मोदी-भाजपा के लिए इसलिए राजनीतिक-चुनावी मुद्दा नहीं है राम मंदिर

2014 लोकसभा चुनाव से लगभग 6-7 महीने पूर्व एक अत्यन्त वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित हिंदुत्ववादी चिंतक, विचारक, लेखक के साथ नरेन्द्र मोदी की बैठक हुई थी। मेरे अत्यन्त घनिष्ठ एक पत्रकार मित्र भी उस बैठक में उपस्थित थे।

बैठक के बाद उन मित्र ने मुझे बताया था कि बैठक के दौरान मोदी बहुत कम बोले थे और हम लोगों की बात बहुत ध्यान से सुनते रहे थे। लेकिन बैठक का समापन उन्होंने ना में सिर हिलाते हुए यह कहकर किया था कि “नहीं जी, मुद्दा तो केवल विकास का ही चलेगा।”

उन मित्र महोदय से यह सुनकर मैं असमंजस में पड़ गया था। लेकिन उस बैठक के 5 वर्ष पश्चात मेरा वह असमंजस आज पूरी तरह खत्म हो चुका है। नरेन्द्र मोदी ने ऐसा क्यों कहा था? इसका उत्तर मुझे मिल चुका है। आप मित्र भी जानिए कि ऐसा क्यों…

5 करोड़ महिलाओं को नि:शुल्क गैस चूल्हा। 7 करोड़ घरों की महिलाओं के लिए शौचालय। 3 करोड़ बेघरों को घर। 70 वर्षों से अंधेरे में डूबे 4 करोड़ घरों में मुफ्त बिजली कनेक्शन। 12 करोड़ गरीबों को 12 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख का दुर्घटना बीमा। 30 रुपये मासिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का जीवन बीमा। 50 करोड़ गरीबों के लिए 5 लाख तक का इलाज मुफ्त। 12 करोड़ बेरोजगारों को स्वरोजगार के लिए अबतक 8 लाख करोड़ का मुद्रा ऋण। 30 करोड़ लोगों को बैंकों से जोड़कर उनके हिस्से की लगभग 1 लाख करोड़ की वो सब्सिडी/अनुदान सीधे उनके खाते में पहुंचाना जिसे सरकारी बिचौलिए/ दलाल लूट लेते थे।

जनहित के यह कुछ ऐसे कार्य हैं जो धरातल पर स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। ऐसे कार्यों की सूची बहुत लम्बी है। इसके अलावा देश में बिजली, पानी, सड़क, रेल तथा आर्थिक मोर्चे पर ऐतिहासिक गति से हुए विकास से सम्बंधित कार्यों की सूची भी बहुत लम्बी है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी सरकार के कार्यों की इन्हीं सूचियों की कसौटी पर 2019 के चुनावी महाभारत लड़ने की तैयारी कर चुके हैं।

इस सूची के जवाब में मोदी विरोधी खेमे की झोली पूरी तरह खाली, कंगाल, बदहाल, बेहाल दिखाई दे रही है।

यही कारण है कि हिंदुत्व की आस्तीन के सांपों के सहयोग से मोदी विरोधी खेमें ने 2019 के लोकसभा चुनाव को राम मन्दिर पर सीमित/ केन्द्रित करने की कोशिशें प्रारम्भ कर दी हैं।

मोदी विरोधी गिरोह ऐसा क्यों कर रहा है? इसका जवाब जानने के लिए पहले यह जानना भी जरूरी है कि…

पिछले 50 वर्षों के दौरान उत्तरप्रदेश में बनी सरकारों तथा उनके मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल/ कार्यशैली की तुलना में 1991 में उत्तरप्रदेश में बनी भाजपा सरकार और उसके तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के कार्यकाल को मैं सर्वश्रेष्ठ मानता हूं।

लेकिन 6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में जब विवादित ढांचा ध्वस्त हुआ उसके कुछ ही घण्टों बाद केन्द्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 6 दिसम्बर की रात लगभग 8 बजे उत्तरप्रदेश समेत मध्यप्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश की पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकारों को बर्खास्त कर दिया था।

इसके बाद रात को 9 बजे दूरदर्शन और रेडियो पर देश के नाम अपने विशेष सन्देश में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने बहुत साफ शब्दों में यह ऐलान भी किया था कि कांग्रेस सरकार उसी स्थान पर फिर से बाबरी मस्ज़िद का निर्माण करवाएगी।

उस समय उत्तरप्रदेश सरकार की बर्खास्तगी का कारण तो समझ में आया था। लेकिन मध्यप्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश की सरकारों की बर्खास्तगी का कोई औचित्य नहीं था। इन तीनों सरकारों की बर्खास्तगी का फैसला धूर्ततापूर्ण, असंवैधानिक तथा केवल मुस्लिमों को खुश करने के लिए लिया गया था।

लेकिन एक वर्ष पश्चात जब इन 4 राज्यों में चुनाव हुए तो 2 राज्यों में पूर्ण बहुमत वाली कांग्रेस सरकार बनी थी। तथा उत्तरप्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार बनी थी।

उस प्रचण्ड राम लहर तथा राम मंदिर के लिए बलिदान हुई भाजपा की उन 4 सरकारों के बावजूद ऐसा क्यों हुआ?

दरअसल उस विध्वंस के पश्चात हुए देश मे हुए बवाल के शोर में उन सरकारों के कार्य/ उपलब्धियां दब गईं थीं, गुम हो गईं थीं। मीडिया में यही शोर था कि इन सरकारों ने कोई काम नहीं किया केवल भावनाएं भड़का कर वोट लेना चाह रही हैं।

और ज़मीनी सच यह है कि देश में बेघर, बेरोजगार, अभावग्रस्त जीवन जी रहे लोगों की जनसंख्या सबसे अधिक है। वह हिन्दू भी हैं, रामभक्त भी हैं। लेकिन उनमें वह सामर्थ्य वह शक्ति ही नहीं है कि अपने दैनिक जीवन की अनिवार्य अपरिहार्य न्यूनतम आवश्यकताओं को ताक पर रखकर अयोध्या में राम मंदिर को प्राथमिकता बनाकर मतदान करें सरकार बनाएं।

पुनः दोहराऊंगा कि यह लोग राम मंदिर के विरोधी नहीं हैं। पर उनकी प्राथमिकताएं उनकी मजबूरी है। घोर विपत्ति से जूझ रहे किसी धीर गम्भीर ज्ञानी ने ऐसी ही परिस्थितियों को इन शब्दों में परिभाषित किया था कि…

भूखे भजन ना होय गोपाला,
ले लो अपनी कंठी माला।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन पंक्तियों के मर्म को समझा है। उनकी रणनीति भी उसी अनुसार है। विरोधी जान रहे हैं कि मोदी की यह रणनीति विरोधियों का “राम नाम सत्य करने वाली है।”

क्रमशः

यह सच मीडिया नहीं बताता कि RSS BJP ने मन्दिर निर्माण की क्यों ठानी!

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