विषैला वामपंथ : बिखरते परिवार, टूटता समाज

वामपंथी यूटोपिया बेचते हैं… पर उनको क्या कहें जो हर बार एक नया यूटोपिया खरीद लेते हैं?

लोगों ने ज़हरीले सपने खरीदना और बेचना बंद नहीं किया। बस, उनकी दुकानों के नाम और साइन बोर्ड बदल गए। उनके खरीददार और शिकार भी बदल गए। वे रोज़ नए नए शिकार पकड़ते हैं।

उनके नाटक के इस नए अंक में सभी अभिनेताओं ने नई कॉस्ट्यूम पहन ली है। पीड़ित की भूमिका में महिला है, अत्याचारी की भूमिका पितृसत्ता की है, वह अन्यायपूर्ण व्यवस्था जिसका प्रतिकार होना है, वह परिवार है। और पीड़ित के लिए झंडा खड़ा करने वाला क्रांतिकारी है लिबरल फेमिनिस्ट।

और मानवता ने कम्युनिज़्म के इस नए रूप का मूल्य क्या चुकाया है? उस कम्युनिज़्म के शिकार तो करोड़ों हुए… इस कम्युनिज़्म के दिये हुए जख्म गिनिए…

इसका शिकार है टूटे हुए करोड़ों परिवार, उन परिवारों के बच्चों का बचपन, ड्रग्स की आदत के शिकार अनाथ बच्चे, वह 15 वर्ष की लड़की जो स्कूल जाने की उम्र में प्रेग्नेंट हो गई है, वह अकेली माँ जो बिना बाप के बच्चे को पालने के संघर्ष में तनाव और अवसाद झेलती है, आत्महत्या करती है…

और इस दिशाहीन पीढ़ी की उपज अगली पीढ़ी जो मानवता और सभ्यता की मूलभूत इकाई ‘परिवार’ के बिना बड़ी हो रही है। परिवार, वह समाजशास्त्रीय उपलब्धि जो मानव जाति ने हज़ारों वर्षों पहले खोज निकाली थी, आज फिर से खो गयी है।

क्या इन टूटते परिवारों के लिए जिम्मेदार फेमिनिज़्म है? ठीक है, इन आंकड़ों की ओर देखिये… अमेरिकी समाज में फेमिनिज़्म 1960-70 में आया, 1980-90 तक पूरे पश्चिमी समाज की मुख्यधारा बन गया। और आज तो महाशक्तियों के राष्ट्राध्यक्ष और राजपरिवार इसके सामने घुटने टेके हुए हैं।

इस दौरान पश्चिमी समाज में परिवार का क्या हुआ? अमेरिका में 1960 में तीन लाख नब्बे हज़ार तलाक़ हुए थे, 1990 में 1.17 मिलियन तलाक़ हुए। आज अमेरिकी समाज में 40-50% शादियों का अंत तलाक़ में होता है। जो दूसरी शादी करते हैं उनमें यह और ज्यादा है।

1960 में इंग्लैंड-वेल्स में 23,800 तलाक़ हुए थे। 1990 में यह संख्या 1,60,000 पहुँच गई, यानि लगभग सात गुना। जबकि 1960 में कुल साढ़े तीन लाख शादियाँ हुई थीं जो शताब्दी की अंत तक आते आते ढाई लाख सालाना हो गईं। यानी हम उन संबंधों को गिन भी नहीं रहे जो शादी तक पहुँचे ही नहीं।

आज इंग्लैंड में तलाक़ की दर 42% है और इनमें से 65% पेटिशन औरतों की तरफ से आते हैं। हम उन देशों की बात नहीं कर रहे जहाँ तीन तलाक़ बोलने से तलाक होता है। पूरे यूरोप की यही कहानी है। कैथोलिक देश स्पेन और पुर्तगाल में, हंगरी और चेक रिपब्लिक में 60% तलाक होते हैं, बेल्जियम में 70%।

यह गलती औरतों की नहीं है। यह एक पीढ़ी के भीतर व्यवहार में आया परिवर्तन है। लोगों का परिवार के प्रति, एक दूसरे प्रति रवैये में आया परिवर्तन है। ज़िम्मेदारियाँ अब 50-50% बँटने लगी हैं। जबकि ज़रूरी नहीं है कि यह फॉर्मूला काम करे। 49-51% हो सकता है, 40-60% भी हो सकता है…

यह प्रत्येक व्यक्ति की क्षमता और लक्षणों पर निर्भर करता है कि दो लोगों के बीच कौन सा समीकरण काम करेगा। पर जहाँ सबको अपना अपना 100% देना था, वहाँ एक दूसरे से 50-50% लेने का गणित हावी है। लोग दोषमुक्त नहीं होते, लेकिन जब पूरी प्रवृति ही दोष ढूंढने की हो तो कोई भी कैसे स्वीकार्य होगा?

