बस इतनी सी तो बात है, पर भक्त लोग समझते ही नहीं

राहुल गांधी जब दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल में गए थे तब वो कैथोलिक थे क्योंकि उनको उस कोटा से ही एडमिशन मिला था।

उसके बाद फ्लोरिडा के उस कॉलेज में गए जिसको पादरी पैदा करने का कॉलेज कहा जाता है… वहाँ भी इनको एडमिशन इसलिए ही मिला क्योंकि ये ईश्वर का संदेश देने वाले की पूजा करते थे।

उसके बाद जब राजीव गांधी की अंत्येष्टि हुई तब राहुल गांधी एक विशिष्ट हिन्दू बने।

हिन्दू की इस विशिष्ट प्रजाति का सिर्फ एक ही प्रतिनिधि भारत में पाया जाता है।

इस विशिष्ट हिन्दू को कुछ विशेष अवसर पर कपड़ों के ऊपर से जनेऊ पहनना होता है।

सर्वसाधारण हिन्दू को जनेऊ का स्पर्श शरीर से कराना होता है इसलिए वस्त्र जनेऊ के ऊपर पहनते हैं… लेकिन विशिष्ट हिन्दू को जनेऊ दुनिया को दिखाना होता है इसलिए वो कपड़े के ऊपर जनेऊ पहनते हैं।

राजीव गांधी ने जीवन में दो बार जनेऊ पहना था… पहली बार जब उनका जनेऊ हुआ था और दूसरी बार जब इंदिरा गांधी की अंत्येष्टि कर रहे थे तब कुर्ते के ऊपर जनेऊ पहना था।

राहुल गांधी की तो शादी ही नहीं हुई इसलिए उनको बहन की शादी में जनेऊ पहनना पड़ा… राजीव गांधी की अंत्येष्टि में उन्होंने अपने खानदान की परम्परा का पालन करते हुए कुर्ते पर जनेऊ पहना।

सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोला – राहुल गांधी हिन्दू हैं पर… जनेऊधारी हिन्दू हैं।

उसके शब्द पर ध्यान दीजियेगा… हिन्दू हैं पर… हिन्दू हैं और नहीं बोला उसने।

दोनों में अंतर तो होता है न… ये जो हिन्दू होते तो हैं पर जनेऊधारी भी होते हैं जिनको विशेष सुविधा मिली होती है समयानुसार अपना धर्म बदलते रहने की।

सार्वजनिक जीवन में जहाँ पब्लिक देख सकती है वहाँ ये लोग हिन्दू के कर्मकाण्ड पूरे दिखावे के साथ करते हैं और अपने निजी जीवन में जहाँ की खबर पब्लिक को नहीं मिले वहाँ ये क्रिश्चियन होते हैं…

दस जनपथ के अंदर चर्च इसलिए ही तो बनाना पड़ा ताकि किसी को पता नहीं चले कि जनेऊधारी हिन्दू नियमित चर्च में गायत्री मंत्र सीखने जाते हैं।

मनोज त्यागी की याददाश्त छुट्टी पर चली गई थी इसलिए गैर हिन्दू रजिस्टर में राहुल गांधी का नाम भी अहमद पटेल के साथ लिख गया… उसको याद ही नहीं रहा कि राहुल गांधी हिन्दू बन कर घूम रहे हैं… आजकल उनकी क्रिश्चिनिटी छुट्टी पर है।

झूठ की याददाश्त कमज़ोर होती है न इसलिए बेचारे से गलती से मिस्टेक हो गया।

फिरोज़ गांधी घर जमाई बने थे इसलिए उनका धर्म परिवर्तन हो गया था और इंदिरा गांधी का सरनेम परिवर्तन हुआ था…

पर दोनों के अलग होने के बाद फिरोज़ गांधी की मृत्यु हुई थी इसलिए उनको उनके धर्म के अनुसार दफनाया गया था… पारसी रहते तो शरीर छत पर रख दिया जाता चील कौवों के लिए।

सोनिया शादी करके गांधी खानदान में आई इसलिए उनका धर्म और सरनेम परिवर्तन हुआ और राहुल गांधी भी हिन्दू हो गए…

प्रियंका ने ईसाई से हिन्दू रीति रिवाज से शादी तो की लेकिन धर्म परिवर्तन हो गया… इसलिए सरनेम में वाड्रा जुड़ गया और बच्चे नानी का धर्म मानने वाले पैदा हुए…

बस इतनी सी तो बात है पर भक्त लोग समझते ही नहीं है।

कोई तो सुलझा दो रे बाबा, ये गुत्थी

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