जापान, लव इन टोक्यो : जब गेस्ट हाउस के मालिक ने हमें बाहर निकाल दिया!

टोक्यो में आधुनिक और पारंपरिक जापान से परिचय करने के बाद हम कावागुची-को – जो माउंट फ़ूजी के पास इसी नाम की झील के किनारे स्थित एक छोटा सा क़स्बा है – की ओर चल दिए. इस कस्बे से फ़ूजी पर्वत – जो जापान का भव्य प्रतिनिधित्व करता है – का सर्वश्रेष्ठ दृश्य मिलता है. इस शिखर को स्थानीय लोग द्वारा फ़ूजी-सान कहते हैं.

जापान में किसी के नाम के बाद सान लगाना सम्मान का सूचक है, जैसे हमारे यहाँ नाम के बाद “जी” लगा देते है. उदाहरण के लिए, अयोध्या जी, अटल जी या वाजपेयी जी, तीनों अभिव्यक्ति सम्मान का सूचक है.

टोक्यो से चलते समय रास्ते में ट्रेन बदलनी थी क्योंकि फ़ूजी पर्वत के लिए एक प्राइवेट लाइन की ट्रेन चलती है और उसके लिए टिकट खरीदना था. चूंकि ट्रेन छूटने वाली थी अतः जल्दी से कैश देकर टिकट खरीदा क्योंकि वह क्रेडिट कार्ड नहीं लेते थे.

ट्रेन के आखिरी डिब्बे में चढ़ने के बाद मैंने रियालाईज़ किया कि टिकट वाले ने हम से एक हज़ार येन अधिक चार्ज कर लिया था. इस उधेड़बुन में था कि ट्रेन छोड़कर पैसा वापस लिया जाए या आगे निकल ले. तभी देखा तो टिकट विंडो वाला क्लर्क दौड़ता हुआ आ रहा था और जल्दी से उसने मेरे आगे बढ़ाएं हुए हाथ में कुछ पैसे रख दिए. देखा तो एग्जैक्ट उतना ही पैसा था जो मैं ज्यादा देकर आ गया था.

हम अपने भ्रमण के दौरान यथासंभव छोटे होटल, गेस्ट हाउस या निजी मकान मालिकों के घर में रुकना पसंद करते हैं. इसके दो लाभ हैं – एक तो लोकल फ्लेवर मिलता है; दूसरा, स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़े लोगों के पास पैसा जाता है, ना कि किसी मल्टीनेशनल चेन के पास. वैसे भी सभी मल्टीनैशनल चेन के होटल एक जैसे होते हैं.

कावागुची-को में हमने तेप्पई-सान द्वारा संचालित एक छोटे गेस्टहाउस में रूम बुक किया था और गेस्टहाउस में प्रवेश तीन बजे निर्धारित था. जब हम गेस्टहाउस निर्धारित समय से पहले पहुंच गए तो तेप्पई-सान वहां नहीं थे तथा मुख्य प्रवेश द्वार बंद था. किसी अन्य अतिथि ने हॉल के किनारे स्थित बड़े से शीशे के दरवाजे से हमें देखा और अंदर बुला लिया.

हम अपने सामान को वहां छोड़कर दोपहर के भोजन के लिए चले गए और दो बुजुर्ग महिलाओं द्वारा संचालित एक घरेलू रेस्तरां में बैठ गए. उन महिलाओ की मदद उनकी किशोर नाती या पोती कर रही थी.

हमने मसालेदार मीज़ो सूप में कद्दू और शकरकंद के साथ हाथ से काटे गए नूडल्स – होतो नूडल्स – का आर्डर दिया. भाषायी समस्या के कारण नूडल के तीन बड़े कटोरे आ गए. स्वादिष्ट होने के बावजूद बड़ी मुश्किल से पूरा भोजन समाप्त कर पाए.

