बिकाऊ दलाल पत्रकारों, काँग्रेस से सवाल इसलिए पूछे जाने चाहिए क्योंकि…

आजतक न्यूज़ चैनल पर अंजना ओम कश्यप आज चीख रही थी कि सत्ता में नरेन्द्र मोदी हैं, भाजपा है इसलिए सवाल उनसे ही पूछे जाने चाहिए और काँग्रेस से सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए।

यह केवल आजतक न्यूज़ चैनल या अंजना ओम कश्यप का कुतर्क नहीं है। लुटियनिया दिल्ली के फाइव स्टार पत्रकारों की एक बड़ी फ़ौज आजकल इसी कुतर्क का नगाड़ा पीटते हुए न्यूज़ चैनलों और सोशल मीडिया में नाच कूद रही है।

इस फौज को मेरा जवाब यह है कि…

मोदी की सरकार ने अपने साढ़े 4 साल के शासनकाल में यदि 2 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को नि:शुल्क घर बनाकर दिए और काँग्रेस अपने 10 वर्ष के शासनकाल में अगर ऐसे 20 लाख घर भी नहीं दे पाई थी, तो काँग्रेस का गिरेबान पकड़कर उससे यह सवाल क्यों नहीं पूछा जाना चाहिए कि उसका राजकाज/ शासनकाल इतना नकारा और निक्कमा क्यों था?

मोदी की सरकार ने अपने साढ़े 4 साल के शासनकाल में यदि 7 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को नि:शुल्क शौचालय बनाकर दिए और काँग्रेस अपने 10 वर्ष के शासनकाल में अगर ऐसे 70 लाख शौचालय बनाकर नहीं दे पाई थी, तो काँग्रेस का गिरेबान पकड़कर उससे यह सवाल क्यों नहीं पूछा जाना चाहिए कि उसका राजकाज/ शासनकाल इतना नकारा और निक्कमा क्यों था?

मोदी की सरकार ने अपने साढ़े 4 साल के शासनकाल में यदि 2 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को नि:शुल्क बिजली कनेक्शन देकर उनके घर बिजली पहुंचा दी है और काँग्रेस अपने 10 वर्ष के शासनकाल में अगर ऐसे एक भी घर में नि:शुल्क बिजली कनेक्शन नहीं दे सकी थी, तो काँग्रेस का गिरेबान पकड़कर उससे यह सवाल क्यों नहीं पूछा जाना चाहिए कि उसका राजकाज/ शासनकाल इतना नकारा और निक्कमा क्यों था?

मोदी की सरकार ने अपने साढ़े 4 साल के शासनकाल में यदि अक्षय ऊर्जा के उत्पादन में 214% की वृद्धि की है जबकि काँग्रेस अपने 50 वर्ष के शासनकाल में भी इतनी अक्षय ऊर्जा का उत्पादन नहीं कर सकी थी, तो काँग्रेस का गिरेबान पकड़कर उससे यह सवाल क्यों नहीं पूछा जाना चाहिए कि उसका राजकाज/ शासनकाल इतना नकारा और निक्कमा क्यों था?

मोदी की सरकार ने अपने साढ़े 4 साल के शासनकाल में यदि बिजली के उत्पादन में प्रतिवर्ष औसतन 25243 मेगावॉट की वृद्धि की है। जबकि काँग्रेस ने अपने 10 वर्ष के शासनकाल में प्रतिवर्ष औसतन 13009 मेगावॉट की ही वृद्धि की थी, तो काँग्रेस का गिरेबान पकड़कर उससे यह सवाल क्यों नहीं पूछा जाना चाहिए कि उसका राजकाज/ शासनकाल इतना नकारा और निक्कमा क्यों था?

2009 से 2014 तक अपने 5 साल के कार्यकाल में काँग्रेसी सरकार ने जितनी सड़क बनवायी थी… मोदी की सरकार ने अपने साढ़े 4 साल के शासन में उससे ढाई गुना ज्यादा सड़क बना दी है, तो काँग्रेस का गिरेबान पकड़कर उससे यह सवाल क्यों नहीं पूछा जाना चाहिए कि उसके राज में काम की गति आधी क्यों थी?

अपने 5 साल के कार्यकाल में काँग्रेसी सरकार ने जितनी रेल लाइन बिछायी थी… मोदी की सरकार ने अपने साढ़े 4 साल के शासन में उससे दो गुना ज्यादा रेल लाइन बिछा दी है, तो काँग्रेस का गिरेबान पकड़कर उससे यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि उसके राज में काम की गति आधी क्यों थी?

यह तो केवल आधा दर्जन वो सवाल हैं जो ठोस कारण हैं इसबात का कि काँग्रेस से सवाल क्यों पूछे जाने चाहिये। मेरे पास कम से कम 50 और ऐसे सवालों की सूची है जो चीख चीखकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बजाय काँग्रेस से पूछना चाहते हैं कि उसका राजकाज/ शासनकाल इतना नकारा और निक्कमा क्यों था?

यह सवाल इसलिए और ज़रूरी हैं क्योंकि काँग्रेस खुद को मोदी सरकार के विकल्प के रूप में प्रस्तुत करने में जुटी हुई है।

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