विषैला वामपंथ : ‘ग्रेट लीप’ से चीनी इतिहास के सबसे भयानक काल कल्चरल रेवोल्यूशन तक

द ग्रेट लीप फॉरवर्ड‘ की विभीषिका पर माओ की आलोचना करने की हिम्मत की उसके ही निकटतम मित्र और संघर्ष के दिनों के साथी पेंग दे-व्हाई ने।

हालांकि उसने यह आलोचना पब्लिकली नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत गुप्त पत्र में की थी। पर माओ ने असहमति को विद्रोह घोषित किया और इस मामले को लुशान की पार्टी कॉन्फ्रेंस में उठाया।

पेंग दे-व्हाई ने इस स्पष्टवादिता की कीमत चुकाई और इस विलक्षण सैन्य व्यक्तित्व को रक्षा प्रमुख के पद से हटा दिया गया। उसकी जगह माओ ने अपनी पसंद के व्यक्ति लिन बि-याओ को रक्षा मंत्री बनाया जिसने सेना को देश की रक्षक के बजाय माओ की राजनीतिक विचारधारा का समर्थक बनाने के लिए सेना की राजनीतिक दीक्षा का काम शुरू किया।

सेना के अनेक जनरल जिन्होंने लॉन्ग मार्च और स्वतंत्रता की लड़ाई में भाग लिया था, हटा दिए गए। जो कोई भी पेंग दे-व्हाई का करीबी समझा गया, उसे निबटा दिया गया।

पर ग्रेट लीप की विभीषिका इतनी भयावह थी कि उससे बिल्कुल इनकार नहीं किया जा सकता था। इस कार्यक्रम की कमियों को खुद माओ को भी बेमन से स्वीकारना पड़ा, और उसने जैसे तैसे स्वीकार किया कि गलतियाँ हुईं हैं और ग्रेट लीप के आशानुरूप परिणाम नहीं मिले।

महामानव माओ के मुँह से अपनी यह आलोचना उसकी महानता और विशाल हृदय के प्रमाण मान कर स्वीकार कर लिए जाने चाहिए थे। पर कुछ दुष्ट संघी ना, हर जगह घुस ही जाते हैं।

माओ ने ना सिर्फ अपनी आलोचना की बल्कि उसने अपनी पार्टी के दूसरे लोगों को भी खुल के अपने विचार व्यक्त करने के लिए कहा। उसने लोगों को एक ऐतिहासिक चरित्र ‘हाई-रुए’ का उदाहरण दिया जो मिंग राजा का मंत्री था और उसे राजा के निरंकुश शासन की आलोचना करने के साहस के लिए याद किया जाता है।

पर माओ अपनी आलोचना कर रहे हैं, इसका यह मतलब थोड़े ना है कि दूसरे भी आलोचना करने लगें और माओ को इसे चुपचाप सुनना पड़े। ज्यादातर लोग इस ट्रैप में नहीं फंसे, कुछ ने इसे सीरियसली ले लिया कि सचमुच चीन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का युग आ गया है।

इस बीच एक पार्टी पदाधिकारी और बीजिंग के डिप्टी मेयर वू हान ने एक नाटक लिख डाला। नाटक था ‘हाई-रुए की बर्खास्तगी’। हालाँकि नाटक ऐतिहासिक संदर्भ में था पर यह समझना कठिन नहीं था कि यह रक्षामंत्री पेंग दे-व्हाई की बर्खास्तगी की ओर छुपा इशारा है। इस नाटक ने चीन की राजनीति में एक तूफान ला दिया जिसकी परिणति कल्चरल रेवोलुशन में हुई।

ग्रेट लीप की विभीषिका से माओ उबर नहीं पाया था और उसकी साख को गहरा धक्का लगा था। उसने धीरे धीरे सारे प्रशासनिक और संगठन के कार्यभार छोड़ दिये और पार्टी का चेयरमैन बन कर रह गया।

उसकी उम्मीद थी कि पार्टी और देश के सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर उसकी राय ली जाती रहेगी। पर देंग और जो एन-लाई जैसे दूसरी पंक्ति के नेताओं ने कमान संभाल ली और वे धीरे धीरे देश को रास्ते पर लाने लगे।

माओ को यह बात अखर रही थी कि उसे उचित महत्व नहीं दिया जा रहा था। वे ऐसी प्रतिक्रिया देते थे जैसे कि माओ की बातों को बहुत ध्यान और सम्मान से सुन रहे हैं, पर उसपर अमल नहीं करते थे। माओ ने कहा कि उससे एक मृत पूर्वज की तरह बर्ताव किया जा रहा है।

हाई-रुए वाले नाटक पर भी पार्टी ने उचित प्रतिक्रिया नहीं दी, इससे वह नाराज़ था और यह छुपा नहीं था। माओ को शांत करने के लिए पार्टी ने 5 लोगों की एक कमिटी बनाई जिसने ‘हाई-रुए की बर्खास्तगी’ का विश्लेषण किया और अपनी रिपोर्ट माओ को भेज दी। रिपोर्ट में कहा गया कि नाटक में कुछ भी राजनीतिक नहीं है और यह सिर्फ एक एकेडमिक विषय है। रिपोर्ट माओ को पसंद नहीं आई।

माओ ने बीजिंग छोड़ दिया और वह शंघाई चला गया। कुछ ऐसा लगा जैसे माओ ने अपने आप को सार्वजनिक जीवन से अलग कर लिया है पर माओ सिर्फ अपने काउंटर-अटैक की तैयारी कर रहा था।

शंघाई पार्टी का मुख्यालय था, और वहाँ माओ ने अपना ‘गैंग ऑफ फोर’ गठित किया जिसके हाथ में माओ ने कल्चरल रेवोलुशन की कमान पकड़ा दी। इस गैंग ऑफ फोर में एक महत्वपूर्ण सदस्य थी माओ की आखिरी पत्नी जो एक बी-ग्रेड सिनेमा एक्ट्रेस भी थी।

कल्चरल रेवोल्यूशन चीनी इतिहास का सबसे भयानक काल है। इसे ग्रेट लीप फॉरवर्ड के साथ निरंतरता में ही देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह चेयरमैन माओ के शुद्ध साम्यवाद के आर्थिक-सामाजिक-सांस्कृतिक प्रयोगों की उपज है और इसका मूल उद्देश्य माओ के व्यक्तिगत आभामंडल का निर्माण करना था।

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