डिग्री-खोजो-गैंग के निशाने पर अब आरबीआई के नवनियुक्त गवर्नर शक्तिकांत दास

सेक्युलर लिबरलों द्वारा प्रायोजित डिग्री-खोजो-गैंग एक बार फिर सक्रिय है। इस बार उनके निशाने पर हैं भारतीय रिज़र्व बैंक के नवनियुक्त गवर्नर श्री शक्तिकांत दास।

डिग्री-खोजो-गैंग इस बात पर खूब लिहाड़ी ले रहा है कि श्री शक्तिकांत दास के पास हिस्ट्री में एमए की डिग्री है अतः वे भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर बनने लायक नहीं हैं।

गैंग के अनुसार मोदी सरकार ने आईआईटी, एमआईटी, ऑक्सफोर्ड, येल में पढ़े उत्कृष्ट अर्थशास्त्रियों रघुराम राजन और उर्जित पटेल को हटा कर इतिहास के विद्यार्थी रहे एक ‘नालायक’ सेवानिवृत्त आईएएस को रिज़र्व बैंक का गवर्नर बना दिया है।

गैंग द्वारा इस प्रकार का लांछन पहले भी कई केंद्रीय मंत्रियों और प्रधानमंत्री तक पर भी लगाया जा चुका है। गैंग इस प्रकार के हमले कर भाग जाने में दक्ष है, यही इनकी घटिया मानसिकता में रचे बसे ‘इंटेलेक्चुअलिस्म’ अर्थात बौद्धिक मेधा का परिचय है।

गैंग यह नहीं बता रहा कि श्री शक्तिकांत दास कई वर्षों से वित्त मंत्रालय में नियुक्त हैं और वे 15वें वित्त आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं। अखिल भारतीय सेवा नियमों के अनुसार आईएएस अधिकारी सेवा में रहते हुए उन विषयों की पढ़ाई कर सकता है जो उसके करियर में सहायक हों।

श्री दास ने आईएएस रहते हुए अपने कार्यकाल में भारतीय प्रबंधन संस्थान बेंगलुरु और कलकत्ता से एडवांस फाइनेंशियल मैनेजमेंट कोर्स और मिड करियर ट्रेनिंग की हुई है। श्री दास ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैंक मैनेजमेंट से डेवलपमेंट बैंकिंग एंड इंस्टिट्यूशनल क्रेडिट में भी पढ़ाई की है। इसके अतिरिक्त उन्होंने कई प्रतिष्ठित संस्थानों से कई वित्तीय विषयों की पढ़ाई की है। उनका पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड विकिपीडिया तथा कार्मिक विभाग (DoPT) की वेबसाइट पर सहज उपलब्ध है।

श्री शक्तिकांत दास वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव तथा राजस्व सचिव जैसे प्रतिष्ठित पदों पर भी रह चुके हैं। श्री दास विमुद्रिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। इतने पढ़े लिखे अनुभवी और आर्थिक मामलों के जानकार व्यक्ति को भारतीय रिज़र्व बैंक का गवर्नर बनाया जाना डिग्री-खोजो-गैंग की आँखों को नहीं सुहा रहा है।

जहाँ तक एमआईटी और ऑक्सफोर्ड में शिक्षा प्राप्त रघुराम राजन और उर्जित पटेल का प्रश्न है वहाँ यह समझना चाहिए कि भारतीय अर्थव्यवस्था यहाँ की सामाजिक राजनैतिक जटिलताओं में बंधी हुई अर्थव्यवस्था है। भारतीय रिज़र्व बैंक का मुख्य कार्य मौद्रिक नीति निर्धारण तथा कमर्शियल बैंकों के नियंत्रण से अधिक नहीं होता। वह केवल यही निर्धारित कर सकता है कि अर्थव्यवस्था में मुद्रा का बहाव कब और कितना होना चाहिये।

ऐसे में गवर्नर के लिए नीति निर्धारण की प्रक्रिया में अत्यधिक रचनात्मक होना सम्भव ही नहीं है। अकादमिक रचनात्मकता आप किसी अमेरिकी विश्वविद्यालय में बैठ कर बढ़िया पेपर लिखकर दिखा सकते हैं लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत टेढ़ी खीर है।

भारतीय रिज़र्व बैंक अमेरिका के फेडरल रिज़र्व सिस्टम से भी कई मायनों में भिन्न है इसलिए भारत में आवश्यकता है एक ऐसे व्यक्ति की जो यहाँ की राजनैतिक सामाजिक परिस्थितियों को समझता हो। पूर्व में भी कई आईएएस अधिकारी भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर रह चुके हैं। लेकिन डिग्री-खोजो-गैंग को इन तथ्यों से कोई मतलब नहीं, उन्हें तो पत्थर फेंकने और भाग जाने की आदत है।

इस गैंग के एक वृद्ध सरगना फेसबुक पर भी सक्रिय हैं। ये साहब श्रद्धेय अटल जी के समय भाजपा में रक्षा विशेषज्ञ हुआ करते थे। किस योग्यता पर, यह मैं नहीं जानता लेकिन अटल जी ने बहुत से साँपों को पाला था जिसमें से एक ये भी थे। बाद में सरकारी विभागों में वित्तीय सलाहकार इत्यादि भी रहे हैं जबकि इनके पास कायदे से अर्थशास्त्र की डिग्री भी नहीं है और आज ये श्री शक्तिकांत दास की डिग्री पूछ रहे हैं।

मैं नाम नहीं बताऊंगा। इन साहब की हेकड़ी इतनी है कि कई वर्षों तक इन्होंने स्वयं को रक्षा विशेषज्ञ ही कहलवाया। एक बार राज्य सभा टीवी पर मीडियम मल्टी रोल एयरक्राफ्ट पर चर्चा के लिए पैनल बैठा था जिसमें ये भी सम्मिलित थे और खूब लम्बी लम्बी टिप्पणी दे रहे थे। पैनल में पूर्व एयर वाईस मार्शल कपिल काक भी थे जो इनकी कूड़ा टिप्पणियों को सुन रहे थे।

अंत में आजिज आकर काक साहब ने कह ही दिया कि आजकल तो वो लोग भी MMRCA पर बोल रहे हैं जिन्होंने जीवन में कभी फाइटर प्लेन को नजदीक से देखा तक नहीं। उस समय डिग्री-खोजो-गैंग के बुढ़ऊ सरगना दाँत चियार के रह गए थे। यही इनके वास्तविक इंटेलेक्चुअलिज़्म की सीमा है जो हर किसी की डिग्री खोजते हैं लेकिन जब अपने पर आती है तो दाँत चियार देते हैं।

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