किसी एक व्यक्ति की पारिवारिक कलह का मूल्य समाज कैसे चुकाता है? अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट की 2014 की रिपोर्ट इस फादरलेस जेनरेशन का लेखा जोखा देती है।

43% अमेरिकी बच्चे बिना पिता के बड़े होते हैं। 63% किशोर आत्महत्याएं बिना पिता के बच्चों में होती हैं, 90% बेघर बच्चे बिना पिता के होते हैं। अपराधी आचरण वाले 85% बच्चे बिना पिता के बड़े होते हैं। और नारीवादी सुन लें – 81% बलात्कारी बचपन में बिना पिता के बड़े होते हैं।

बिना पिता के पल रहे बच्चों के शोषण की संभावना सामान्य से दोगुनी होती है। स्कूल में पढ़ाई अधूरी छोड़ देने वाले बच्चों में 71% टूटे घरों के बच्चे होते हैं। अस्थिर संबंधों वाले घरों के बच्चों में ड्रग एडिक्शन की दर सामान्य से 68% ज्यादा होती है, और सिंगल अभिभावक वाले घरों के बच्चों में इसके ऊपर से और 30% जोड़ लीजिये।

बेटियों की स्थिति भी देख लीजिए। बिना पिता की बच्चियों में टीन-एज में शादी करने की दर सामान्य से डेढ़ गुनी है। और टीन-एज में प्रेग्नेंट होने की दर सात गुनी है। अगर वे शादी करती हैं तो उनके तलाक की संभावना 92% ज्यादा है।

इंग्लैंड का समाज भी कुछ ऐसी ही तस्वीर पेश करता है। एक अभिभावक वाले परिवार के बच्चों में हिंसक अपराधों और नशे की आदत सामान्य से नौ गुनी ज्यादा है। बिना पिता के बड़ी हो रही बच्ची के टीन-एज में प्रेग्नेंट होने या यौन शोषण और बलात्कार की शिकार होने की दर 8 गुनी ज्यादा है।

इसके सामाजिक और मानवीय मूल्य का तो अंदाज़ लगाया ही नहीं जा सकता। इसका आर्थिक मूल्य क्या है? यूके में टूटे परिवारों की वजह से होने वाली हानि का वार्षिक अनुमानित मूल्य है 100 बिलियन, जी हाँ 100 बिलियन पौण्ड। तुलना के लिए समझिये, यहाँ की नेशनल हेल्थ सर्विस यानि पूरी तरह से मुफ्त स्वास्थ्य सेवा का कुल बजट है 125 बिलियन। सिर्फ सोशल केअर का खर्च है 22 बिलियन पौण्ड। तो यह है दुष्ट पितृसत्ता से मुक्ति की कीमत।

और यह कीमत इंग्लैंड और अमेरिका चुका पा रहा है क्योंकि यह एक विकसित अर्थव्यवस्था है। यहाँ सरकारें कुछ जिम्मेदारी लेती हैं, हालाँकि सरकार पिता का विकल्प नहीं हो सकती। और इन देशों ने 50-60 साल पहले इस आग से खेलना शुरू किया था। हमारे देश में यह आग अभी पहुँची है। आप कल्पना कर सकते हैं हमारा क्या होगा। उस दुष्ट पिता को हटा दीजिये, और पूरी सामाजिक व्यवस्था ही ध्वस्त हो जाएगी।

आप स्वास्थ्य की चिन्ता करते हैं? क्या कोई सरकार, कोई कानून कभी बिना परिवार को शामिल किए किसी को स्वास्थ्य सुविधा दे सकता है? हो सकता है, आप बहुत शोर गुल करके दो चार हस्पताल और बनवा दें… बीमार पड़ने पर मरीज को हस्पताल लेकर क्या वे वकील साहब जाएँगे? एक बीमार व्यक्ति, पुरुष या स्त्री, के घर का खर्च क्या जज साहब चलायेंगे? और एक बीमार बिटिया अपने पास अपने माता-पिता को खोजती है या उस न्यायविद को जिसने उसे वह स्वास्थ्य सेवा दिलाने का ठेका लिया है जो उसे उसका पितृसत्तात्मक परिवार नहीं देना चाहता?

विषैला वामपंथ : फेमिनिज़्म और कुछ नहीं, स्त्रियों के हिस्से का कम्युनिज़्म है

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