शुक्र है कि इस युद्ध में मोदी हैं हमारे सेनापति

पिछले कुछ दिनों/ हफ्तों में दुनिया में क्या कुछ हो गया… आपने ध्यान दिया?

सबसे पहले तो अमृतसर में आतंकी हमला हुआ जिसमें 3 मासूम मारे गए और 20 से ज़्यादा घायल हुए।

हमले में जो हैण्ड ग्रेनेड इस्तेमाल हुआ वो पाकिस्तान की एक ordinance Factory में बना है।

इससे पहले इसी 9 नवंबर को रूस में एक अफगान peace summit हुआ जिसे रूस ने आयोजित किया और जिसमें अफगानिस्तान, अफगान तालिबान, भारत, चीन, पाकिस्तान, ईरान, और 5 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस peace summit को अमेरिका की सहमति थी और रूस में अमरीकी राजदूत ने इसमें एक observer के रूप में शिरक़त की।

सबसे महत्वपूर्ण development ये हुई कि कल राज्यपाल महोदय ने जम्मू कश्मीर की विधानसभा भंग कर दी।

अमृतसर आतंकी हमले की प्रारंभिक जांच में इस आशंका की पुष्टि हुई है कि हमलावरों के तार पाकिस्तान की ISI और कश्मीरी militant groups से जुड़े हुए हैं…

उधर बलोचिस्तान में पाकिस्तान की हालत बहुत नाज़ुक है… पिछले हफ्ते बलोचिस्तान के विभिन्न शहरों में पाकिस्तान विरोधी उग्र प्रदर्शन हुए हैं।

रूस में हुए peace summit में पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने ये आरोप लगाया है कि अफगानिस्तान साढ़े तीन लाख बलूच विद्रोहियों को हथियार और ट्रेनिंग दे के तैयार कर रहा है।

ध्यान रहे कि अफगानिस्तान से लगती पाकिस्तान – बलोचिस्तान सीमा एक खुला बॉर्डर है जिसमें एक ही ethnicity की जनसंख्या दोनों तरफ रहती है और खुलेआम आती जाती है… इसी porus border का लाभ उठा के अफगानिस्तान बलूच विद्रोहियों को हथियारों से लैस कर रहा है।

ये सब जानते हैं कि अफगानिस्तान के पीछे किसका हाथ है… उधर अफगान तालिबान पुनः सशक्त और संगठित हो रहे हैं। उनके पास न नए रंगरूटों की कमी है और न funds की… दुनिया भर में पैदा होने वाली कुल अफीम का 90% उत्पादन अफगानिस्तान में होता है और ये पूरा व्यापार तालिबान के नियंत्रण में है।

उधर पाकिस्तान में चलने वाले मदरसों से पढ़े तालिब ही उनके रंगरूट होते हैं। पाकिस्तान नहीं चाहता कि अफगानिस्तान में शांति स्थापित हो, क्योंकि वहां शांति होते ही एक्शन बलोचिस्तान में शिफ्ट हो जाएगा।

आज पाकिस्तान का रोम रोम कर्ज़ में डूबा है और वो दीवालिया होने की कगार पर है। अगर बलोचिस्तान में हालात बिगड़े तो उसे अपनी फौज कश्मीर से हटा के बलोचिस्तान पर लगानी पड़ेगी…

इससे उसकी पकड़ कश्मीर में ढीली पड़ेगी और इतनी औकात उसकी है नहीं कि वो बलूच insurgency को डील कर सके। इसलिए उसने फोकस भारत में पंजाब पर शिफ्ट कर दिया है।

वो पंजाब में कश्मीर के रास्ते घुसने की फ़िराक़ में है।

कश्मीर में महबूबा, काँग्रेस की मिलीभगत से फिर सरकार बनाने के मंसूबे पाल रही थी जो कल मोदी जी ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग कर ध्वस्त कर दिए।

पंजाब में खालिस्तानी/ पाकिस्तानी आतंकवाद से लड़ने के लिए जम्मू काश्मीर पर पकड़ होना बहुत ज़रूरी है।

वैश्विक geo polity में इस रीजन का महत्व बहुत ज़्यादा बढ़ गया है। इस समय दुनिया के सबसे बड़े दो key player चीन और भारत इन दोनों के तार बलोचिस्तान से जुड़े हैं। चीन बलोचिस्तान में CPEC बना के फँस गया है।

इस पूरी GeoPolitical उठापटक की थोड़ी बहुत आंच तो पंजाब तक आनी लाज़मी है। मोदी – अजीत डोभाल की बहुत बड़ी भूमिका है इस पूरी GeoPolitical युद्ध में।

ऐसे में कांग्रेस यदि अजीत डोभाल पर हमलावर है तो बात समझने की है।

शुक्र है कि इस युद्ध में हमारे सेनापति मोदी हैं…

सरल तरीके से समझें सीबीआई का घमासान

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