पराजय के अपमान के बजाय राष्ट्रीय सम्मान की अधिकारी हैं वसुन्धरा राजे

सारी चुनावी, रिपोर्टें, सर्वे, पोल, अनुमान, आंकलन यही संकेत दे रहे हैं कि राजस्थान में भाजपा की पराजय सुनिश्चित है। इसका मुख्य जिम्मेदार भी मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे को ही घोषित किया जा रहा है।

अब तक मैं भी ऐसी सूचनाओं से लगभग सहमत रहा हूं। मुख्यमंत्री/ राजनीतिज्ञ के रूप में वसुन्धरा राजे की इस नकारात्मक छवि से भी मैं अब तक पूर्णतया सहमत रहा हूं।

लेकिन अब यह अनुभव कर रहा हूं कि राजस्थान की धरातलीय वास्तविकता के सन्दर्भ में मीडियाई जालसाज़ी को जानने समझने में मुझसे बहुत भयंकर चूक हुई है। मेरी इस स्वीकारोक्ति का ठोस कारण है।

मुझे बहुत अच्छी तरह से याद है कि 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान घर-घर, दर-दर भटक रही न्यूज़ चैनलों की टीमों के समक्ष राजस्थान की जनता जब अपनी समस्याओं का पिटारा खोलती थी तो उनमें बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दों की ही भरमार होती थी।

लेकिन इस बार उन्हीं न्यूज़ चैनलों पर उसी राजस्थान की उसी जनता की समस्याओं का ही ज़िक्र उसी के मुख से सुन रहा हूं तो बिजली और सड़क तो उस सूची से लगभग गायब हैं। स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दे का प्रतिशत भी बहुत कम है। पानी की समस्या का ज़िक्र भी पूरे राजस्थान के बजाय कुछ सीमित स्थानों की जनता के मुंह से ही सुनने को मिला।

राजस्थान के चुनावी आसमान में मंडरा रहे कांग्रेसी कौओं की कांव-कांव में भी इन मुद्दों का ज़िक्र सिरे से गायब है। उनकी कांव-कांव का मुख्य हथियार कर्ज़ माफी वाली हरामखोरी, और बेरोज़गारी है। तथा चोरों बेईमानों को हर्षाने/ लुभाने के लिए नोटबन्दी-GST के खिलाफ मातम है तथा राफेल के खिलाफ नंगनाच की भरमार है।

इसका अर्थ यह है कि बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में वसुन्धरा सरकार ने जन अपेक्षाओं के अनुसार ही कार्य किया है।

लेकिन उपरोक्त के बजाय मुख्यमंत्री के रूप में वसुन्धरा राजे सरकार की एक ऐतिहासिक उपलब्धि मेरे लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। इस उपलब्धि के लिए वसुन्धरा राजे को राष्ट्रीय सम्मान मिलना चाहिए।

वसुन्धरा राजे की सरकार की वह ऐतिहासिक उपलब्धि यह है कि केवल 2 वर्षों पहले मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे द्वारा प्रारम्भ किये गए जल स्वावलम्बन अभियान के कारण राजस्थान में भूगर्भ जल का स्तर लगभग 4.66 फुट बढ़ा है। केवल 2 वर्षों में राजस्थान के कुल 33 में से 21 जिलों के भूगर्भीय जल स्तर में वृद्धि करने की यह सफलता ऐतिहासिक तो है ही तथा देश के लिए एक अनुपम मिसाल है।

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इसी के परिणामस्वरूप जो राजस्थान कल तक सूखे रेगिस्तानी प्रदेश के रूप जाना जाता था, आज वह पूरी दुनिया में जल संचय की मिसाल बन गया है। आने वाले समय में इस अभियान से राजस्थान की तकदीर बदल जाएगी।

इस उपलब्धि का महत्व दो तुलनात्मक उदाहरणों से समझ लीजिए।

उत्तरप्रदेश में अखिलेश यादव के 4 साल के शासन के बाद 2016 में यह सच उजागर हुआ था कि उत्तरप्रदेश में भूगर्भीय जल के स्तर में लगभग 30% गिरावट दर्ज हो चुकी है तथा भूगर्भीय जल संसाधन में समृद्ध माने जाने वाले हाथरस, मेरठ, गाज़ियाबाद और गौतमबुद्ध नगर सरीखे जिलों में भूगर्भीय जल का स्तर प्रतिवर्ष औसतन लगभग 5 फुट की गति से घट रहा है और यह गिरावट तेज़ी से बढ़ रही है।

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इसी वर्ष जुलाई में सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत रिपोर्ट में यह उजागर हुआ कि वर्ष 2000 से 2017 के बीच राजधानी दिल्ली में भूगर्भीय जलस्तर में 61% की कमी हुई है। लेकिन क्या किसी न्यूज़चैनली बहस या चर्चा में इसकी चर्चा क्या सुनी आपने?

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जब देश ही नहीं पूरी दुनिया में निकट भविष्य में भारी जल संकट पर गम्भीर चिंता की जा रही है, उस समय विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के रेगिस्तानी इलाके वाले राजस्थान में भूगर्भीय जलस्तर में उल्लेखनीय वृद्धि कर वसुन्धरा राजे ने पूरे देश को दिशा दिखाई है। इसके लिए उनका सम्मान होना चाहिए। बजाय पराजय के अपमान के।

क्या कहते हो राजस्थान?

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