अब तालियां नहीं, ठुकेंगी काँग्रेस के ताबूत में कीलें…

नवजोत सिंह सिद्धू,

आप अपने समय के एक बेहतरीन बल्लेबाज़ रहे हैं इसमें कोई शक़ नहीं है। आप भारत के चुनिंदा बेहतरीन ओपनर्स में से एक रहे हैं। उस समय आपके बल्ले से विरोधी गेंदबाज़ों की ठुकाई का देश ने खूब आनंद लिया था।

सन 1996 की बात है। आप भारतीय टीम के साथ इंग्लैंड दौरे पर गए थे और अचानक बिना किसी को कुछ बताए वापस लौट आये थे।

आप जैसे खिलाड़ी का इस तरह से बीच में दौरा छोड़ आना और उसकी वजह किसी को भी नहीं बताना कई दिनों तक मीडिया में, लोगों में चर्चा का विषय बना रहा। लेकिन आपके लौटने की वजह किसी को पता नहीं चल पाई थी। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में संभवतः इस तरह की ये पहली और आखिरी घटना थी।

बहुत समय बाद पूर्व बीसीसीआई सचिव जयवंत लेले ने अपनी एक किताब में इसका खुलासा किया था। उन्होंने लिखा कि जब आप वापस आये तो आपसे इसका कारण जानने के कई प्रयास किये गए लेकिन आप अपना मुँह खोलने को राज़ी नहीं थे।

जब तमाम प्रयासों के बावजूद आपने अपना मुँह नहीं खोला तब किसी ‘पंजाबी भाषी’ खिलाड़ी को इस राज़ को उगलवाने की ज़िम्मेदारी दी गई। ये खिलाड़ी थे मोहिंदर अमरनाथ।

अमरनाथ आपको प्यार से गले में हाथ डालकर ले गए और आपको बहुत विश्वास में लेकर आपसे पूछा। आपने जो कारण बताया उससे अमरनाथ हैरान भी हुए और ज़ोर से हँसे भी…

आपने बताया कि उस वक़्त टीम के कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन आपको गालियाँ दिया करते थे और वो आपको गुड मॉर्निंग… नेट प्रैक्टिस… होटल की लॉबी… लंच, डिनर सभी जगह आपको गालियाँ दिया करते थे.. “माँ के #@”…

इस बात से आप अज़हर से बेहद ख़फ़ा थे लेकिन बजाय किसी से कुछ बोलने के, आप अपना दौरा बीच में ही छोड़कर चले आये।

आपकी बात सुनकर मोहिंदर अमरनाथ हँसे और उन्होंने कहा कि – भाई हैदराबाद में तो लोग प्यार से इस गाली को देते हैं… अज़हर ने तुम्हें गाली नहीं दी है बल्कि वो तुमसे प्यार करता है इसलिए तुम्हें ऐसा बोलता है…

इस तरह से इस मामले का पटाक्षेप हुआ था।

क्रिकेट से विदाई के बाद आप राजनीति में आये। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े। जीते… लेकिन आज की पीढ़ी आपको ‘कपिल शर्मा शो’ के कारण ही जानती है… आपकी अट्टहासी हँसी… शेरो शायरी… ठोको ताली का भी लोगों ने भरपूर आनंद लिया।

इन सबके बीच अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षाओं के चलते आपका नाम अरविंद केजरीवाल की पार्टी से जुड़ने में आया, लेकिन सौदा जमा नहीं सो आपने काँग्रेस का ‘हाथ’ थाम लिया।

अपनी शेरो शायरी के अंदाज़ से आपने काँग्रेस में तेज़ी से अपनी जगह बनाई। काँग्रेस अधिवेशन के दौरान काँग्रेस की और सारे काँग्रेसियों की मालकिन की शान में ज़बरदस्त क़सीदे गढ़े।

ये अलग बात है कि कभी यही के यही शेर आपने मोदीजी की शान में पढ़े थे… कभी मनमोहन सिंह पर तंज़ कसने वाले आप ने मनमोहन सिंह और मालकिन के चरणों में शीश नवा दिया…

इसके बाद पाकिस्तान में भी नई सरकार बनी और वक़्त ने ऐसी पलटी मारी कि कभी आपके साथ क्रिकेट खेले इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन गए…

