मेड इन भोपाल मोबाइल फोन का निर्माता रफाल की कीमत और अंबानी को हुए मुनाफे की रकम जब मन तब खुद ही संशोधित कर देता है।

एक दिन तो उसने कुछ ही घंटे में सरकारी खजाने के एक लाख करोड़ बचा लिए। दिन में उसने कहा कि सरकार ने रफाल की देखभाल व मरम्मत के लिए जो लाइफ साइकिल एग्रीमेंट किया है, उसकी पूरी रकम एक लाख तीस हजार करोड़ बनती है। इस तरह मोदी ने अंबानी को एक लाख तीस हजार करोड़ का फायदा पहुंचाया।

लेकिन शाम होते-होते लाइफ साइकिल एग्रीमेंट गायब हो गया और एक लाख तीस हजार करोड़ की रकम फिर तीस हजार करोड़ तक सिमट गई।

इस तरह से इस अर्ध इतालवी होनहार ने भारत के एक लाख करोड़ रुपए कुछ ही घंटों में बचा लिए। नोटासुर इतने गदगद हुए कि राजस्थान और मध्य प्रदेश में सरकार बनाकर कृतज्ञता ज्ञापित की।

छोटे अंबानी भी कम नहीं हैं। घाटा कैसे पूरा करें? उन्होंने जो कर दिखाया है वह ‘न भूतो न भविष्यति’ है।

गैंग की ज़कात से चलने वाली वेबसाइट ‘क्विंट’ की एक खबर बताती है कि अनिल अंबानी अब तक विभिन्न नेताओं और मीडिया घरानों पर मानहानि के कुल 16 दावे ठोक चुके हैं और इन दावों में अपनी उज्ज्वल धवल छवि को हुए नुकसान की मरम्मत के लिए उन्होंने जो हर्जाना मांगा है उसकी पूरी रकम 80,500 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है।

खास कृपा बरसी है एनडीटीवी पर जिससे उन्होंने दस हजार करोड़ का मुआवजा मांगा है। सीमा मुस्तफा की ‘द सिटीज़न’ से सात हजार करोड़ और राहुल गांधी के अपने अखबार ‘द नेशनल हेरल्ड’ से उन्होंने पांच करोड़ का मुआवजा मांगा है। अभी 26 नवंबर को उन्होंने वायर पर छह हजार करोड़ का दावा फिर ठोक दिया है। शायद यह पूर्ण विराम नहीं है। अंबानी भी लगता है कि मुआवजे की रकम एक लाख तीस हजार करोड़ पहुंचा कर मानेंगे।

अनिल भाई आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं।

फिलहाल तो पूर्व में परिवार के चहेते रहे जज के फैसले से लगता है कि अनिल भाई ‘पंजे’ को दबोचने वाले हैं। आने वाले दिन दिलचस्प होंगे। 2019 में नोटासुरों की कृपा से सेक्यूलर सरकार नहीं बनी तो, या तो माफी मांगी जाएगी या बन गई तो कोई जेल में होगा। टुकड़े-टुकड़े गैंग जब तक सत्ताबदर है, रफाल प्रहसन चलता रहेगा, फेसबुक से लेकर चुनावी रैलियों और कचहरी तक। हम तथ्यात्मक जवाब देते रहेंगे।

आंख मारने वाले अध्यक्ष को भले इसमें स्कैम दिखे, पर अबतक का सर्वश्रेष्ठ रक्षा सौदा है रफाल

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