जोसफ मैक्कार्थी : अमेरिका में वामपंथ से टकराने वाला सबसे महत्वपूर्ण नाम

अमेरिका के वामपंथ के विरुद्ध संघर्ष में कोई अकेला नाम सबसे महत्वपूर्ण है तो वह है सीनेटर जोसफ मैक्कार्थी का।

मैक्कार्थी ने 1950-56 के बीच अमेरिका में कम्युनिस्टों के विरुद्ध जंग छेड़ रखी थी। उन्होंने वामपंथ के विभिन्न घटकों को पहचाना और दावा किया कि कम्युनिस्ट अमेरिकी तंत्र में अंदर तक घुसे हुए हैं।

मैक्कार्थी के इस दावे की बहुत ही तीखी प्रतिक्रिया हुई। सारे सांप बिच्छू बिलबिलाकर बिलों से निकले और मैक्कार्थी पर टूट पड़े। सबने उसे डिस्क्रेडिट करने की मुहिम छेड़ दी। मैक्कार्थी को झूठा और शक्की करार दिया गया।

मीडिया ने स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की दुहाई देनी शुरू कर दी। उसके कदमों को डेमोक्रेसी का होलोकास्ट करार दिया गया। यानी हम जो आज भारत में असहिष्णुता का हल्ला सुन रहे हैं, उससे कई गुना ज़ोर का हंगामा शुरू हुआ।

लेकिन मैक्कार्थी का निश्चय दृढ़ था। आलोचना की ज़रा भी परवाह किये बिना वह अपनी लड़ाई में लगा रहा। उसने हज़ारों संदिग्ध कम्युनिस्टों को पकड़ पकड़ कर पूछताछ शुरू की।

परमाणु और रक्षा प्रतिष्ठान में काम कर रहे अनेक रूसी जासूसों को पकड़ा, विश्वविद्यालयों में घुसे वामपंथियों की नाक में दम कर दिया। अखबारों के संपादक, हॉलीवुड के सितारों, सरकारी दफ्तरों में बैठे बाबुओं पर पुलिस ने नज़र रखना और रास्ते पर लाना शुरू किया।

अमेरिकी वामपंथी गिरोह में भगदड़ मच गयी। कोई भी अछूता नहीं रहा, सबपर नज़र रखी जाने लगी। खुद राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति के अपने स्टाफ भी निगरानी के दायरे में थे।

कम लोग जानते हैं कि बाद में राष्ट्रपति बने और कम्युनिज़्म के कट्टर दुश्मन रोनाल्ड रेगन को भी मैक्कार्थी कमीशन के सामने तलब किया गया था। उस समय रेगन अपने विचारों में लिबरल और डेमोक्रैट हुआ करते थे। और उस समय वे हॉलीवुड की स्क्रीन एक्टर्स गिल्ड के प्रमुख थे।

पर रेगन अपने लिबरल रुझान के बावजूद देशद्रोही नहीं थे। उनसे पूछ ताछ की गयी तो उन्होंने कमीशन से सहयोग करने का निर्णय लिया और अपने साथी कलाकारों के बारे में ज़रूरी जानकारी प्रदान करने के लिए तैयार हो गए।

उस समय रेगन को भी हॉलीवुड में कम्युनिस्ट हरकतों की बात बहुत दूर की कौड़ी लगी होगी। लेकिन जब इस सिलसिले में उन्होंने इस विषय पर आँखें खोल कर देखना शुरू किया तो उनका माथा ठनका। उनके अनेक साथी उन्हें अविश्वसनीय रूप से कम्युनिस्ट सोच से ग्रसित मिले जिनके लिए अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंचाना और देश से विश्वासघात करना एक बड़े उद्देश्य की प्राप्ति का मार्ग लगता था।

इस अनुभव ने रेगन को बदल कर रख दिया और उनके राजनीतिक जीवन को नयी दिशा दी। आगे चलकर हमने रेगन में कम्युनिज़्म के विरुद्ध प्रतिबद्ध एक राजनायक पाया।

पर मैक्कार्थी की राह आसान नहीं थी। उन्होंने मगरमच्छों के जबड़े में हाथ डाल दिया था। इतने बड़े बड़े और प्रभावी शत्रु बना लिए थे कि उनसे निबटना आसान नहीं रह गया था।

