प्रधानमंत्री मोदी और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में तेल की कीमतों में कमी

मैं आज जो यह वीडियो डाल रहा हूँ यह अंग्रेज़ी में है। इस वीडियो में जो प्रेस को व्यक्ति संबोधित कर रहे है वो हैं, खालिद अल फलिह जो सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री है।

उनसे पत्रकार, क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट के साथ उसके स्थायित्व पर प्रश्न पूछ रहे थे और यह पूछा गया कि क्या किसी विदेशी प्रभाव में, अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प, के कारण ऐसा हुआ है?

इस पर उनका जवाब है कि अमेरिका 20% सऊदी तेल का बाज़ार है लेकिन अमेरिका का उपभोक्ता, उतना ही महत्वपूर्ण है जितना, फ्रांस, भारत और खुद सऊदी अरब का है।

उसके बाद सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री बोलते है कि “अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प, जो ट्विटर से अपनी बात कहते है, उसको वो गम्भीरता से लेते हैं लेकिन उसके साथ वो ‘भारत के प्रधानमंत्री मोदी’ की बातों को गंभीरता से लेते है, जिनसे अभी बेनोसरिएस में मुलाकात हुई है और व्यक्तिगत मुलाकात में उन्होंने तेल की बढ़ती कीमत पर भारतीय उपभोक्ताओं की चिंता के बारे में बताया, जिनकी उन्हें बहुत चिंता है। मेरी मोदी जी से तीन बार, ऊर्जा के विषय पर हुये आयोजनों पर मुलाकात हुई है और वो वहां पर भी, इस विषय पर (भारतीय तेल उपभोक्ता) के हितों पर मुखरित रहे हैं, इसलिये हम भी उपभोक्ता हितों के प्रति संवेदनशील हैं।”

मेरे लिए ही नहीं बल्कि विश्व के सभी कूटनीतिक विशेषज्ञों के सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री का यह कथन बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन भारत की मीडिया व भारत की जनता के लिए शायद इसका कोई महत्व नहीं है। उसका कारण यही है कि भारत की मीडिया जहां नैतिकता से अपाहिज है, वहीं भारत की जनता अपने स्वयं के अज्ञान व स्वार्थ से अपंग है।

मेरे लिए यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि मक्का मदीना का सऊदी अरब जब तेल की कीमत कम करता है तो वो उसका श्रेय, अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ, विश्व भर में सिर्फ एक व्यक्ति को देता है और वह है, भारत के प्रधानमंत्री मोदी।

सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री का यह कथन न कूटनीति थी और न राजनीति थी, यह सिर्फ इस बात की स्वीकारोक्ति थी कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भारत की जनता के प्रति कितने संवेदनशील है।

मैं यहां लोगों को यह ध्यान दिलाना चाहूंगा कि केवल भारत ही नहीं बल्कि चीन भी तेल पर निर्भर है और इन दोनों ही राष्ट्रों का आर्थिक विकास, तेल की कीमत पर निर्भर करता है। लेकिन सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री, तेल की कीमत कम रखने के कारणों में सिर्फ भारत का, वह भी उसके प्रधानमंत्री मोदी के कारण, नाम ले रहे हैं। उसके साथ, इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि मोदी भारत की जनता, जो तेल की उपभोक्ता है, उसके लिए कितने चिंतित है।

मैं नहीं जानता कि भारत की जनता यह समझ भी पाएगी कि प्रधानमंत्री के रुप में मोदी को पाकर, भारत और उसकी जनता किस पटल पर पहुंच गई है लेकिन इतना मैं ज़रूर समझ गया हूँ कि 2019 के बाद, मोदी का भारत, सदियों पूर्व खोई अपनी पैतृक सम्पत्ति को फिर से प्राप्त कर लेगा।

इसी के साथ यह भी कहूँगा कि जब वक्त आएगा तब भारत के अरब प्रेमी मुसलमानों का साथ देने मक्का से कोई नही आएगा और वो तभी आएगा जब भारत पर, नेहरू गांधी परिवार की तंतुओं से निकले सेक्युलरों का राज होगा।

दुनिया झुकती है, बस झुकाने वाला चाहिए और भारत तो पिछले 1000 वर्षों से 2014 तक, झुकने वाला ही रहा है।

नरेंद्र मोदी ने यह बदल डाला है।

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