सही सवाल और गुस्सा भी नहीं दिखा रहे आप!

अच्छा, जो महान तथाकथित ‘सवर्ण’, ‘सत्यशोधक’, ‘निरपेक्ष’, ‘भाई, मैं तो सच को सच ही कहूंगा/ कहूंगी’, ‘बुद्धिजीवी’, ‘स्वतंत्र चिंतक’, ‘व्यक्तिपूजा के विरोधी’, ‘विचारधारा के पोषक’ महाशय और महाशया हैं, उनके मन में मोदी के खिलाफ (या वर्तमान सरकार के) क्या और क्यों गुस्सा है, इसे ज़रा ‘डिकोड’ करते हैं।

1. आरोप – मोदी ने एससी-एसटी एक्ट लाकर सभी सवर्णों को फंसा दिया। नान जात का दिमाग खराब कर दिया।

तथ्य – यह आरोप ही सरासर सामंतवादी, जातिवादी और निकृष्ट है। ये तथाकथित सवर्ण खुद को समझते क्या हैं? नान जात क्या होता है? पहली बात, मोदी ने एक्ट नहीं बनाया। हां, उनके हाथ-पैर फूले और वह अध्यादेश लाए, यह ज़रूर निंदनीय है। उनको सुप्रीम कोर्ट के पीछे छिप जाना था, जैसे अभी केरल की सरकार सबरीमाला में तनी है।

हालांकि, अगस्त या सितंबर में काँग्रेसी-वामपंथी गुंडों ने पूरे देश में जिस तरह आग लगायी थी, वह तो याद होगा ही? मोदी या इस सरकार ने कुछ नहीं किया, जो कानून पहले से था (और वह काँग्रेस ने बनाया था) उसे ही वापस लायी।

अंतिम बात, क्या काँग्रेस के आने से वह कानून निरस्त हो जाएगा?

2. आरोप – नोटबंदी-जीएसटी वगैरह बेकार बात है। व्यापारियों को तबाह कर दिया। मोदिया बेमतलब भौकाल कर रहा है।

तथ्य – जिस देश में लोगों का सर न फूटे और वे हेलमेट पहनें, इसके लिए जुर्माना करना पड़े, वहां इस तरह के कड़े फैसला तो निंदनीय क्या, गर्हित हैं। मैं चूंकि पंडित रवीश कुमार की तरह हर विषय का विशेषज्ञ नहीं, इसलिए इन दोनों बातों का आर्थिक पक्ष मुझे नहीं पता, लेकिन इतना ज़रूर जानता हूं कि इन दोनों ही कदमों का अंतिम उद्देश्य भ्रष्टाचार के अंतिम पायदान तक, गले तक डूब चुके भारतीय समाज को बूस्टर-डोज़ देना ही है। यह ग़लती की है, मोदीजीवा ने।

3. आरोप – राम मंदिर, 370, यूनिफॉर्म सिविल कोड पर मोदिया चुप है। बेकार कर दिया सब, हिंदुत्व का एजेंडा।

तथ्य -हंसने को जी करता है। भाइयों-बहनों, मोदीजीवा प्रचारक रहा है, बेचारा खांटी। जितनी हममें से कई की उम्र नहीं, उतने साल नून-रोटी खाकर संघ का प्रचार किया है, ठीक है!

और, पहले ये बताइए कि आप कौन से वाले हिंदू हैं। आप हिंदू तो हैं नहीं। आप तो बाभन हैं, कुर्मी हैं, गोआर हैं, चमार हैं, राजभर हैं, ठाकुर हैं। आप ही लोग हैं न, जो कल्याण सिंह को अगले चुनाव में ही हटाकर मुल्लायम को ले आते हैं।

दूसरी बात, सरकार मंदिर नहीं बनाती। सरकार ने तो ढांचे को हटाया भी नहीं, लोकतंत्र में हटा भी नहीं सकती। भाई, टेंट आपने लगाया। अब जाकर किसी दिन मंदिर पूरा कर दो। कौन रोक रहा है?

मोदीजीवा जानता है, इस जनता को। इसलिए, वह मौज ले रहा है। 370 एक अंतरराष्ट्रीय मसला है। अधिकतम उसका हल यही होगा कि दोनों देश अभी की नियंत्रण रेखा को स्वीकार कर लें। (वैसे तो आपकी संसद ने एकमत प्रस्ताव पारित किया ही हुआ है, वापस पीओके को लाने का)। हूहू-फूफू करने से नहीं होगा। सत्य को स्वीकारिए।

यूनिफॉर्म सिविल कोड तो दूर की कौड़ी है। तीन तलाक पर ही कितनी मगजमारी हुई, जद्दोजहद हुई। ऊपर से पीएम को दिन-रात गालियां। अब तो तथाकथित राष्ट्रवादी भी भड़ास निकाल रहे हैं।

…आपकी समस्या है कि आपके डीएनए में ही दिक्कत है। बेकायदे से चलनेवालों को कायदा सिखाना तो पाप है ही।

आप सही सवाल और गुस्सा भी नहीं दिखा रहे।

मोदिया को किन मसलों पर घेरना चाहिए, वह अगले लेख में…

काँग्रेस को जिताया नहीं बल्कि आप को हराया है

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