अमेरिका में सैन्य सेवा अनिवार्य थी। मैकार्थी ने स्वयं द्वितीय विश्व युद्ध लड़ा था और मेजर के पद तक गए थे। हालाँकि उन्हें अपनी जुडिशल सर्विस की वजह से सैन्य सेवा से छूट मिली हुई थी, फिर भी मैक्कार्थी ने विश्वयुद्ध के लिए वॉलंटियर किया था। पर जब मैक्कार्थी ने सीआईए और सेना में कम्युनिस्ट घुसपैठ की बात की और सेना के उच्च अधिकारियों की संलिप्तता की जांच करनी चाही तो यह उन्हें महंगा पड़ गया।

उस समय मैक्कार्थी ने डेविड शाइन नाम के एक युवक की मदद करनी चाही। शाइन एक होटल की चेन का मालिक था। उसी दौरान डेविड शाइन ने एक छोटी सी पुस्तिका लिखी थी – ‘डेफिनिशन ऑफ़ कम्युनिज़्म’ जिसमें उसने कम्युनिज़्म के खतरों के बारे में आगाह किया था। शाइन के होटल के हर कमरे में उस पुस्तिका की एक कॉपी रहती थी। जब यह पुस्तिका मैक्कार्थी की दृष्टि में आयी तो वह उसके इस प्रयास से बहुत प्रभावित हुआ।

शाइन ने अनिवार्य सैनिक सेवा एक सामान्य सिपाही ‘प्राइवेट डेविड शाइन’ के रूप में जॉइन की। पर अपनी कम्युनिस्ट विरोधी राजनीतिक विचारधारा और मैक्कार्थी से परिचय की वजह से शाइन संभवतः शक की नज़र से देखा जाने लगा और उसे मैक्कार्थी का आदमी मान लिया गया।

यह बात उसके कुछ वरीय सैन्य अधिकारियों को अखर गयी और शाइन की गर्दन उनकी मुट्ठी में आ गयी। इस बीच मैक्कार्थी ने अपने स्टाफ की मार्फ़त शाइन को अफसर बनाने की सिफारिश कर दी जहाँ उसकी बौद्धिक क्षमता का पूरा प्रयोग हो सके।

सेना के अधिकारियों ने इस बात का पूरा बखेड़ा खड़ा कर दिया कि मैक्कार्थी सेना के काम काज में दखल देना चाहते हैं और वे सेना को तोड़ देने की धमकी दे रहे हैं। दुश्मन तो मैक्कार्थी के थे ही। तो यह बात कांग्रेशनल कमिटी तक गयी और पूरे देश के सामने मैक्कार्थी की पेशी हुई।

मैक्कार्थी ने सेना पर यह आरोप लगाया कि सैन्य अधिकारी कम्युनिस्ट गतिविधियों में संलिप्त होने की जांच के डर से घबराये हुए हैं और इस छोटे से मुद्दे को उछाल कर मैक्कार्थी पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिस से वह अपनी जाँच ढीली कर दे।

36 दिनों तक मैक्कार्थी ने पूरे देश की मीडिया, कांग्रेस और सैन्य संस्थानों का दृढ़ता से सामना किया और सिर्फ जवाब ही नहीं दिया बल्कि तीखे सवाल किये जिनका जवाब देना मुश्किल हो रहा था। लेकिन व्यवस्था में बैठे मगरमच्छों ने मैक्कार्थी से पीछा छुड़ाने का फैसला कर लिया था।

मैक्कार्थी के विरुद्ध सीनेट ने निंदा प्रस्ताव पास किया और इस झटके से वह राजनीतिक रूप से कभी नहीं उबर सका। उसकी लोकप्रियता, सर्वमान्यता और राजनीतिक प्रभाव कम हो गया था लेकिन कम्युनिज़्म के विरुद्ध उसके तेवर धीमे नहीं हुए।

तीन वषों के भीतर, सिर्फ 48 वर्ष की आयु में वह मेरीलैंड के सैनिक हस्पताल में भर्ती हुआ जहाँ कुछ दिनों के भीतर ही उसकी रहस्यमय रूप से मृत्यु हो गयी। उसका लिवर बुरी तरह से खराब पाया गया, जिसके लिए मीडिया ने अल्कोहल को दोषी घोषित किया, हालाँकि वह उस समय तक बिलकुल स्वस्थ था।

उसकी मृत्यु के लिए अनेक कांस्पिरेसी सिद्धांत दिए गए, जिनमें इसे एक सुनियोजित हत्या बताया गया। पर इसमें शक नहीं है कि मैक्कार्थी की राजनीतिक हत्या बहुत पहले हो चुकी थी।

दुनिया का सबसे बड़ा साम्राज्य है वामपंथी पॉलिटिकल करेक्टनेस

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