करतारपुर कॉरिडोर : भारत-पाकिस्तान की बीच बिछी एक रक्तरंजित शतरंजी बिसात

करतारपुर कॉरिडोर बनाने को लेकर जो घटना हुई है वह वर्तमान में, भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे बड़ी कूटनीतिक घटना है, जिसके दूरगामी परिणाम होंगे। यह वैश्विक राजनीति की शतरंजी चालों में से एक चाल है।

मैं देख रहा हूँ कि एक वर्ग, जहां पाकिस्तान द्वारा करतारपुर कॉरिडोर बनाने व खोलने के फैसले से जहां, पाकिस्तान व उसके प्रधानमंत्री इमरान खान की भूरि भूरि प्रशंसा करने से नहीं थक रहा है, वहीं मोदी सरकार द्वारा पाकिस्तान के निर्णय को स्वीकार करने से बेहद आहत है।

मैं इन दोनों वर्गों की भावना को अच्छी तरह समझता हूँ और इन दोनों वर्गों को इसको व्यक्त करने का पूरा अधिकार है।

मोदी सरकार के निर्णय से आहत वर्ग, इस कॉरिडॉर के बनने के शुभ मुहर्त पर नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा किये गए क्रिया कलापों व पाकिस्तान की धरती पर दिए वक्तव्य से शायद ज्यादा आक्रोशित व आहत हुआ हैं।

मैं इन आहत लोगो से यही कहूंगा कि करतारपुर कॉरिडोर का निर्णय एक नेसेसरी ईविल के रूप में लेना है। जब 2019 में गुरुनानक जी का 550वां प्रकाशोत्सव है तब भारत उस प्रस्ताव से कैसे इनकार कर सकता है जो प्रस्ताव भारत द्वारा पाकिस्तान को 20 वर्षो से दिया हुआ है?

आज, जब पाकिस्तान को परिस्थितियां उसके अनुकूल लगी और भारत में उसको समर्थन देने वालों के लिए एक मोहरा तैयार हो गया, तब उसने यह निर्णय लेकर गेंद, जो कि एक ग्रेनेड है, भारत के पाले में फेंक दी।

यह एक ऐसा निर्णय था कि यदि भारत, पाकिस्तान के निर्णय को स्वीकार नहीं करता तो, पूरा पंजाबी समाज (सिर्फ सिख नहीं) भारत की सरकार के खिलाफ सड़क पर आ जाता और खालिस्तानियों के लिए पंजाब में बिना किसी मेहनत के अंदर तक घुस जाने का रास्ता मिल जाता।

ऐसा नहीं है कि भारत ने, पाकिस्तान की इस कूटनीतिक चाल को नहीं समझा है, वो खूब अच्छी तरह समझा है। इसी के साथ भारत के कूटनीतिक विशेषज्ञों को इस बात का भी विश्वास था कि व्यक्तिगत महत्वकांक्षा और 2019 के चुनावों को देखते हुये, पाकिस्तान प्रेमी भारतीय मीडिया व बुद्धिजीवी, कांग्रेस पार्टी व उसके द्वारा तैयार मोहरा, पाकिस्तानी सरकार के आत्मविश्वास की अतिरेकता में बहेंगे।

इसकी शुरुआत नवजोत सिंह सिद्धू ने पाकिस्तान की धरती से ही शुरू कर दी थी और उसके बाद पाकिस्तान के विदेशमंत्री शाह महमूद कुरेशी द्वारा करतारपुर कॉरिडोर के पाकिस्तानी निर्णय को पाकिस्तान की गुगली कह कर थोड़ा और साफ कर दिया था।

विदेशमंत्री कुरेशी ने जिस भावभंगिमा और लहजे से यह बात थी वो बड़ी अमर्यादित थी। विश्व भर से, पाकिस्तान को मिले कूटनीतिक संकेतों से तुरन्त समझ में आ गया था कि पाकिस्तान की भारत विरोधी रणनीति, एक स्तर पर कहीं न कहीं उजागर हो गयी है।

इसलिये पाकिस्तान की इस चूक को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाकिस्तानी सम्पादकों से हुई वार्ता में थोड़ा सम्भाल लिया था। जहां उन्होंने अपने विदेशमंत्री कुरेशी के गुगली वाले वक्तव्य को गलत बताया और कहा कि यह गुगली नहीं थी बल्कि यह उनके द्वारा फेंकी गई सीधी डिलीवरी थी, और करतारपुर कॉरिडोर खोलने का निर्णय उनका था।

उस वक्त इमरान खान ने यही समझा था कि बात संभल गयी है लेकिन बात अब और खुल कर सामने आ गयी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की स्ट्रेट डिलीवरी के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने जो चाइनामैन फेंकी है उससे, वैश्विक कूटनैतिक जगत में पाकिस्तान की मूलभूत भारत विरोधी करतारपुर कॉरिडोर रणनीति, अपरिपक्व रूप से नग्न हो गयी है।

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने टीवी पर कल दिए इंटरव्यू में यह सत्य स्वीकार किया है कि पाकिस्तान की सरकार द्वारा करतारपुर कॉरिडोर को लेकर लिया गया निर्णय, भारत के विरुद्ध एक चाल है।

यह भारत, पाकिस्तान के बीच बिछी बिसात पर, पाकिस्तान द्वारा चली गयी एक शतरंजी चाल है। जिसका आशय यही है कि पाकिस्तान प्रेमी भारतीय मीडिया, बुद्धिजीवी व कांग्रेस द्वारा तराशा गया नवजोत सिंह सिद्धू, पाकिस्तानी काला मोहरा है, जो आगे की चालों से भारत को शह देने के लिए आगे बढ़ाया गया है।

यहां पाकिस्तान की चाल में कोई गलती नहीं हुई है क्योंकि वैश्विक छापामार कूटनीति में इसका स्थान विशेष होता है। लेकिन पाकिस्तान यह भूल गया है कि यदि चली गयी चाल के पीछे का मंतव्य, विरोधी के समक्ष स्पष्ट हो जाता है तो उसकी आगे की चालें निष्प्रभावी व खुद के उसके लिए आत्मघाती सिद्ध होती है।

मुझे लगता है कि 2019, करतारपुर कॉरिडोर, पाकिस्तान व भारत के सभी पाकिस्तान प्रेमियों के लिए रक्तरंजित शयन बनने वाला है।

कहीं पाकिस्तान में खालिस्तानी अलगाववादियों का नया पोस्टर बॉय तो नहीं बन रहे सिद्धू

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY