ज्योतिषाचार्य राहुल सिंह राठौड़ : चुनावी विश्लेषण और भविष्यवाणियां

Rahul Singh Rathore

चुनाव का मौसम आते ही लोग मुझसे सवाल पूछने लगते हैं कि इस चुनाव में नतीजा क्या रहेगा? मैं ईमानदारी से बता देता हूँ कि मुझे कुछ भी नहीं पता, पर लोगों को लगता है कि ये बताना नहीं चाहता है. मैं ईश्वर को साक्षी मानकर कह रहा हूँ कि इन विषयों में जैसे आपका मस्तिष्क ब्लैंक हो जाता है, वैसे ही मेरे मस्तिष्क में भी कुछ नहीं आता. अभी राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के चुनाव में बहुत लोगों ने चुनाव परिणाम जानने के लिए मुझे मैसेज किये.

मुझे बस ये पता था कि भारतीय जनता पार्टी की अप्रैल, 2018 से जनवरी, 2019 तक चन्द्रमा की महादशा में चन्द्रमा की ही अन्तर्दशा चल रही है. चन्द्रमा मारकेश होकर षष्ठ भाव में नीच का है और उतरती साढ़ेसाती के प्रभाव में है. इससे मैं सिर्फ ये निष्कर्ष निकाल पाया कि ये समय भाजपा के लिए ठीक नहीं है. इसी आधार पर, जब नवम्बर-दिसम्बर, 2018 में पाँच राज्यों के चुनाव के साथ लोकसभा का भी चुनाव कराने की बात चल रही थी तो मैंने इसका विरोध किया था.

इसके बावजूद मैं ये कहना चाहता हूँ कि इस सीमित जानकारी के आधार पर अगर मैं बड़े-बड़े दावे करता तो वो सिर्फ मेरे विचार और पूर्वाग्रह होतें, न कि ज्योतिषिय भविष्यवाणी. एक ज्योतिषी को अपने ज्ञान के सीमा के भीतर ही रहना चाहिए, बलात् उसका अतिक्रमण नहीं करना चाहिए.

मेदिनी ज्योतिष के कुछ सूत्रों के प्रयोग करने पर कुछ और बातें स्पष्ट हो सकती हैं. पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जब महामना मनिषियों ने मेदिनी ज्योतिष का ज्ञान प्रतिपादित किया था, तब राजतंत्र था और आज लोकतंत्र है. राजतंत्र के लिए प्रतिपादित सूत्र लोकतंत्र पर सटीक नहीं बैठ सकते. लोकतंत्र में चुनाव में लाखों लोगों की कुण्डलियाँ आपस में टकराती हैं. पार्टियों की कुण्डली, प्रदेश की कुण्डली, महत्वपूर्ण राजनेताओं की कुण्डली पर एक साथ ध्यान टिका कर रखना संभव नहीं है. इसके अतिरिक्त पर्दे के पीछे अनेकों ऐसे किंग मेकर होते हैं जिनका हमें पता तक नहीं होता, पर उनकी कुण्डलियाँ चुनाव की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होती हैं.

मैं देखता हूँ कि चुनाव का मौसम आते ही अनेकों ज्योतिषी भविष्यवाणी करना आरम्भ कर देते हैं. अगर किसी ने कर्णपिशाचिनी या ऐसी ही कोई साधना कर रखी है तो वो बिलकुल सटीक आँकड़े तक बता सकता है, लेकिन ये कोई ज्योतिषिय गणना नहीं है. इसके लिए रत्तीभर भी ज्योतिष का ज्ञान नहीं चाहिए. इसमें साधक द्वारा वशीभूत उसका ईष्ट कोई डाकिनी, योगिनी या कर्णपिशाचिनी उसके कान में मनोवांछित प्रश्न का सटीक उत्तर बता देती है.

