जम्मू-कश्मीर से फर्ज़ी धाराओं को ध्वस्त करने की ओर बढ़ते कदम

ये एक बहुत ही महत्वपूर्ण खबर है, और सबसे बड़ी बात है कि इस ख़बर पर किसी का ध्यान नहीं। जम्मू और कश्मीर में एक बहुत ही बड़ी घटना घटित हुई है।

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने विधानसभा भंग करने के बाद एक बहुत ही बड़ा फैसला लेते हुए जम्मू एंड कश्मीर बैंक को अब राइट टू इन्फर्मेशन एक्ट, चीफ विजिलैंस कमिश्नर गाइडलाइंस और स्टेट लेजिस्लेटर के दायरे में लाने की घोषणा कर दी है।

राज्यपाल सत्यपाल मलिक की अध्यक्षता में हुई स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव काउंसिल की मीटिंग में जेएंडके बैंक के साथ पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग की तरह व्यवहार किए जाने को मंजूरी दे दी गई।

अब जम्मू एंड कश्मीर में आरटीआई एक्ट, 2009 के प्रावधान बैंक जैसे अन्य पीएसयू पर लागू होंगे। इसके अलावा बैंक को सीवीसी के दिशानिर्देशों का भी पालन करना होगा।

अन्य पीएसयू की तरह जेएंडके बैंक स्टेट लेजिस्लेटर के प्रति जवाबदेह होगा। अब बैंक की एनुअल रिपोर्ट राज्य वित्त विभाग के माध्यम से स्टेट लेजिस्लेटर के सामने रखी जाएगी।

आप को जानकर हैरत होगी कि जेएंडके बैंक देश का ऐसा अकेला सरकार प्रवर्तित बैंक है, जिसमें जम्मू कश्मीर सरकार की 59.3 फीसदी हिस्सेदारी है। और अभी तक इसका व्यवहार एक प्राइवेट बैंक सरीखा ही था। इस पर कई कानून लागू नहीं होते थे, RTI जैसा कानून लागू नहीं होता था… CVC के प्रति कोई जवाबदेही नहीं हुआ करती थी।

जाहिर है, विपक्षी पार्टियों नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी ने इस कदम की आलोचना की है, और इसे जम्मू कश्मीर की तथाकथित स्वायत्तता पर आक्रमण भी बताया है।

वैसे दर्द होना जायज़ है, स्वायत्तता के नाम पर दो परिवारों का राज्य की सत्ता पर इतने दशकों का कब्ज़ा धीरे धीरे खत्म हो रहा है।

कश्मीर के मामले में केंद्र सरकार को उलाहना देने वाले वाले इन बातों पर ज़रूर गौर करें… पहले GST को राज्य में लागू करवाना और आज J&K बैंक को पब्लिक स्टेटस देना… ये तमाम फर्जी धाराओं को ध्वस्त करने की ओर बढ़ते कदम हैं। वरना जम्मू और कश्मीर में संविधान के और अन्य कई नियम कानून लागू नहीं होते।

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