इतिहास के पन्नों से : दो-तीन लाख, अपने ही मतांतरित बन्धुओं को पचा गया हिन्दू

अणहिल्लपट्टण के सोलंकी राजा अजयपाल की मृत्यु 1175 में हो गई। उसके पंचवर्षीय पुत्र मूलराज को राजा बनाकर अजयपाल का छोटा भाई भीमदेव द्वितीय उसका संरक्षक बन गया।

1178 में शहाबुद्दीन गौरी का भारत पर आक्रमण हो गया। वह सोमनाथ की ओर बढ़ा। उसके पास डेढ़ लाख की सेना, और पूरा लाव लश्कर था। भीमदेव और गौरी के बीच सिंध-गुजरात की सीमा पर युद्ध हुआ। इस युद्ध में हाथी पर बिठाकर, 5 वर्षीय महाराजा को भी लाया गया था। मूलराज बीमार पड़ गया और दुर्भाग्य से उसकी मृत्यु हो गई तब भीमदेव गुजरात का अधिपति बन गया।

भीमदेव ने गौरी से कठिन लोहा लिया और उसे परास्त किया। इस युद्ध में सुल्तान के पचास हजार सैनिक मारे गए। 30 हजार स्त्रियां छुड़ाई गई, जिन्हें विभिन्न गांवों से लूट लिया गया था, अथवा वे सैनिकों के मनोरंजन के लिए 2-2 दिरहम में खरीदी गई थी और इन्हें आगे बल्ख बुखारा की मंडियों में बेचा जाना था। इनमें जो कुंवारी लड़कियां थीं, उनसे कुलीन हिंदुओं ने विवाह कर लिया।

शेष विवाहिताओं को जुलाब देकर, उपवास करवा, सिंध नदी में स्नान करके, एक मास में शुद्ध किया गया और सर्वसाधारण में ब्याह दिया गया। जो बड़े सरदार थे, उन्हें दाढ़ी मुंडवाकर, हिन्दू बना लिया गया और विभिन्न पद दिये गए।

शेष सैनिकों और नौकरों को कोली, खांट बाबरिया और मेर लोगों में मिला लिया गया। शादी, जन्म, मरण के विषय में उन्हें आज्ञा दी गई कि वे उन वर्गों के रीति रिवाज मानें।

दो-तीन लाख, अपने ही मतांतरित बन्धुओं को पचा गया हिन्दू समाज। भीमदेव उस समय 21 वर्ष का नौजवान था, और इतनी एडवांस सोच थी उसकी।

आज से 900 वर्ष पहले, जनता ने उसे हाथों हाथ स्वीकार कर लिया और आज हम पढ़ते हैं कि भारतीय लोग नई सोच रखते ही नहीं थे, या कि पिछड़े हुए थे!!

उस समय की चार बड़ी शक्तियां 1.अणहिल्लपट्टण के सोलंकी, 2.कन्नौज के राठौड़, 3.अजमेर-दिल्ली के चौहान, 4.देवगिरी के यादव।

इनमें परस्पर कलह नहीं होती तो भारत कभी गुलाम नहीं होता। और कलह भी कोई बड़े कारणों से नहीं हुई थी!!
आह दुर्भाग्य!

सूफी या खूंखार जिहादी

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY