पंच परमेश्वर : पद बदलने से बदल जाती है ज़िम्मेदारियां

भारत में जो पीढ़ी आज युवा कहलाती है उनसे लेकर, पुरानी पीढ़ी के वो लोग जो आज बुजुर्गों की श्रेणी में रखे जाते हैं उन तक…शायद ही कोई ऐसा हो जिसने मुंशी प्रेमचंद की कहानी “पञ्च परमेश्वर” ना पढ़ी हो….

पंच परमेश्वर दो मित्रों की एक प्रसिद्ध कहानी है। अलगू चौधरी और जुम्मन शेख की दोस्ती की कसमें खाने वाला गाँव उनकी दुश्मनी से तब दो-चार होता है जब जुम्मन और उसकी खाला, जमीन के मामले को पंचों के सामने ले जाते हैं, जुम्मन अपने मामले में अलगू को सरपंच चुनता है, पर अलगू न्याय के मामले में अपने सबसे प्रिय मित्र जुम्मन को भी छूट नहीं देता है।

वह जुम्मन के विरुद्ध फैसला करता है जिसके कारण उन दोनों की मित्रता टूट जाती है और वे एक दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं। कुछ समय बाद अलगू का एक मामला पंचों के सामने आता है इस बार अलगू जुम्मन को सरपंच चुनता है। सरपंच बनने और न्याय की गद्दी पर बैठकर जुम्मन की समझ में आता है कि अलगू ने जो किया था वह सही था।

न्याय की गद्दी पर बैठकर पक्षपात करना किसी के लिए संभव नहीं है। एक आदर्श न्यायाधीश सबको समान रूप से देखता है। वो न्यायाधीश के रूप में पीड़ित लोगों के लिए भगवान के समान होता है और इस तरह आदर्श से शुरू हुई कहानी आदर्श पर समाप्त होती है।

अब आप सोच रहे होंगे कि कहानी रुपी इस भूमिका की इस लेख में क्या आवश्यकता है… तो बात यूँ है कि जब-जब देश में चुनावी सरगर्मियां बढती हैं एक सवाल जो मोदी विरोधियों की ज़बान पर सबसे ज्यादा जगह पाता है वो है कि “मोदी अब वो मोदी नहीं रहे” जिसका सब्ज़बाग दिखा कर वो सत्ता में आये थे।

मोदी विरोधी वो पुराने वीडियो दिखा कर जिसमें मोदी “एक सिर के बदले चार सिर” या “ये पाकिस्तान को लव लेटर लिखना बंद होना चाहिए” अगर “मैं सत्ता में आया तो भ्रष्टाचारी सलाखों के पीछे होंगे” जैसी गर्जना करते दिखते हैं, इन वीडियो को देख कर मोदी भक्तों का गला सूखने लगता है और मोदी आलोचक हँसते हुए कहता है… अबे तुम्हारा मोदी भी फुस्सी बम निकला, इसी की दम पर गरजते थे… फिर वो दनादन कुछ सवाल और पूछता है “राम लला अभी भी टेंट में हैं, क्या कर लिया तुम्हारे मोदी ने? माल्या और नीरव मोदी विदेश में मौज कर रहे हैं, क्या कर लिया तुम्हारे मोदी ने? सबरीमला पर फैसला आ गया, क्या कर लिया तुम्हारे मोदी ने? मोमता दीदी ने सरे आम हिन्दू कटवा दिए, क्या कर लिया तुम्हारे मोदी ने? कंगलादेशी तुम्हारी छाती पर होरा भूंज रहे हैं, क्या कर लिया तुम्हारे मोदी ने? मी लार्ड ने अयोध्या मामला फिर लटका दिया, क्या कर लिया तुम्हारे मोदी ने?

इन सवालों का एक आम मोदी भक्त के पास कोई जवाब नहीं होता, बेचारा मुंह लटकाए चुपचाप सुनते रहने के सिवा कुछ नहीं कर पाता और फिर वो इन सवालों पर जब एकांत में अपने आप से विमर्श करता है तो पाता है कि क्या इसी सबके लिए ही उसने साहेब को वोट दिया था? उसकी आस्था डिगने लगती है उसे लगने लगता है कि जब इनको भी वही करना था जो उनके पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री करते रहे हैं तो उनमें और मोदी में क्या अंतर है?

वो अपने आप को ठगा हुआ महसूस करता है और मन ही मन अगले चुनावों में नोटा का लोटा चमकाने के बारे में गंभीरता से सोचने लगता है। अब सवाल ये है कि हम दरअसल मोदी से चाहते क्या थे? हम मोदी से चाहते थे कि प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही एक रात मोदी नेशनल टेलिविज़न पर प्रगट होते और कहते कि मेरे प्यारे देशवासियों मैं नरेंद्र दामोदर दास मोदी… आज, अभी और इसी समय से देश में इमरजेंसी लगाए जाने की घोषणा करता हूँ, इतना ही नहीं इसके साथ ही देश में रह रहे सभी मुसमानों और ईसाई विधर्मियों को एक सप्ताह के भीतर देश छोड़ देने का हुक्म भी देता हूँ। आज, अभी और इसी समय से भारत एक हिन्दू राष्ट्र के रूप में जाना जाएगा, जिसकी राष्ट्र भाषा हिंदी होगी। वन्दे मातरम् हमारा राष्ट्रगान होगा… RSS के भगवा ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप मान्यता दी जाएगी। कल सुबह ही मैं अयोध्या जाकर भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन करूँगा, राम मंदिर के निर्माण के साथ ही देश भर में निर्मित मस्जिदों और चर्चों को गिरा कर उनकी जगह मंदिरों के निर्माण की महत्वाकांक्षी परियोजना का भी शुभारम्भ होगा। भाइयों और बहनों मुझे आपको यह बताते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि तत्काल प्रभाव से कश्मीर से धारा 370 हटाई ली गई है और देश में सामान नागरिक संहिता लागू कर दी गई है, देश में विगत 70 वर्षों से लागू जातिगत आरक्षण को भी तत्काल प्रभाव से समाप्त दिया गया है.. मितरों मैं आपको ये खबर देते हुए गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ कि कल रात RAW के एजेंट्स ने पाकिस्तान में हाफिस सईद, ज़कीउर्र रहमान लखवी, मसूद अजहर, सैयद सलाउद्दीन और दाउद इब्राहीम को मौत के घाट उतार दिया है। भाइयों-बहनों मेरे राष्ट्र के नाम इस सन्देश के ख़त्म होते-होते स्विस बैंक में जमा सारा काला धन वापस आ चुका होगा, धीरज बनाए रखिये ‘INR 15,00000/- credited to your a/c No.’ का मैसेज भी आपके फ़ोन पर आता ही होगा।

यकीन मानिए ये सब पढ़ कर आपको जितना आनंद आ रहा है लिखते वक्त मुझे भी उतना ही आनंद आया था पर मैं भी और आप भी… अच्छी तरह से जानते हैं कि ये सब पढ़ने और लिखने में जितना आसान है, करना लगभग असंभव…. मोदी ने बतौर मुख्यमंत्री जो कुछ कहा उसका हिसाब उनके प्रधानमंत्री बनने पर माँगना उनके साथ ज्याद्दती होगी, जब हम विपक्ष में होते हैं तब हमें सिर्फ कहना होता है उसे पूरा करने की ज़िम्मेदारी हम पर नहीं होती है, पर सत्ता में आते ही हमें बदलना पडता है, पूर्व में आप भले ही हिंदुत्व के ध्वज वाहक रहे हों पर तब आपको “सबका साथ सबका विकास” की बात कहनी पड़ती है क्योंकि यही आपसे अपेक्षित है।

ऊपर लिखी बातों में से संभव है बहुत सी बातें पूरी नहीं हुई पर फिर भी मैं मोदी को भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री मनाता हूँ। क्योंकि उन्होंने घुटनों पर रेंगते भारत को अपने पैरों पर दौड़ना सिखाया है, पर अगर आप उनसे शीर्ष पर बैठकर पक्षपात की उम्मीद पाले बैठे है तो ये आपकी मूर्खता है सनातन का युद्ध सनातनियों को ही लड़ना होगा ये काम आपके और कोई नहीं कर सकता.. मोदी ने वही किया है जो अलगू चौधरी और जुम्मन शेख ने किया था। मौका मिला तो आप और हम भी वही करेंगे क्योंकि सत्ता व्यक्तिगत कुंठाओं की प्रतिपूर्ति का साधन नहीं है वो आपको सीमित से असीमित हो जाने का अवसर देती है… आप मोदी को फिर चुनें या ना चुनें.. पर वो इतिहास रच चुके है आगे आने वाले प्रधानमंत्रियों की राह बहुत कठिन है क्योंकि अब इतिहास उन्हें “मोदी पूर्व” और “मोदी बाद” के मानक पर ही तौलने वाली है।

मैं नरेंद्र मोदी हूं! आप नरेंद्र मोदी हैं, हम सब नरेंद्र मोदी हैं

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