अमेरिकी वामपंथ ही वह उद्गम है जहां से बहता है वामपंथ का यह गंदा नाला

अमेरिकी लिबरलों ने 50 के दशक में घेर कर कम्युनिज़्म विरोधी सीनेटर जोसफ मैक्कार्थी का शिकार किया। वहीं उनका अगला शिकार हुए राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन।

मैक्कार्थी और निक्सन में रिपब्लिकन होने के अलावा एक और बात समान थी। दोनों की कम्युनिस्टों के विरुद्ध प्रतिबद्धता।

दोनों ने अपना पूरा राजनीतिक कैरियर अमेरिकी राजनीति और प्रशासन में कम्युनिस्टों के विरोध पर बनाया। दोनों का नाम एक संस्था से जुड़ा रहा – HUAC यानी हाउस अन-अमेरिकन एक्टिविटी कमिटी।

यह एक संसदीय समिति थी जो 1938 से 1975 तक रही और जिसका काम कम्युनिस्ट गतिविधियों की जाँच करना था। इसने हज़ारों अमेरिकी कम्युनिस्ट जासूसों को पहचाना, पकड़ा, उनकी जाँच की और उन्हें सज़ा दिलाई।

निक्सन वर्षों तक लिबरल मीडिया के नंबर एक शत्रु रहे और एक फाइटर की तरह वे मीडिया से लड़ते रहे और उनकी छाती पर मूंग दल के, मीडिया की सारी दुश्मनी के बावजूद दो बार राष्ट्रपति चुनावों में विजयी हुए।

1960 में मीडिया ने जम कर कैनेडी का पक्ष लिया और मीडिया की भारी पक्षपातपूर्ण कवरेज से मदद पाकर कैनेडी मामूली अंतर से जीते। वह अमेरिकी इतिहास का सबसे नज़दीकी चुनाव था, और अमेरिकी लिबरल गैंग को लगा कि उन्होंने निक्सन से हमेशा के लिए छुटकारा पा लिया है।

लिबरल गैंग और मीडिया की निक्सन से दुश्मनी इससे पुरानी है। 1950 के दशक में HUAC में मैक्कार्थी के अलावा जिस सीनेटर ने अमेरिकी कम्युनिस्टों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया वह निक्सन थे।

लिबरल दावा करते थे कि कम्युनिस्ट जासूसों और एजेंटों का खतरा झूठा और बढ़ा चढ़ा कर बताया हुआ है। पर 1948 में एक अमेरिकी गवर्नमेंट ऑफिशियल एल्गर हिस्स पर जासूसी का मुकदमा चलाया गया। वह उस समय साक्ष्यों के अभाव में बच गया। पर 1950 में उसकी फिर से सुनवाई हुई और उसपर आरोप सिद्ध करने में निक्सन ने केंद्रीय भूमिका निभाई।

हिस्स के चुराए हुए अनेक गुप्त सरकारी दस्तावेज़ और एक माइक्रोफिल्म्स पकड़ी गई, जिसे एक खेत में एक खोखले पम्पकिन में छुपाया गया था। ये दस्तावेज़ रूस को खुफिया जानकारी पहुंचाने के लिए चुराए गए थे, और इसने हिस्स का दोष साबित करने और उसे सज़ा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ये दस्तावेज पम्पकिन पेपर्स के नाम से जाने जाते हैं।

इसमें सिर्फ हिस्स को सज़ा ही नहीं हुई, अमेरिकी सरकारी और सामाजिक संस्थाओं में कम्युनिस्ट घुसपैठ के दावों की पुष्टि भी हुई और उन लोगों की क्रेडिबिलिटी को बहुत गहरा झटका लगा जो इस खतरे का मज़ाक उड़ाते थे… उनमें डेमोक्रैट राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन भी थे जिन्हें हराते हुए आइज़नहावर और निक्सन की टीम ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का पद पाया। पर अपने कम्युनिस्ट विरोधी रुख की वजह से निक्सन हमेशा लिबरल मीडिया के शत्रु बने रहे। और 1960 में चुनाव हारने के बाद निक्सन ने खुलकर मीडिया को पक्षपाती कहा और उनसे लड़ते रहे।

निक्सन संभवतः अपनी सदी के सबसे प्रभावशाली अमेरिकी राष्ट्रपति थे। उन्होंने वियतनाम युद्ध को समाप्त किया और चीन से संबंध बनाए। सबसे कठिन शीतयुद्ध के काल में निक्सन सारे मीडिया विरोध और पक्षपात, और घोर वामपंथी उपद्रवों के बावजूद 1972 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के इतिहास में सबसे भारी बहुमत से दोबारा चुने गए। पर अपनी सारी उपलब्धियों के बावजूद निक्सन को इतिहास जिस बात के लिए याद करता है वह था वॉटरगेट कांड।

आप सबने वॉटरगेट कांड का नाम सुना होगा। 1972 में डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफिस में जासूसी के लिए टेप रिकॉर्ड करने वाले उपकरण लगाते हुए 5 लोग पकड़े गए। उनकी जाँच चली और अंत में राष्ट्रपति निक्सन से इसके तार जुड़े पाए गए। निक्सन पर महाभियोग लाने की प्रक्रिया शुरू हुई और निक्सन को इस्तीफा देना पड़ा।

निक्सन का अपराध क्या था? उसने डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफिस में ही नहीं, पूरे व्हाइट हाउस में, लगभग सभी संवेदनशील ऑफिसों में, अनेक अखबारों के ऑफिस में बातचीत टेप करने की प्रक्रिया शुरू की थी। यह गैरकानूनी था और निक्सन को इसका नतीजा भुगतना पड़ा।

पर इसकी पृष्ठभूमि इससे बहुत ज्यादा गहरी है। निक्सन और वामपंथी ताकतों की लड़ाई निक्सन के राजनीतिक जीवन का अभिन्न अंग था। अमेरिका वियतनाम युद्ध से अपने हाथ खींचने की तैयारी कर रहा था।

उसी समय व्हाइट हाउस में निक्सन अपनी बेटी की शादी की तैयारियों में भी व्यस्त थे। ठीक जिस दिन यह शादी थी उसी दिन न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने पहले पेज पर एक रिपोर्ट छापी जो अमेरिकी सेना के टॉप सीक्रेट दस्तावेज़ थे और पेंटागन से चुराए गए थे। ये पेंटागन पेपर्स के नाम से जाने जाते हैं।

माना जाता है कि यह टाइमिंग अनायास नहीं थी। निक्सन की सरकार को परेशान करने के अलावा अत्यंत व्यस्त निक्सन को व्यक्तिगत रूप से परेशान करने के लिए बिल्कुल उसकी बेटी की शादी के दिन यह रिपोर्ट छापी गई थी। निक्सन से मीडिया की यह दुश्मनी व्यक्तिगत किस्म की थी।

जवाब में निक्सन ने यह पता लगाने का काम अपने कुछ विश्वस्त स्टाफ को सौंपा कि यह लीक कहाँ से हो रही है। कई रिटायर्ड एफबीआई और सीआईए प्रोफेशनल्स की एक टीम बनाई गई जिन्हें प्लम्बर्स कहा गया क्योंकि इनका काम लीक को रोकना था।

इन्होंने व्हाइट हाउस के अंदर और सभी संवेदनशील ऑफिसों में होने वाली हर बातचीत को टेप करने का काम शुरू कर दिया। इसमें अनेक अखबारों के ऑफिस भी शामिल थे। हर बात पर नज़र रखने और हर बात सुनने जानने की यह उत्सुकता और ज़रूरत यहाँ तक बढ़ गई कि इन लोगों ने डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफिस को भी टेप करने की योजना बना ली जो वाटरगेट कांड के रूप में सामने आया।

हालाँकि निक्सन को चुनाव जीतने के लिए यह सब करने की ज़रूरत नहीं थी। उन चुनावों के दौरान निक्सन आखिरी सप्ताह तक चुनाव प्रचार करते भी नहीं दिखे और अपना सामान्य कामकाज कर रहे थे।

वॉटरगेट कांड को चुनावों से पहले खूब उछालने की कोशिश की गई। लेकिन जनता को यह प्रभावित नहीं कर सका और बिना विशेष प्रचार के निक्सन रिकॉर्ड बहुमत से जीत गए।

लेकिन वॉशिंगटन पोस्ट ने इस मुद्दे को खोदना जारी रखा। इस जाँच में एक एफबीआई डायरेक्टर अंदर की खबरें पोस्ट के रिपोर्टर तक पहुंचाता रहा जिसकी पहचान किसी को काफी समय तक नहीं मालूम थी। उसे पूरी जाँच के दौरान डीप थ्रोट के नाम से जाना गया।

ज्यूडिशरी ने भी इस पूरे मामले में असाधारण रुचि दिखाई और अंत में इस मामले में निक्सन की संलिप्तता सिद्ध करने में सफल हुए। आखिर में निक्सन को इस्तीफा देना पड़ा और अमेरिका के इतिहास के सबसे प्रभावशाली राष्ट्रपति का शानदार कार्यकाल इतिहास में गुमनामी और बदनामी में खो गया।

जंगली कुत्तों के बारे में कहा जाता है कि उनका झुंड शेर का भी शिकार कर लेता है। वामपंथी भी झुंड में शिकार करते हैं। वॉटरगेट कांड इसका प्रमाण है कि कैसे मीडिया वालों, अंदर बैठे सरकारी बाबुओं और अति सक्रिय ज्यूडिशरी ने मिलकर बेहद भारी बहुमत से चुने हुए एक अमेरिकी राष्ट्रपति का शिकार कर लिया। सिर्फ उसे राजनीति से ही नहीं, इतिहास से भी मिटा दिया गया। आज आप निक्सन को और किसी वजह से नहीं, वॉटरगेट कांड की वजह से जानते हैं।

निक्सन का दोष क्या था? उसने कुछ लोगों की बातचीत टेप की थी। यह गैरकानूनी था। पर इसकी तुलना उसके काल के कुछ अन्य अपराधों से कीजिये… पेंटागन से टॉप सीक्रेट दस्तावेज़ चुराकर अखबार में छाप दिए गए, और इसे अपराध नहीं गिना गया। विदेशों की शह पर अपने देश की सेनाओं के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन किए गए और इसे अपराध नहीं गिना गया। अपने देश के दस्तावेज़ चोरी करके रूसियों को बेचते हुए सरकारी अफसर पकड़े गए… हज़ारों कम्युनिस्ट जासूस पकड़े गए… इतिहास में इस प्रकरण की चर्चा कहीं नहीं होती। उनके देशद्रोह के सामने निक्सन का अपराध क्या था? कि उसने उन्हें रोकने के लिए कुछ रास्ते अपनाए जो कन्वेंशनल नहीं थे। और वह इतिहास का खलनायक बन गया।

आपको भारत में भी मीडिया, सरकारी तंत्र और ज्यूडिशरी का यह गठजोड़ दिखाई देता है जो हमेशा देश हित के विरुद्ध काम करता है? मैं हमेशा कहता हूँ, भारत में वामपंथ की हरकतों को समझने के लिए उनके उद्गम को देखिये। अमेरिकी वामपंथ ही वह उद्गम है जहाँ से वामपंथ का यह गंदा नाला बहता है और भारतीय राजनीतिक सामाजिक सांस्कृतिक जीवन को गन्दा कर रहा है।

पुनश्च : निक्सन 1952 में 39 वर्ष की उम्र में उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे. उन पर एक आरोप खूब उछाला गया कि उन्होंने किसी से 18000 डॉलर का फण्ड लिया है। निक्सन ने पूरी बहादुरी और स्पष्टवादिता से इस फण्ड को लेने की बात स्वीकारी और अपने इस तीस मिनट के भाषण में अपना शानदार बचाव किया।

यह भाषण निक्सन की “चेकर्स स्पीच” के नाम से जाना जाता है और राजनीतिक स्पष्टवादिता का बेहतरीन उदाहरण है। अगर आपको राजनीति में रुचि है तो आप इसे मंत्रमुग्ध होकर सुनेंगे। 30 मिनट जिसने अमेरिकी राजनीति की दिशा बदल दी।

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