गणित के सिद्धांत बदलने की राजनीतिक साज़िश का पर्दाफाश

भारतवर्ष के हज़ारों-हज़ारों साल के स्वर्णिम इतिहास को पहले मुग़लों ने अपनी सुविधानुसार या कहें तो अपने गुणगान करने की चाह में गलत तरीके से बदल दिया और उसकी जगह मुग़ल शासकों का इतिहास लिखवाया गया, फिर अंग्रेज़ों ने और आज़ादी के बाद कांग्रेस ने भारत के स्वर्णिम इतिहास को अपने फायदे के लिए बदल कर हमें वामपंथी इतिहास पढ़ाया।

एक समाज विशेष और अपनी तुष्टिकरण की राजनीति के चलते हमें पढ़ाया गया कि अकबर महान था लेकिन हमें कभी महाराणा प्रताप और वीर शिवाजी की गाथाएं नहीं पढ़ाई गईं। इतिहास को बदलने से आज हमारे युवा अपने ही वीर-योद्धाओं, महापुरुषों को भूलते चले गए बल्कि मुग़ल शासकों को हम अपना आदर्श मान बैठे हैं। धन्य हो सोशल मीडिया का जहाँ हमें अपना खोया इतिहास फिर से पढ़ने-सुनने मिलता है।

हमारे इतिहास को तो बदल ही दिया गया लेकिन अब कांग्रेस फिर ऐसी ही साजिश करने जा रही है। जी हाँ कांग्रेस इतिहास को बदलने के बाद अब गणित को बदलना चाहती है। हमारे बरसों की मेहनत और लगन से सिखे हुए गणित को कांग्रेस बड़ी चालाकी से बदल रही है। इस गणित-बदलों-अभियान के सूत्रधार है कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और देश के प्रभावी गणितज्ञ राहुल गाँधी जो बड़ी ही चतुराई से अपने गणिती सिद्धांतों और सांख्यिकी ज्ञान से गणित को बदल रहे है। आइये देखते है आखिर किस तरह कांग्रेस गणित जैसे जटिल विषय को बदलना चाहती है।

पिछले वर्ष राहुल गाँधी ने गणित का Arithematic ही बदल दिया
2 करोड़ – 1 लाख = 1 लाख

2017 की बात है गुजरात चुनाव का दौर था राहुल गाँधी गुजरात में मंदिर-मंदिर माथा टेक नए-नवेले हिन्दू बनकर धुंआधार रैलीयां कर रहे थे। ऐसी ही एक रैली में राहुल जी ने बड़ी चालाकी से सदियों पुराने गणित के जोड़-घटाने के अरिथमेटिक को ही बदल दिया। राहुल ने जनता को विश्वास दिला दिया और कहा “मोदी जी ने 2 करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा किया था लेकिन अब तक सिर्फ 1 लाख लोगों को ही रोजगार दिया गया है मतलब 1 लाख लोग अब भी बेरोजगार है” । यानि 2 करोड़ में से 1 लाख घटाए तो 1 लाख बचेंगे जो हमारे पारंपरिक गणित के हिसाब से 1.99 करोड़ होना चाहिए था लेकिन इतने महान गणितज्ञ ने कहा है तो जरुर इसके पीछे उनका गहन अध्ययन होगा या कोई तो प्रमेय या अरिथमेटिक होगा जिसके कारण उन्होंने यह देश के ही नही दुनिया के गणित को चैलेंज किया है।

Arithematic के बाद नंबर सिस्टम को बदलने की कोशिश
“दो लाख” को बदल कर “डेढ़ लाख पचास हजार” कर दिया

पिछले दिनों मध्यप्रदेश के ग्वालियर में प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने केंद्र और राज्य सरकार पर राजनीतिक प्रहार करते हुए बड़ी ही सावधानीपूर्वक एक सीधे से प्रचलित नंबर को बदलते हुए कहा “शिवराजजी किसानों का डेढ़ लाख पचास हजार करोड़ का कर्जा माफ़ कर दीजिये” और पूरा मीडिया इसे राजनितिक हमला समझता रहा लेकिन किसी ने भी यह नहीं देखा कि यह सिर्फ सरकार पर राजनीतिक हमला नहीं था बल्कि यह गणित की एक संख्या जिसे हम बड़ी आसानी से “दो लाख” कहते थे राहुल गाँधी ने इसे बदल कर “डेढ़ लाख पचास हजार” कर डाला और किसी को भनक तक नहीं लगी।

