जश्न मनाइए उस दल की जीत का, जिसके आप एजेंट थे हिंदुत्व का लबादा ओढ़कर

भाजपा के हारने के क्या कारण रहे हैं, इस पर कट्टरों की बात मान लें तो कट्टर लोग कहते हैं कि हिंदुत्व मुद्दा था। मोदी सरकार और राज्य सरकारें हिंदुत्व भूलकर सेक्युलर हो गईं थी।

क्या है ये हिंदुत्व? क्या है हिंदुत्व का मुद्दा? और ये हिंदुत्व का एजेंडा क्या है, ये भी बता दीजिए?

कट्टर कहते हैं कि राम मंदिर ही हिंदुत्व है लेकिन कट्टर खांटी 24 कैरट को यह नहीं मालूम कि हज़ारों काम किये हैं केंद्र सरकार ने हिन्दुओं के लिए? वह सब आपको भी समय समय पर पता लगे हैं, और आपने देखे भी हैं।

गंगा में गिरने वाले इतने सीवर बन्द हो गए हैं। आज उसी गंगा में डुबकी लगाते आपको एक पल भी नहीं लगता कि ये हिंदुत्व का काम है?

दो साल पहले बद्रीनाथ के चारो ओर विधर्मी बस्तियां उग आई थीं, वहां आज जा कर देखिये? यही सरकार बचा रही है महाराज! वरना कुछ सालों में वहां पर बदरुद्दीन की कब्र पर आपके सजदे होते। वहां लोगों द्वारा उस जगह को बदरुद्दीन बोलना शुरू भी कर दिया था।

पहले एक बात बार बार बोली जाती थी कि मंदिरों का पुनरुद्धार करना चाहिए। इससे हिन्दुओं को आर्थिक चक्र में जोड़ा जा सकेगा और उससे हिन्दू सबल बनेगा। आज चाहे चार धाम के लिए बनने वाला 4 लेन हो, छोटा चार धाम हो, रामायण सर्किट, कृष्ण सर्किट हो, सब जगह काम हुआ है, हो रहा है। इससे कौन सबल होगा?

मथुरा में, वृंदावन में ही पिछले दिनों परिक्रमा पथ पर पड़ने वाली अनेक अवैध मजारों को हटाया गया। क्या हिन्दू इन बातों को याद रखता है वोट देते समय?

जब हिन्दू को लॉलीपॉप, कर्ज माफी, आरक्षण, मोबाइल फोन ही चाहिए, तो ये धर्म का आडंबर करना बंद कीजिए, इससे वोट नहीं गिरते। चलिये, सरकारों की गलतियों को मान लेते हैं। लॉलीपॉप नहीं दिए, हिंदुत्व पर काम नहीं किया। लेकिन क्या हम अपनी गलतियों के बारे में बात करने को तैयार हैं? क्या हम अपने झूठ और प्रपंच को मानने को तैयार हैं?

राजस्थान में चुनाव हुआ, किसी भी राजस्थानी से पूछ लीजिये कि क्या उसने वसुंधरा के मंदिर तोड़ने के मुद्दे पर उन्हें रिजेक्ट किया? आपको एकाध ही मिलेगा, क्योंकि ये मुद्दा था ही नहीं। इस हिसाब से तो बीजेपी की पोखरण में हार नहीं होनी चाहिए थी। एक साधु सन्यासी थे बीजेपी की तरफ से, हार गए। हिंदुत्व ही मामला था तो सन्यासी को जिता देते।

असलियत में इसे मुद्दा किसने बनाया? कांग्रेस ने? नहीं, जी नहीं, इसे हमारे ही लोगों ने मुद्दा बनवाया है। मुझे अच्छे से याद है कि फण्डिंग से निराश मठाधीश लोगों की वो पोस्ट्स और आर्टिकल्स धड़ल्ले से शेयर किए जाते थे, जिनमें बताया गया था कि कैसे 70 से भी ज़्यादा मंदिरों को जयपुर में तोड़ा गया है।