उसी समय रेस्तरां में पर्यटकों का एक बड़ा समूह आया, लेकिन उन बुजुर्ग महिलाओं ने, पता नहीं क्यों, उन्हें चलता किया. स्वादिष्ट होतो नूडल्स से जबरजस्त पेट भरने के बाद हम वापस गेस्टहाउस गए. हमें आशा थी कि तेप्पई-सान तब तक वापस आ गए होंगे और वह हमें चेक इन करके रूम दे देंगे.

गेस्ट हाउस में घुसते ही तेप्पई-सान ने हमें बाहर निकाल दिया. कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि उनका व्यवहार ऐसा क्यों है और हम गेस्ट हाउस के बाहर खड़े होकर शीशे के दरवाजे से अंदर की तरफ देख रहे थे. तेप्पई-सान तुरंत कहीं से झाड़ू-पोछा लेकर आए और पूरे हॉल में झाड़ू-पोछा लगाया और फिर हमें अपने जूते बाहर के कमरे में छोड़ कर अंदर प्रवेश करने के लिए कहा.

हमें तुरंत समझ में आ गया कि जापान में सबसे बड़ा अपराध किसी घर में जूता पहन कर प्रवेश करना है. जहां भी हम जापान में गए, वहां हमें बताया गया कि घर के लिए एक तरह की चप्पल है, बाथरूम जाने के लिए दूसरी तरह की. घर के अंदर पहनने वाली चप्पल कई साइज में बाहर के कॉरिडोर या कमरे में उपलब्ध होती है और आप अपनी साइज की चप्पले चुन सकते हैं.

हमें माउंट फ़ूजी के दृश्य के साथ रूम मिला. कुछ ही देर में हम फ़ूजी-सान के शानदार दृश्य का आनंद लेने के लिए झील के किनारे पहुंचे. हम बहुत भाग्यशाली थे क्योंकि बादल का एक भी कतरा आकाश में नहीं था और नीले आकाश के तले फ़ूजी-सान का अद्भुद दृश्य था. नहीं तो अधिकतर समय फ़ूजी-सान बादलों के पीछे पूर्णतया या आंशिक छिपे रहते हैं.

यहां हमने बहुत समय बिताया और कई तस्वीरें लीं. सूर्यास्त होने के समय झील के किनारे हवा तेज हो गयी थी और ठंडक बढ़ने लगी थी. अतः हमने वापस लौट कर किसी रेस्त्रां में भोजन का निर्णय लिया.

आश्चर्य, तेप्पई-सान ने कार में हमें अपने फेवरिट रेस्त्रां में छोड़ने का ऑफर दिया और कहा कि अगले दिन वह हमें माउंट फूजी का दर्शन पास की पहाड़ियों से कराएंगे और 5 बजे सुबह तैयार होने को कहा.

फुजि सान जाने वाली ट्रेन

लेकिन अगले दिन जब हम उनके साथ पहाड़ियों पर गए तो फ़ूजी-सान बादलों के पीछे आंशिक रूप से छुपे थे. लेकिन फिर भी प्रातः काल की किरणों में एक भव्य दृश्य मिल रहा था. तेप्पई-सान हमारे लिए गर्म चाय और कॉफी भी लाए थे जिससे हमें पिकनिक का एहसास हो. बाद में हम पहाड़ से उतरे और माउंट फूजी के दर्शन झील के पानी में किया. तेप्पई-सान हमें झील के किनारे कई जगह पर ले गए जिससे हमें माउंट फूजी का जल में परफेक्ट प्रतिबिंब मिल सके.
मिशन पूरा हुआ, तेप्पई-सान ने हमें स्टेशन छोड़ने का निर्णय लिया.

हमें समझ में आ गया कि तेप्पई-सान ने हमारे ऊपर इतनी कृपा क्यों दिखाई. एक तरह से वे अपने व्यवहार का पश्चाताप कर रहे थे और इसीलिए उन्होंने अपनी निजी कार से हमें बीसियों किलोमीटर फ्री में घुमाया. यह है जापानी आतिथ्य-सत्कार.

और हम अपने बहुप्रतीक्षित गंतव्य की ओर अग्रसित हुए.

जापान भ्रमण का पहला भाग पढ़ने के लिए इस पर क्लिक करें

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