Mission Modi 2019 : चुनावी जीत के लिए 6 महत्वपूर्ण मुद्दे

2019 के लोकसभा चुनाव इसलिए भी ज्यादा दिलचस्प होनेवाले है क्योंकि अब तक बीजेपी एकमात्र ऐसी पार्टी थी देश में जो हिन्दुओं के हक़ की और हिन्दू आस्थाओं की बात करती थी लेकिन राहुल गाँधी के मंदिर दर्शन के स्वांग रचने के बाद कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व के सहारे कुछ हिंदुओं को बरगलाने में और हिन्दू वोट बैंक में कुछ सेंध लगाने में कामयाब हो सकती है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता।

ऐसे में भले ही मोदी सरकार ने तमाम वादे पूरे किये हो, जनता एवं देश के हक़ में अच्छे और कठिन फैसले लिए हो, देश दुनिया में भारत की छवि बदल दी हो देश में विकास के सैकड़ों काम किये हो, पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया हो लेकिन कुछ वो फैसले है जिसे बीजेपी के जन्म से जोड़कर देखा जाता रहा है।

बहुत मुमकिन है की बीजेपी 2019 के चुनाव में भले ही जीत जाए लेकिन बहुमत के लिए एनडीए सहयोगी पार्टियों की जरूरत पडे, ऐसे में

वे कौन से अति महत्त्वपूर्ण मुद्दे हैं जो 2019 के आम चुनाव के पहले मोदी सरकार को पूर्ण करना होगा, जो मोदी सरकार और बीजेपी की प्रचंड जीत को सुनिश्चित कर सके। तो आइये देखते हैं उन्हीं मुद्दों को जिसके ज़रिये बीजेपी प्रचंड जीत के साथ खुद के बल पर सरकार बनाने में कामयाब हो सकती है।
 

अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण

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Ram Mandir Ayodhya

भाजपा अपने जन्म से अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर बनाने के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ी है। अगर आज बीजेपी जहाँ खड़ी है उसका श्रेय श्रीराम मंदिर आन्दोलन को दिया जाये तो अतिश्योक्ति नहीं माना जायेगा। इसीलिए बीजेपी और केंद्र की मोदी सरकार के चुनावी एजेंडा में राम मंदिर प्रमुख मुद्दा रहा है और भाजपा सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है।

हालाँकि राम मंदिर का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और सरकार इसका हल कोर्ट के माध्यम से चाहती है। पिछले कुछ दिनों से अध्यादेश लाकर राम मंदिर बनाने के लिए हिंदूवादी संघठनों की तरफ से सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है।

दीपक मिश्रा के मुख्य न्यायाधीश बनने से कुछ उम्मीद जागी थी लेकिन उनके कार्यकाल संपन्न होने के बाद फिर एक बार मंदिर फैसला टल सकता है ऐसे कयास लगाये जा रहे हैं। लेकिन अगर मोदी सरकार किसी तरह (चाहे अध्यादेश) चुनाव के 1-2 महीने के भीतर-भीतर कम से कम मंदिर पर फैसला लाने में भी कामयाब हो जाती है तो आनेवाले चुनाव में भाजपा के पक्ष में एकबार फिर बम्पर वोटिंग हो सकती है और पार्टी 300 सीटें पार करने में कामयाब हो सकती है क्योंकि राम मंदिर मुद्दा 100 करोड़ हिन्दुओं की आस्था से जुड़ा है और यह विषय हिंदुओं के आत्मसम्मान और श्रद्धा का है तो मौजूद हालात में देश के सबसे बड़े तबके को और इंतज़ार नहीं करवाया जा सकता।

समान नागरिक क़ानून (यूनिफार्म सिविल कोड)

भाजपा ने 2014 के आम चुनाव के पहले अपने चुनावी घोषणापत्र में समान नागरिक कानून लागू करने की बात कही थी। चार साल से ज्यादा गुज़र जाने के बाद भी इस पर कुछ नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है।

इस कानून के अंतर्गत के सभी मज़हब और समाज के हर तबके के हर नागरिक एक कानून के अधीन लाया जायेगा। एक देश में एक कायदा जिससे देश में व्याप्त अलग मज़हब के लिए अलग नियम को बदला जा सकता है। इस कानून के लागू होने से देश में अलग मज़हबों के लिए अलग कानून को पूरी तरह ख़त्म किया जाएगा जिससे नागरिकों के बीच के अंतर को कम किया जा सकता है।

मज़हब विशेष के तुष्टिकरण के चलते अबतक देश के किसी भी दल ने इसके लिए आवाज़ बुलंद नही की है। भाजपा ने इसे अपने घोषणापत्र में शामिल कर देश की नब्ज़ को टटोलने का काम किया है। इस कानून के लागू होने से केवल मोदी सरकार को अपने दम पर बहुमत लाने में आसानी ही नहीं होगी बल्कि भारतीय राजनीति में इसे एक ऐतिहासिक फैसला माना जायेगा और ये समाज को एक सूत्र में पिरोने में मिल का पत्थर साबित होगा।

नीरव मोदी, विजय माल्या, मेहुल चोकसी समेत तमाम बड़े भगोड़ों की देश वापसी तथा कार्रवाही

मोदी सरकार देश के बैंकों से हज़ारों करोड़ों के लोन लेकर तथा देश की बैंकों को चूना लगाकर देश छोड़कर भागनेवाले विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे भगोड़ों को देश में लाकर उन पर कार्रवाही करने में कामयाब हो जाती है तो यह न केवल बीजेपी के लिए नहीं बल्कि देश के लिए भी एक बड़ी जीत मानी जायेगी।

