सैन्य सेवा के पराक्रमी योद्धाओं पर फिल्में न बनने देना, गिरोहों की साज़िश

‘द लायर’ इत्यादि वस्तुतः गिरोह हैं। गिरोहों में एक ही व्यक्ति नहीं होता बल्कि उसमें ढेर सारे गुर्गे काम करते हैं। गुर्गों को काम करने के लिए माल-पानी की दरकार होती है। जब माल-पानी खतम होने लगता है तब गिरोहों का सरगना गुर्गों को लेक्चर देने लगता है ताकि जोश कम न हो और गुर्गे … Continue reading सैन्य सेवा के पराक्रमी योद्धाओं पर फिल्में न बनने देना, गिरोहों की साज़िश