इस घटना ने आपके दिल को बल्ले में उछालना शुरू कर दिया… इमरान के अधूरे मन से भेजे गए न्यौते को किसी कैच की भाँति लपककर आप ने तुरंत पाकिस्तान की ओर दौड़ लगा दी…

पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष से आप ऐसे गले मिले जैसे भारत सरकार ने आपको शांति का कबूतर बनाकर भेजा हो… आप भारत पाकिस्तान के बीच शांति की बड़ी बड़ी बातें करने लगे… ये अलग बात है कि उस वक़्त इमरान ने आपकी तरफ नज़रें उठाकर देखा भी नहीं था…

लेकिन जब कोई इंसान नंगई पर उतर आए तो उसके नौ ग्रह बलवान हो जाते हैं… आपके भी हो गए…

आप एक बार फिर पाकिस्तान जा धमके… ये जानते हुए भी कि अब पाकिस्तान की औक़ात विश्व में एक भिखारी देश की हो गई है… उसके नापाक मंसूबे कश्मीर के आगे पैर नहीं पसार पा रहे… लेकिन आप फिर पहुँच गए पाकिस्तान, और आपने अपनी खोखली छाती ठोककर कहा कि ‘शांति की पहल हमेशा पाकिस्तान ने ही की है’…

जिस राज्य में आप मंत्री हैं, उसी के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आपको पाकिस्तान जाने से मना किया था लेकिन आपने नहीं सुनी क्योंकि आपके ऊपर हाथ राहुल-सोनिया का है…

ये अलग बात है कि पूरी काँग्रेस में केवल कैप्टन अमरिंदर सिंह ही एकमात्र ऐसा नेता है जो इन माँ बेटों के आगे सिर नहीं झुकाता है। बाक़ी नेताओं की तरह आपने भी ‘मूत्रपान’ का सेवन शुरू कर दिया है…

ख़ैर… अपने बड़बोलेपन और घटियापन को अपनी शान समझने में आप कुछ ज़्यादा आगे चले गए। आपकी मालकिन की परेशानी ये है कि उनकी पार्टी में कोई बोलने वाला या भीड़ जुटाऊ नेता बचा नहीं है तो आपको ज़िम्मेदारी दे दी।

कल आपने सभा में अपने बड़बोलेपन और इन लटकों झटकों की शानदार नुमाईश की। आपने एक राज्य के मुख्यमंत्री, संन्यासी और एक महंत को ढोंगी, लोभी और कुत्ता तक कह दिया।

आपने देश के ईमानदार प्रधानमंत्री को भी चोर कह दिया। ये अलग बात है कि आपकी मालकिन और उनका मंदबुद्धि बेटा 5000 करोड़ के घोटाले के आरोप में ज़मानत पर छूटे हुए अपराधी हैं, लेकिन इससे आपको क्या फ़र्क़ पड़ता है क्योंकि आप न केवल मूत्रपान कर रहे हैं बल्कि मालकिन के बेटे का स्थान विशेष भी हलवा समझकर चाट रहे हैं।

यक़ीन मानिये, ‘बहनों और भाईयों’ की नकल करते हुए किसी सड़कछाप, घटिया, सस्ती शराब पीने वाले शराबी जितने ही घटिया लग रहे थे। भाजपा, मोदी जैसे राष्ट्रवादी पार्टी और नेता का साथ भी आपने वैसे ही छोड़ दिया जैसे कभी इंग्लैंड से मैदान छोड़कर भाग आये थे… इसी के साथ आपके क्रिकेट करियर का भी अंत हो गया था…

अब समझ आया कि आपकी ‘पहचान’ बहुत पहले अज़हरुद्दीन कर चुके थे और वो आपको सही गाली देते थे “माँ के @#”.. वैसे गालियाँ तो आपको बहुत दी जा सकती हैं लेकिन अब आप खुद एक गाली बन चुके हैं…

अब तालियाँ नहीं काँग्रेस के ताबूत में कीलें ठुकेंगी…

इतिहास कभी झुठलाता नहीं है और वो कभी भी आईने की तरह सामने आकर खड़ा हो जाता है…

सिद्धू का समर्थन करना, राहुल की आत्मघाती राजनीति

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY