NOTA : वेश्या की परीक्षा

किसी राजा के राज्य में एक मंत्री और वेश्या ने मिलकर एक ऐसी योजना बनाई जिसके माध्यम से कमज़ोर चरित्र वाले लोगों की पहचान होती रहे और राजकाज चलाने हेतु उन्हें श्रेष्ठ लोग उपलब्ध होते रहे।

योजना के अनुसार राजकाज में सेवक बनने के इच्छुक प्रत्येक व्यक्ति को एक लंबा रास्ता तय करना होता था।

एक जगह पर वह मार्ग एकाकी हो जाता था। एकाकी से तात्पर्य यह है कि वह इतना संकरा हो जाता था कि उसमें व्यक्ति अकेला ही चल सकता है, एक व्यक्ति ही चल सकता है, उसमें अंधेरा रहता था, तथा उस को जाते हुए कोई देख भी नहीं सकता था।

जहां पर ऐसा पॉइंट था वहां बाईपास में एक संकरा रास्ता और निकलता था, और वह सीधा वेश्या के शयनकक्ष तक पहुंचता था। जहां वेश्या सज धज कर बैठी रहती थी!!

जो भी व्यक्ति राज दरबार में नौकरी पाने का इच्छुक होता वह अपने घर से रवाना होता, ज्यों ही, एकाकी पॉइंट पर आता, वेश्या के शयन कक्ष का दरवाजा देख एक क्षण ठिठकता!

जो लक्ष्य के प्रति एकनिष्ठ लोग होते, वे तो तुरंत सीधे चले जाते, और राज्य सेवा का अवसर प्राप्त कर लेते लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते जो सोचते यहां हमें देख कोई नहीं रहा है, इतनी दूरी तक आ गए हैं, भोगेच्छा प्रबल है, उसके बारे में दुनिया में उड़ती बातों से वे पहले ही अभिभूत थे, तो क्यों न मन की इच्छा पूरी कर ले?

निर्णायक क्षणों में ज़रा जरा सी कमज़ोरी आई कि वे वेश्या के दरवाज़े की ओर मुड़ जाते थे! इस प्रकार से जिन लोगों में धैर्य और संयम नहीं होता था उनका परीक्षण होता। राजकाज चलाने हेतु अयोग्य छंट जाते और योग्य लोग उपलब्ध रहते।

तब ऐसे असंयमी और अधीर लोग, जो कि वेश्या की शरण में जाते उन्हें वेश्या के संरक्षण में एक विशेष प्रकार की शिक्षा देकर राज्य से बाहर किया जाता। फुसलाकर शत्रु देश में बसाया जाता। नकारात्मक लोग, अपने जैसे और व्यक्ति तैयार करते।

धीरे-धीरे शत्रु देश में ऐसे परस्त्रीगामी, कामुक लोगों की जनसंख्या बढ़ गई! शत्रु देश का जनसंख्या अनुपात बिगड़ने लगा! नैतिकता और सदाचार समाप्त हो गया। तब मंत्री की सलाह अनुसार राजा ने उस राज्य को भी सरलता से जीत लिया।

वर्तमान में चुनाव में जो नोटा की प्रक्रिया की गई है, वह ऐसी ही है। ज्योंही व्यक्ति मतदान कक्ष में पहुंचता है, जो
1. मैकाले कुपढ हैं,
2. मीडिया को अपना मन दे चुके हैं,
3. विज्ञापन देखकर वस्तु खरीदते हैं,
4. अपनी बुद्धि गिरवी रख चुके हैं,
5.सरकार बनाने की अपनी सहभागिता से परांगमुख, आत्मविस्मृत हैं,
6. स्टॉकहोम सिंड्रोम, फूफा सिंड्रोम और मुर्गी सिंड्रोम से रुग्ण हैं,
उनका धीरज डोल जाता है। मन का नियंत्रण समाप्त हो जाता है। सामने नोटा देख अनायास ही उनकी उंगली नोटा पर चली जाती है।

मगर, एक खास तरह के लोग इस जाल में कभी नहीं फंसते! नोटा इस बात का सर्वे है कि आपके यहाँ ऐसे कमज़ोर मनोवृत्ति वाले कितने हैं?
सावधान रहिए, *उपलब्ध में से बेस्ट* को चुनिए! वोट देने जरूर जाएं। हर किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता। मनपसंद उम्मीदवार नहीं दिखे तो भी नोटा का कभी चयन ना करें। यह आत्मघाती है।

नोटा का सिक्का क्यों है खोटा?

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