एक अशोक सेनबेतरा जी हैं जो कि सुदर्शन पद्धति से कुण्डली देखने की बात करते हैं. उन्होंने 2014 लोकसभा चुनाव की बिलकुल सटीक भविष्यवाणी करते हुए पार्टियों को मिलने वाले सीटों तक की एकदम हुबहू भविष्यवाणी कर दी थी. मैं भी हैरान था कि आखिर ये कैसे करते हैं. लेकिन उसके बाद से लगभग उनकी सारी भविष्यवाणियाँ बुरी तरह फ्लॉप हुई हैं. अभी हाल के छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश के चुनाव में, वे तीनों ही जगह भाजपा के जीतकर सरकार बनाने की भविष्यवाणी किये हुए हैं, जो बुरी तरह गलत साबित हो गई. उन्होंने यहाँ तक कहा था कि राजस्थान में भाजपा जीतेगी पर जनता वसुंधरा राजे को हरा देगी और मुख्यमंत्री कोई राजपूत “ए” या “आर” नाम वाला बनेगा. पर ये सारी बातें मात्र कपोलकल्पना साबित हुईं.

मैं जब बारहवीं क्लास में था तो पश्चिम बंगाल बोर्ड के अंग्रेजी विषय में एक चैप्टर था – “West Is West”. इसमें भारत को साँप-संपेरों का देश घोषित करते हुए इसका मजाक उड़ाया गया था और इसके तुलना में अपने पश्चिम के देशों को महान दिखाया गया था. ये बात तभी से मेरे दिल में चुभी हुई थी. इसी बीच मुझे कुछ मिस्टिकल एक्सपिरिंस होने लगे और साथ ही ज्योतिष के ग्रन्थों के रहस्य अपनेआप प्रकट होने लगे. इन दोनों के रेयरेस्ट ऑफ रेयर समिश्रण ने अध्यात्म और ज्योतिष पर लिखने के लिए प्रेरित किया.

मेरी कोशिश रही कि मैं ये समझा पाऊँ कि हमारा भगवान सामी धर्मों की तरह इस दुनिया को बनाकर किसी सातवें आसमान में नहीं बैठा है, बल्कि वो हम सबके बीच हर पल लीला कर रहा है. इसी उद्देश्य से पुस्तक लिख रहा हूँ, जिसके अनेकों अध्याय को फेसबुक पर पोस्ट भी कर चुका हूँ.

मेरी ये पुस्तक भृगु ऋषि द्वारा प्रतिपादित भृगु ज्योतिष पर कुछ दिव्य अनुभव लिखे बिना अधूरा रहता. इसी अधूरेपन को पूरा करने के लिए पिछले महीने दस हजार खर्चा करके भीलवाड़ा जिले के कारोई गाँव गया था. मूर्धन्य ज्योतिषी के.एन.राव साहब ने अपनी पूरी जिन्दगी में सबसे ज्यादा जिस ज्योतिषी की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है वो हैं कारोई के नाथू लाल व्यास जी. ये वही हैं जिन्होंने प्रतिभा पाटिल के राष्ट्रपति बनने की पूर्व में ही भविष्यवाणी कर दी थी. इनके पास ही स्मृति ईरानी के जाने पर मीडिया ने हल्ला मचा रखा था. इन्होंने स्मृति ईरानी से कहा था कि वो चुनाव हारेगी, फिर भी मंत्री बनेगी और आगे चलकर भारत का राष्ट्रपति बनेगी.

मेरी वहाँ कुण्डली दिखवाने की जगह भृगु ज्योतिष को समझने में अधिक रुचि थी. हमलोग वहाँ तीन लोग गए थे, जिसमें से उन्होंने दो को मंत्री और एक को प्रधानमंत्री बना दिया. मजे की बात ये थी कि जिस एक व्यक्ति को वो मंत्री बनने की भविष्यवाणी किये, उसे पहले कुण्डली देखते ही बोले कि तुम्हारा तुला लग्न है, इसलिए तुम राजनीति में कभी नहीं जा सकते, इसलिए चुपचाप अपना धंधा करो और राजनीति छोड़ दो.

तब मुझे हस्तक्षेप करते हुए बोलना पड़ा कि महाराज आपने ये पूर्वाग्रह क्यों पाल रखा है कि तुला लग्न वाले राजनीति नहीं कर सकतें. महात्मा गांधी, बराक ओबामा आदि बड़े-बड़े राजनेता तुला लग्न वाले हैं. मैंने उस कुण्डली में अनेकों राजयोग दिखलाया और साथ ही एक प्रबल परिवर्तन योग दिखाया. मैंने फिर स्पष्ट किया कि जिसे आप कह रहे हैं कि ये राजनीति में कभी नहीं जा सकता, वो ऑलरेडी भाजपा का पदाधिकारी है. तब उन्होंने अपने पूर्व के बातों को पलटते हुए कहा कि तुम बिलकुल राजनीति मत छोड़ना, तुमको मंत्री बनना है.

