जब तक भाजपा अच्छे प्रधानमंत्री देगी, देश उसको लाता रहेगा

कुछ दिन पहले ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में एक प्रश्न पूछा गया। प्रश्न था ‘कांग्रेस के बाद कौनसे दल से अधिक बार प्रधानमंत्री चुना गया है?’

मेरे लिए ये प्रश्न 125 करोड़ रूपये का था। जितने मेरे देश के नागरिक, उतने का ये सवाल था। ये सवाल सीधे-सीधे विधानसभा और आगामी लोकसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है।

आज़ादी के बाद से अब तक कांग्रेस ने सर्वाधिक नौ प्रधानमंत्री देश को दिए हैं। उसके बाद जनता दल ने देश को तीन प्रधानमंत्री दिए। विश्वनाथ प्रताप सिंह, देवेगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल।

भाजपा यहाँ तीसरे नंबर पर आ रही है। भाजपा ने अब तक देश को केवल दो प्रधानमंत्री दिए हैं। कांग्रेस के सभी प्रधानमंत्रियों के शासनकाल का जोड़ 51 साल 901 दिन (दिनों को भी यदि साल में बदलें तो 53 साल 271 दिन) आ रहा है।

भाजपा के प्रधानमंत्रियों के शासनकाल का जोड़ कुल 10 साल 263 दिन आता है। सब कुछ आपके सामने है।

दुनिया भर में एक कहावत मशहूर है। ‘आम भारतीय की याददाश्त बड़ी कमज़ोर होती है’।

जब हम इस तुलना को देखते हैं तो समझ में आता है कि भाजपा तो अभी शुरू ही हुई है। उसके दोनों प्रधानमंत्रियों का शासनकाल बेजोड़ रहा है।

भारत निर्माण के इक्यावन साल कांग्रेस की जिम्मेदारी रहे हैं। भारत निर्माण हुआ लेकिन उसकी गति कछुए जैसी रही।

इन 53 इक्यावन सालों में देश को सौगातें कम, घाव अधिक दिए गए। इन इक्यावन 53 सालों में कांग्रेस के नेताओं की संपत्ति हिमालय की ऊंचाई से होड़ करने लगी थी। मोदी सरकार का एक कार्यकाल पूरा नहीं हुआ और असंतुष्टों के स्वर उभरने लगे हैं।

एक आम भारतीय इतना अधीर क्यों है। उसका कारण आपके भीतर ही छुपा बैठा है। पहले अंग्रेज़ों की लाठी खाई और बाद के सालों में नेताओं से लूटे गए हैं आम आदमी। उसकी अधीरता इतनी बढ़ गई है कि उसे रातोंरात परिणाम चाहिए।

देश का जनादेश तो आपातकाल के बाद से ही बदलने लगा था। राजीव गाँधी के बाद कांग्रेस सहयोगी दलों के सहयोग से सत्ता में टिकी रही है। वास्तव में देखा जाए तो वह अपना मूल जनादेश 2004 से ही खो चुकी थी। भारत एक बार भरोसा करता है तो लम्बे समय के लिए करता है। देश ने कांग्रेस को पांच दशक दिए हैं जो कम नहीं होते।

कुछ लोग कहते हैं कि भारतीय के डीएनए में कांग्रेस है। जनाब, एक आम भारतीय के डीएनए में केवल चिंगारी पलती आई है। उसके अंदर कोई पार्टी साँस नहीं लेती। ब्रिटिशों को भगाया और कांग्रेस को लाया। उसने कांग्रेस को भी खुद पर हावी नहीं होने दिया है। जब तक भाजपा अच्छे प्रधानमंत्री देगी, देश उसको लाता रहेगा। कांग्रेस को समझना होगा कि दरी पर बैठने के दिन तो अब शुरू ही हुए हैं। अभी कई दशकों तक उन्हें दरी पर ही बैठना है।

मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव कांग्रेस उस दिन ही हार गई थी, जब उसके नेता ने कहा था ‘चौकीदार चोर है’। चौकीदार को चोर कहने से चुनाव नहीं जीते जा सकते। आपको बताना पड़ता है कि आप में उससे भी बेहतर चौकीदार बनने की काबिलियत है। आप सारे चुनावों में यही कर रहे हैं। कहीं भी आप ये नहीं बता रहे कि हम उनसे बेहतर कर सकते हैं। जनता को ये बर्दाश्त नहीं होगा कि ‘चोर ही चौकीदार को चोर बोले।’

(देखा जाए तो भाजपा को छोड़ सारी गैर कांग्रेसी सरकारें किसी न किसी रूप में कांग्रेसी ही रही है। भ्रम पैदा न हो इसलिए ‘प्रधानमंत्रियों’ की तुलना की गई है।)

‘मालकिन’ के आदेश के सामने देश का मान तो बहुत तुच्छ वस्तु

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