क्योंकि बरसने वाले बादल गरजते नहीं

2014 में भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र के आखिरी पन्ने में राम मंदिर का जिक्र था। इस बात पर कांग्रेसी, सपाई, बसपाई तथा NDTV गैंग बहुत आगबबूला हुआ था कि BJP/ RSS/ मोदी ने प्रभु राम को भुला दिया।

इन न्यूज़ चैनलों ने इसी बात पर दर्जनों बहसें कर डाली थीं, अंग्रेज़ी और ऊर्दू अखबारों में इसी मुद्दे पर लम्बे लम्बे संपादकीय कई किश्तों में लिखे गए थे।

इसके अलावा अपने लगभग साल भर लम्बे चुनाव अभियान में नरेन्द्र मोदी ने लगभग 450 से अधिक (सम्भवतः 473) जनसभाओं, रैलियों को सम्बोधित किया था। देश विदेश के इलेक्ट्रॉनिक/ प्रिंट मीडिया को 100 से अधिक इंटरव्यू दिए थे।

उनमें से किसी एक भी रैली में दिये गए किसी एक भी भाषण या किसी इंटरव्यू का ऐसा कोई वीडियो लिंक, ऐसी खबर का कोई लिंक क्या किसी के पास है, जिसमें नरेन्द्र मोदी ने कहा हो कि मुझे वोट दो क्योंकि मैं राम मंदिर बनवाऊंगा।

चुनौती देता हूं कि कोई भी व्यक्ति ऐसा एक भी साक्ष्य नहीं दे पाएगा। क्योंकि 2014 के अपने पूरे चुनाव अभियान के दौरान नरेन्द्र मोदी ने राम मंदिर बनवाने के नाम पर कभी वोट ही नहीं मांगा था।

मेरे उपरोक्त सवाल के उत्तर में लफ्फाज़ी नहीं बल्कि तथ्य प्रस्तुत करियेगा कि राम मंदिर के नाम पर नरेन्द्र मोदी ने कब वोट मांगा।

लेकिन मैं निश्चिंत हूं कि अयोध्या में राम मन्दिर बनेगा। बहुत भव्य बनेगा। उसमें नरेन्द्र मोदी की ही निर्णायक भूमिका होगी।

ऐसा इसलिए क्योंकि बरसने वाले बादल गरजते नहीं।

आज यह इसलिए लिखना पड़ा क्योंकि इस मुद्दे पर राममंदिर/ हिंदुत्व के फेसबुकिया ठेकेदारों का नंगनाच कुछ दिनों से बहुत तेज़ हो गया है।

मप्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ चुनावों के मौसम में राममंदिर/ हिंदुत्व के ये स्वघोषित फेसबुकिया ठेकेदार आजकल टिटहरी की तरह टांगे ऊपर उठाए सोच रहें हैं कि आसमान उन्हीं पर टिका है।

जल्द ही एक विस्तृत लेख इस पर कि भाजपा के लिए अयोध्या में राम मंदिर राजनीतिक मुद्दा क्यों नहीं है?

बोले राम सकोप तब, भय बिन होय न प्रीत

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