जनता सरकार से जवाब मांगती है, नौकरशाहों से नहीं

कल भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर उर्जित पटेल ने इस्तीफा दे दिया… सो, व्हाट्स बिग डील? पीपल कम एन गो… अथॉरिटी रिमेंस।

लेकिन अब कुछ लोगों को सरकार को कोसने के दौरे पड़ने शुरू हो गए हैं… याद रखना चाहिए कि RBI का गवर्नर कोई संवैधानिक पोस्ट नहीं होती… न ही RBI के गवर्नर के जाने से सरकार गिरती है।

जहां तक उर्जित पटेल का सवाल है तो RBI एक्ट का सेक्शन 7 सीधा यही बात कहता है कि सरकार RBI को डायरेक्टिव दे सकती है।

अब मामला आता है… RBI रिज़र्व का। जिस पर सबसे ज्यादा मतभेद थे सरकार और RBI में।

तो RBI रिजर्व के अंतर्गत आने वाले cash एंड गोल्ड रिज़र्व और कंटिंजेंसी रिज़र्व टोटल अमाउंट का कितना परसेण्ट होगा, ये कौन तय करेगा? ऑफकोर्स… डायरेक्टली या इनडायरेक्टली इट्स govt… न कि RBI हैविंग RBI बोर्ड।

– इसके लिए उषा थोराट की कमेटी बनी जिसने कहा कि रिज़र्व 17.76% होना चाहिए। लेकिन RBI बोर्ड ने इस संस्तुति को नकार दिया और वी. सुब्रमनियम द्वारा 1997 में रिकमेंडिड 12% पर चलती रही।

– रघुराम राजन के समय ये टोटल 29 परसेंट से थोड़ा अधिक था… जिसमें 21.81% CGRA और 8.44% कंटिंजेंसी रिज़र्व था।

चाहे इकॉनमी बूम कर रही हो या एकदम से डूब गई हो… सरकार अपने हिसाब से देश की इकॉनमी चलाने और निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।

RBI संसद नही है। ये महज़ एक डिपार्टमेंट है जो देश की इकॉनमी को सरकार की छत्रछाया में चलाता है। रिज़र्व का काम प्रॉपर एप्रीसिएशन और डिप्रेसीएशन करना भी है।

फिलहाल RBI रिजर्व 25% से थोड़ा ज़्यादा है। जिसमें 19.11% CGRA और 6.41% कंटिंजेंसी रिज़र्व है। जिसे सरकार इसे और कम करना चाहती है… उसके अपने वाजिब कारण हैं। जिस पर कुछ लोग सहमत और कुछ लोग असहमत हैं।

यही मामला अटक गया था… बात सुप्रीमेसी की हो गयी थी… जिसकी वजह से सेक्शन 7 पिछले दिनों काफ़ी चर्चित रहा। RBI रिज़र्व में कटौती के लिए राजी नहीं थी जबकि ऊपर तीन कमेटियों का ज़िक्र हो चुका है उससे साफ ज़ाहिर है कि रिज़र्व को सरकारी सहमति द्वारा न सिर्फ कम-ज़्यादा किया जा सकता है बल्कि बीते सालों में किया भी गया है।

हालांकि सरकार और RBI ने मामला सुलझा लिया था।

अब ऐसे में अगर उर्जित पटेल इस्तीफा देते हैं तो इसके इम्प्रेटिव निम्न होंगे –

• या तो उर्जित पटेल सुलहनामे से सहमत नहीं होंगे।
• देश की इकॉनमी असल में कुछ सही स्थिति में नहीं होगी।
• या फिर उनके द्वारा दर्शाया गया कारण वास्तव में वाजिब होगा।

लेकिन ऐसा है न…

कि देश की पॉलिटी हो,
देश का डिफेंस अफेयर हो,
या इकॉनमी और फाईनेन्स हो…

आफ्टर ऑल जनता के प्रति सरकार ही उत्तरदायी होती है। जनता सरकार से जवाब मांगती है।

अब सेनाध्यक्ष इस्तीफा दे या चीफ इलेक्शन कमिश्नर या फिर CAG… ये सिर्फ एक डिपार्टमेंट ही संभालते हैं… इनकी पोस्ट पर सरकार दूसरे को नियुक्त कर सकती है।

उपरोक्त दर्शाई तीनों ही स्थितियों में RBI के गवर्नर के इस्तीफे से कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता… सरकार किसी दूसरे इकोनॉमिस्ट को RBI गवर्नर नियुक्त कर सकती है।

वैसे भी उर्जित पटेल ने तो ‘पर्सनल कारण’ से इस्तीफा दिया है।

तो तसल्ली रखिये। पीपल कम एन गो, पालिसी रिमेंस।

अब जिन्हें सरकार को कोसने के दौरे पड़ रहे हों… उनकी मदद करें… ज़्यादा तीव्र दौरे हो तो नजदीकी PHC पर रेफेर करें, या फिर लेदर शूज़ गिफ्ट करें… लेट्स मेंटेन द डेमोक्रेटिक वैल्यूज़ एंड एथिक्स।

Data sources and article inspired from :

The hindu epaper /oct+nov+dec/ 2018
NE today/misc/art/2018
Assam tribune/misc/art/2018

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