लेख में उत्तेजक शब्द इस्तेमाल किये जाते थे, शिवलिंग को कटर से काटा गया, ये किया गया, वो किया गया! और दूसरे प्रदेश के हिन्दुओं को भड़काया दिया गया। बिना बनारस देखे उज्जैन, इंदौर, भोपाल, सतना आदि के मठाधीश और उनके चूं चूं, काशी विश्वनाथ पर प्रपंच फैलाए हुए थे। जबकि बनारस में 3000 वर्ष पूर्व के मन्दिर निकल रहे थे।

हिन्दू हृदय सम्राट और ब्राह्मण-पण्डे लोग शिवलिंग को ग़ुसलख़ाने से ढंक के उसके ऊपर विष्ठा बहा रहे थे। कहाँ गया था हिंदुत्व और आस्था?

लेकिन अपनों द्वारा ही ऊपर से लेकर सबके मन में ये बात बैठाई गयी कि बीजेपी सरकार हिन्दू विरोधी है। राम मंदिर तो बनवा नहीं पाई, लेकिन जयपुर में मंदिर उजाड़ दिए, काशी में खुदाई कर दी!

अब चूंकि ये पोस्ट्स और आर्टिकल्स हिन्दू हृदय सम्राटों द्वारा बनाये जाते थे, तो हमारे निरीह हिन्दू इन्हें हाथों-हाथ लेते थे… इस प्रकार माहौल बनाया गया।

जिन्होंने ये आर्टिकल लिखकर साल भर से माहौल बनाया, क्या उनमें हिम्मत है इन लोगो से फॉलो-अप करने की? पूछिये तो सही कि क्या हुआ उन मंदिरों का? क्या जयपुर में मंदिर कोई मुद्दा है भी या नहीं?

ये कट्टर हिन्दू आपको कभी नहीं बताएंगे कि सभी 70 मंदिर नए स्थान पर पहले से कहीं आलीशान तरीके से बनाये गए। जो मंदिर एक गुमटी जैसी जगह पर बने हुए थे, आज उनमें भक्तों के लिए पार्किंग, बैठने की जगह, पुजारी का कमरा इत्यादि सब बनाया सरकार ने। लेकिन ये हिंदुत्व के पुरोधा आपको नहीं बताएंगे। इन्होंने भ्रम फैलाया और सफल हुए। ये कभी नहीं बताएँगे कि काशी के पुरातन मन्दिरों का शानदार सौन्दर्यीकरण हो रहा है।

अब आप सवाल करेंगे कि सरकार क्या हाथ पे हाथ धरे बैठी थी? तो जनाब, इसका जवाब है सरकार ने काम किया, लेकिन सरकार को क्या पता कि कुछ कट्टरछापों की वजह से आज सतना, इंदौर, भोपाल, जयपुर में बैठा कोई मासूम हिन्दू विरोधी बन चुका है।

अब अगर कुछ करना है तो ये भी करिये कि लोगों को प्रवक्ता बोल कर दुत्कारने के बजाए इन नकली हिन्दू हृदय सम्राटों को दुत्कारें, ये नोटा का हव्वा खड़ा करने वाले भी यही हैं।

लॉलीपॉप! और जब लॉलीपॉप ही देने हैं तो कांग्रेस ही चुनिए – खुल के सामने आइए और बोलिए कि लॉलीपॉप चाहिए, हिंदुत्व के पीछे मत छिपिए। इन्ही लॉलीपॉप के चक्कर में देश बर्बाद हुआ पड़ा है, आपको वो ही चाहिए तो साफ़ कहिए।

लेकिन ज़रा बता तो दीजिये होता क्या है हिंदुत्व का एजेंडा? उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व का एजेंडा जैसा चल रहा है वैसे तो कहीं ना चल रहा होगा? फिर क्यों कैराना या गोरखपुर हार जाते हैं? वही कैराना जिसके अपराधियों के डर से हिन्दू लगभग भाग गया था, उन अपराधियों को योगी जी ने ख़त्म कर दिया और हार गए!