विजय माल्या ने देश को 9 हजार करोड़ का चूना लगाया, वहीं नीरव मोदी तथा मेहुल चोकसी देश को लगभग 15 हजार करोड़ चूना लगाकर भाग गए थे। यह अलग बात है इनको लोन कांग्रेस सरकार के शासनकाल में दिया गया था लेकिन मौजूद हालातों में मोदी सरकार अगर इनमें से किसी को भी देश में वापस लाकर उन पर कार्रवाई करने में सफल होती है तो निश्चित तौर पर इसका बड़ा फायदा आनेवाले चुनाव में बीजेपी को होगा और बहुमत पार करने में भरी मदद होगी।

संविधान से आर्टिकल 370, 35A को हटाना

1954 में नेहरू सरकार ने राजनीतिक फायदों के लिए इस अनुच्छेद को संविधान में शामिल किया था। यह अनुच्छेद जम्मू कश्मीर विधानमंडल को यह अधिकार देता है कौन स्थायी निवासी माना जाये और कौन नहीं और किसे सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों में विशेष आरक्षण दिया जायेगा, किसे संपत्ति खरीदने का अधिकार होगा, किसे जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव में वोट डालने का अधिकार होगा।

आर्टिकल 370 और 35A भारत के संविधान में दो ऐसे अनुच्छेद है जो जम्मू कश्मीर राज्य को विशेष अधिकार प्रदान करते हैं। इस धारा के कारण दूसरे राज्यों का कोई भी नागरिक जम्मू कश्मीर में न संपत्ति खरीद सकता है और न ही वहां का स्थायी नागरिक बन सकता है। यह अनुच्छेद भारत के नागरिकों के साथ भेदभाव करते हैं क्योंकि इसके लागू होने के साथ ही भारत के लोगों को जम्मू कश्मीर के निवासी प्रमाणपत्र से वंचित कर दिया गया जबकि पकिस्तान से आये घुसपैठियों को नागरिकता दे दी गयी।

इस अनुच्छेद को हटाना इसलिए भी ज़रुरी है क्योंकि इस अनुच्छेद को संसद के जरिये लागू नहीं करवाया गया था बल्कि राष्ट्रपति द्वारा इसे लागू किया गया था। भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में आर्टिकल 370 को संविधान की धारा से हटाना शामिल किया गया है ऐसे में अगर मोदी सरकार 35A को हटाकर 370 को हटाने की राह पर कदम बढ़ाती है तो यह बीजेपी के लिए बड़ा फायदे का सौदा हो सकता है।

विदेश से कालाधन वापिस लाना

मोदी सरकार नोटबंदी को सख्ती से लागू कर के देश में जमा हो रहे कालेधन को रोकने में तो कामयाब हो चुकी है बल्कि उसने बाहर जा रहे कालेधन पर भी अंकुश लगा दिया है। भले ही हवाला, नक्सली और कुछ जबरन धर्मांतरण करनेवाली संस्थाओं के बाहर से आनेवाले चंदे पर इन संस्थाओं की कमर तोड़ रखी हो, लेकिन अब भी जनता दशकों से बाहर भेजे गए कालेधन के लिए नरेन्द्र मोदी के नेतृत्ववाली सरकार पर भरोसा करती नज़र आती है, तो ऐसे में अगर मोदी सरकार चुनाव के पहले स्विस बैंक समेत अन्य विदेशी बैंकों में जमा कालेधन पर कुछ हद तक देश में लाने में सफल रहती है या कालेधन खाताधारकों के नाम ज़ाहिर करने में भी सफल होती है तो इसका बड़ा असर आने वाले चुनाव में देखने को मिल सकता है।

पाकिस्तान के खिलाफ एक और सर्जिकल स्ट्राइक 

मोदी सरकार अपने 4 वर्षों के कार्यकाल में पकिस्तान को उसकी नापाक हरकतों के लिए कई दफा खरी खोटी सुनाने के साथ ही सीमा पर उसे मुंहतोड़ जवाब दे चुकी है। अब पकिस्तान यह भली भांति जान गया है कि बाकि सरकारों की तरह मोदी सरकार सिर्फ कड़ी निंदा करके चुप नहीं बैठने वाली क्योंकि भारतीय सेना द्वारा पकिस्तान सेनाओं पर दो बार ताबड़तोड़ सर्जिकल स्ट्राइक ने पकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कमर तोड़ रखी है।

कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल ने सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल खड़े किए, जिससे कांग्रेस की किरकिरी तो हुई और सीधा फायदा बीजेपी को मिला क्योंकि देश की जनता पाकिस्तान जैसे आतंकी देश को सबक सिखाने के मूड में है ऐसे में पाकिस्तान पर एक और बड़ा हमला या सर्जिकल स्ट्राइक बीजेपी पर जनता का भरोसा काबिज करने में मददगार साबित होगा।

यह सभी वो महत्वपूर्ण मुद्दे है जिसपर मोदी सरकार को काम करने की ज़रूरत है। अगर इनमें से किसी एक दो पर भी मोदी सरकार सफलता हासिल कर लेती है तो 2019 के आम चुनाव में बीजेपी प्रचंड जीत के साथ खुद के बलबूते पर सरकार बनाने में कामयाब हो पाएगी। इन मुद्दों के सहारे अगर बीजेपी अपने दम पर 300 सीटें पार कर ले तो अतिशयोक्ति नहीं होना चाहिए। बाकी इनके बिना सिर्फ विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ना सरकार बनाने में हमेशा ही चुनौतीपूर्ण रहा है।

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