नैतिक जानवरों के साथ पशुवत व्यवहार के लिए वोटर की महज एक उंगली काफी है

कम्युनिस्ट उर्फ़ माओइस्ट… नेता जी सुभाषचन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ और सरदार पटेल को ‘फासिस्ट’ कहने का इतिहास रखते हैं, तो कोई बहुत अजीब बात नहीं लगती क्योंकि यही इनकी संस्कृति है… जो इनके ऐतिहासिक अलगाववादी डीएनए से इनके स्वभाव में आती है।

ऐसे अलगाववादी डीएनए और ऐसी भाषा की रिश्तेदारी आज कैसे पुनः सिद्ध हो रही है इसे इस वीडियो के जरिये समझा जा सकता है।

कांग्रेसी नेता जब माओइस्टों को क्रांतिकारी कहते हैं। कांग्रेस पार्टी जब अपनी सत्ता रहते हुए पंजाब में अपने ही नेता/ मंत्री से खालिस्तानी और पाकिस्तानी प्रेम करवाती है… तो भारत के निर्वाचित प्रधानमंत्री की हत्या करने की साज़िशों में लगे और बेनकाब हुए माओइस्टों जैसी भाषा, गालियों का जुबान पर आना बेहद सहज हो जाता है।

और तब… खालिस्तानी आतंकवादी के साथ फोटो खिंचवाता, पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष के साथ गले मिलता यह अलगाववादी मानसिकता का कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू… भारत के निर्वाचित प्रधानमंत्री को अपशब्द कहता है।

भारत के सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के निर्वाचित मुख्यमंत्री को कुत्ता बोलता है।

ऐसी निजी और सस्ती गाली देते हुए सिद्धू एक निर्वाचित और संवैधानिक पद पर आसीन राजनेता योगी आदित्यनाथ भर को ही कुत्ता नहीं कहता, बल्कि वह नाथ परंपरा के श्रेष्ठ पीठ गुरु गोरक्षनाथ की पीठ को कुत्ता कहता है।

पंजाब को एक बार फिर अलगाववाद और आतंकवाद की आग में झोंकने की लगातार असफल कोशिशों के बीच कांग्रेसी सिद्धू यह सब राजस्थान की धरती पर कहता है, इसके सिर्फ चुनावी मकसद नहीं माने जा सकते। यह पुरातन भारतीय संस्कृति, संस्कार, हिंदू अनुभूति को गाली देना है।

राजस्थान की धरती और राजस्थान के मतदाताओं को ऐसे नैतिक कुत्तों को उनकी जगह दिखानी ही होगी।

नैतिक जानवरों के साथ पशुवत व्यवहार के लिए वोटर की महज एक उंगली काफी है।

सीधे सीधे हिंदुत्व के प्रतिष्ठित प्रतीक पर प्रहार हैं सिद्धू के घृणित अपशब्द

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