कारोई एक बहुत छोटा गाँव है, जो भृगु ज्योतिष के कारण ही प्रसिद्ध हुआ. जब वो हर तीसरे आदमी को मंत्री बनायेंगे तो उसमें कोई न कोई तो बन ही जायेगा. एक-दो प्रसिद्ध राजनेताओं ने शोर मचा दिया तो लोग कारोई की ओर भीड़ चाल में शामिल हो गये. बहुत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि उन्हें वैदिक ज्योतिष के सामान्य सूत्रों का ठीक से बेसिक ज्ञान भी नहीं है.

जब मैंने परिवर्तन योग के बारे में बोला तो वो बोलें कि हाँ, परिवर्तन योग से परिवर्तन हो गया, पहले राजनीति नहीं करना था पर अब करना है, यही परिवर्तन हो गया. मैं ये सुना और अपना माथा पीट लिया कि यही बकवास सुनने के लिए दो दिन और दस हजार बर्बाद कर दियें. वैदिक ज्योतिष में जब दो ग्रह एक-दूसरे के घर में बैठे होते हैं तो इसे परिवर्तन योग कहते हैं. अगर ये परिवर्तन अच्छे घरों के बीच हो तो अच्छा फल करते हैं और बुरे घरों के बीच हो तो बुरा फल करते हैं. ये सामान्य सी बात भी उन्हें नहीं पता थी.

आपलोग साक्षी हैं कि मैंने हमेशा अगस्त्य नाड़ी ज्योतिष को बहुत श्रद्धा भाव से प्रशंसा की है. कारोई भृगु ज्योतिष केन्द्र पर भी इसीलिए आया था कि इनकी वंदना में कुछ लिखूँ, जिसे अपने पुस्तक में भी स्थान देना था. कारोई गाँव में नाथू लाल व्यास जी और उनके तीन-चार भतीजे भृगु ज्योतिष पर अपना एकाधिकार मानते हैं.

इस व्यास परिवार का मानना है कि जब भृगु ऋषि ने भगवान विष्णु को लात मारी थी तब माँ लक्ष्मी कुपित होकर बोलीं कि मैं ब्राह्मणों के पास नहीं रहूँगी. तब भृगु ऋषि ने कहा कि मैं ऐसी ज्योतिष विधा का प्रतिपादन करूँगा कि तुम ब्राह्मणों के चरणों में पड़ी रहोगी. मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि अगर ये चार परिवार इस भृगु ऋषि के ज्ञान से अर्थोपार्जन करके धनवान हो भी गया है तो इससे करोड़ों गरीब ब्राह्मणों की विपन्नता कैसे दूर हो पायेगी? ये लोग तो ये विद्या अपने परिवार के अलावा किसी और को सीखाने को भी तैयार नहीं हैं.

इन्हीं के परिवार के एक बड़े ज्योतिषी गोपाल व्यास जी हैं जो दावा करते हैं कि मनमोहन सिंह और नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी पहले ही कर चुके थे. अभी हाल ही में ललनटॉप यूट्यूब चैनल ने इनका इन्टरव्यू लिया था और अभी के विधानसभा चुनावों के परिणाम की भविष्यवाणी करने के लिए कहा था. इन्होंने मात्र बीस सेकेंड में स्लेट पर एक कुण्डली बनायी और बोला कि छत्तीसगढ़ में पूर्ण बहुमत से भाजपा सरकार बनायेगी तथा मध्य प्रदेश और राजस्थान में निर्दलीयों को मिलाकर भाजपा सरकार बनायेगी. मतलब भृगु ज्योतिष के आधार पर तीनों ही राज्यों में भाजपा की ही सरकार बनने की इन्होंने भविष्यवाणी की थी, जो कि बुरी तरह गलत साबित हुई. ये हमेशा से गलत होते रहे हैं पर सोशल मीडिया के जमाने में पकड़े जा रहे हैं.

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