केवल बदल ही नहीं किया, नया अविष्कार भी कर डाला : “पिछत्तीस” का

राहुल गाँधी यहीं नहीं रुके राहुल गाँधी ने मध्यप्रदेश के सागर जिले के देवरी में चुनाव प्रचार के दौरान अपनी एक रैली में एक नए नंबर का अविष्कार कर डाला। उन्होंने कहा “मध्यप्रदेश में पिछत्तीस लाख बेरोजगार युवा है”। अब देश के तमाम छोटे-बड़े गणितज्ञ इस संख्या का मतलब निकलने में लग गये हैं लेकिन कोई भी ठीक से इस संख्या का मतलब बता नहीं पा रहा है।

कोई इसे छत्तीस और पचहत्तर का जोड़ बता रहा है तो कोई इसे 5 और छत्तीस का जोड़ बता रहा। सब अपने तरफ से इसका अंदाजा लगा रहा है कि आखिर इस नए अविष्कारीक संख्या का मतलब क्या है। राहुल गाँधी इतने महान गणितज्ञ हैं कि उन्होंने ज़रूर जनता के भलाई के लिए इस नंबर का आविष्कार किया होगा कि दो अलग-अलग संख्या को बोलने के बजाये दो संख्या जोड़ करके इसे बोला जाए। आजकल यह नया नंबर सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है।

“चार लाख करोड़” को बनाया “साढे तीन लाख 50 हजार करोड़”

“डेढ़ लाख पचास हजार” की जनता में अपार सफलता के बाद राहुल गाँधी ने हाल ही में राजस्थान के जोधपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए एक और संख्या को बदल डाला जिसे “साढ़े तीन लाख पचास हजार करोड़” का नाम दिया है। राहुल ने जोधपुर में बीजेपी पे हमला करते हुए कहा “मोदी जी ने 15 उद्योगपतियों का साढे तीन लाख 50 हजार करोड़ का कर्जा माफ़ कर दिया” और चुपके से “चार लाख करोड़” को “साढ़े तीन लाख पचास हजार करोड़” बना दिया और किसीको इसकी भनक तक नहीं लगी। महान लोगों का व्यक्तित्व महान होता है, वे अपने आविष्कार पर गर्व नहीं करते। ऐसे ही राहुल गांधी ने देश को इतने बड़े आविष्कार दिये लेकिन कभी इसका क्रेडिट नही लिया।

गणित एक ऐसा विषय है जो हर किसी को एक जटिल और मुश्किल विषय लगता है देश में पहले ही लाखों बच्चे इस विषय में स्कूल-कॉलेज में असफल होते रहे हैं ऐसे में सवाल उठता है क्या राहुल देश और जनता की भलाई के लिए यह सदियों पुराने गणित को बदल रहे है या इसके पीछे उनकी कोई बड़ी साजिश है। कहीं यह इतिहास के बाद गणित जैसे मुश्किल विषय को और मुश्किल करने का इरादा तो नहीं जिससे इस देश में लोग गणित और उसके अन्दर की बारीकियां अरिथमेटिक, प्रमेय, नंबर सिस्टम को ही भूल जाएँ जिसका फायदा आनेवाले चुनाव में और 2014 का दाग भुला पाने में कांग्रेस ले सके। क्या पता अपनी 44 सीटों को राहुल गाँधी अपने इस गणित से 440 बना दें। लेकिन देश के लाखों करोड़ों छात्रों की राहुल गाँधी से एक ही विनती है कि आपने इतिहास तो जैसे तैसे बदल दिया लेकिन गणित जो पहले से हमें समझ नहीं आता था उसे और जटिल न बनाएं।

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