कुछ माह पहले कुछ लोग मध्यप्रदेश से आये थे अयोध्या में, सरकार ने सब सुविधाएं दी थी या नहीं? बसें दी, रहने खाने की व्यवस्था, सब कुछ दिया था कि नहीं? टोटी चोर ने तो साधुओं की पिटाई करवाई थी सरयू परिक्रमा पर। काशी में शंकाराचार्य, ब्राह्मण और पुजारियों को बल भर पिटवाया था और खोपड़ियाँ फोड़ी थी टोटी चोर ने, उसी टोटी चोर के साथी को आप अपना रहे हैं हिंदुत्व बोलकर?

दो साल पहले से कभी का अयोध्या और दिवाली याद कर लीजिए, थी हिम्मत पहले? क्यों नहीं मना पाए सरयू घाट पे ऐसी दिवाली पहले? ये क्या हिंदुत्व नहीं है?

ये लोग हिंदुत्व माँग रहे हैं… और कैसा हिंदुत्व चाहिए आपको, ज़रा बता दीजिए। लेकिन आपको पता नहीं कि अगली बार आपको बुरी तरह चलता कर देगा ये आपके एजेंडे का राग, क्योंकि अब हिन्दू तंग आ गए हैं आपके गौ रक्षा और गौ सेवा के राग से, मुग़लों के अत्याचार का गान करने से भी ना वोट देगा अब हिन्दू।

ये भी मान लीजिए कि राम और राम मंदिर ना कभी मुद्दे थे, और ना होंगे, परख कर देख लीजियेगा। अगर होते तो राम को गाली देने वाले, उन्हें मिथ्या कहने वाले राज ना कर रहे होते। अरे आपके तो बद्रीनाथ तक को बदरुद्दीन कहना शुरू कर दिया था। क्या कर पाए थे आप कट्टर हिन्दू? अब जा कर ऊत्तराखण्ड में सरकार आयी और इस पर काम हो रहा है। कभी मौका लगे तो केदारनाथ हो आइये, लोगों से मिलिए, समझिये, फिर समझ आएगा कि हिंदुत्व के लिए क्या काम किये जा रहे हैं। अरे प्रयाग ही चले जाइये, जो कुछ दिनों पहले तक अल्लाहाबाद था या फैजाबाद घूम आइए!

अब बेशक आप हमें मोदी जी का प्रवक्ता, अंधभक्त, अण्ड या जो भी बदतमीज़ी की बात बोल कर पिंड छुड़ा कर भागने लगियेगा, लेकिन सच्चाई यही है कि हिन्दू ने ही हिंदुत्व पर काम करने वाले की बलि ली है। इतिहास रहा है, साबित करने की ज़रूरत नही।

बाकी आप बजाते रहिये झुनझुना हिंदुत्व का, बहुसंख्यक हिन्दुओं को चिढ़ होने लगी है इससे। सारे हिंदुत्व के कामों जैसे गँगा में गंद जाना रोकना, सुचारु रूप से तीर्थ यात्रा, सरयू तट पर भव्य दिवाली, मथुरा-वृंदावन, रामायण सर्किट, रामायण एक्सप्रेस, कृष्णा सर्किट, काशी के मंदिरों का जीर्णोद्धार आदि में राम मंदिर भी एक कार्य है। जो सारे काम कर रहा है, उस पर उसको छोड़िए, जिसने ये सब काम किया वो ही ये करेगा।

इतनी सी समझ नहीं है तो आप जश्न मनाइए अपनी पार्टी के जीत का, जिसके आप एजेंट बने बैठे थे हिंदुत्व का लबादा ओढ़ कर। फेसबुक पर मुँह लटकाने का प्रपंच मत कीजिए, आपका ये सब नाटक देख कर उबकाई आ रही है।

काशी का क्योटो होना

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