रसूलन बी की सुविधाजनक यात्रा ही है मोदी सरकार के डिजिटल इंडिया की जीत

मोदी सरकार ने कई बातों को डिजिटल इंडिया से जोड़ा। जिन्होंने सोशल नेटवर्किंग साइट का इस्तेमाल महज राजनीति के लिए किया वह कभी समझ ही नहीं पाए कि यह आम आदमी की परेशानियों को सरकार तक पहुंचाने का कितना बड़ा जरिया हो सकता है।

मोदी सरकार का डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देना शायद आम आदमी को सीधे सरकार से जोड़ने का एक प्रयास ही है। मुझे इस बात का एहसास कल अपने एक छोटे से प्रयास से हुआ।

मेरे एक पत्रकार मित्र जो कि गाजीपुर से दिल्ली ट्रेन की यात्रा कर रहे थे, ने परमवीर चक्र प्राप्त शहीद अब्दुल हमीद की 90 वर्षीय पत्नी को जब आरएसी सीट पर देखा तो वह वेदना से भर गए। बात सिर्फ रसूलन बी (शहीद की पत्नी जिनकी उम्र 90 वर्ष है) को सीट दिलवाने की नहीं थी, दरअसल मेरे साथी या कोई अन्य सहयात्री बड़े आराम से अपनी सीट उन्हें दे सकते थे और ऐसा कई लोग करने को तैयार भी थे लेकिन महत्वपूर्ण मसला था 90 वर्षीय शहीद की पत्नी को क्या हमारा सिस्टम पहले से ही सीट मुहैया नहीं करा सकता था?

प्रथम दृष्टया मामला कहीं ना कहीं रेलवे की अनदेखी का दिखाई पड़ता है इसी वजह से मैंने एक ट्वीट मनोज सिन्हा और पीयूष गोयल के साथ साथ पीएमओ को टैग करते हुए किया इस तरह की खबरें मैंने पहले भी कई बार देखी थी जब ट्वीट की वजह से आम आदमी की आवाज मंत्रियों तक पहुंची।

मैं अपने ट्वीट को लेकर आश्वस्त नहीं था कि कोई मेरा ट्वीट देखकर इस छोटी सी घटना पर संज्ञान ले सकता है। लेकिन महज 20 से 25 मिनट में ही मेरे पास एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप पर मैसेज आया मुझसे पूछा गया कि मैं ट्रेन की और जिस बोगी में यह बुजुर्ग महिला मौजूद है उसकी जानकारी दूं।

तुरंत मैंने वह जानकारी उस नंबर पर भेज दीं। मुझे बाद में ज्ञात हुआ कि यह रेलवे के एक सीनियर अधिकारी का नंबर था उन्होंने मेरे बारे में कुछ साथी पत्रकारों से जानकारी ली और मेरा नंबर हासिल किया जिसके बाद उन्होंने सीधे मुझे कॉल किया। उन्होंने मुझसे पूरी घटना के बारे में जानकारी ली और आश्वासन दिया कि लखनऊ पहुंचते पहुंचते बुजुर्ग महिला को उनकी सीट मुहैया करवा दी जाएगी।

कई लोगों ने प्रश्न उठाए कि क्या सिर्फ एक बुजुर्ग महिला को सीट मिल जाने भर से बात पूरी हो जाती है या क्या पूरा रेलवे का सिस्टम सुधर जाता है? यह प्रश्न वाजिब है लेकिन इस प्रश्न की वजह से हमें जो कुछ अन्य महत्वपूर्ण जवाब मिल रहे हैं उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

पहला जवाब यह कि अगर किसी एक की भी परेशानी दूर होती है और सिस्टम किसी सामान्य ट्वीट पर इस तरह की तत्परता दिखाता है तो इससे यह साफ होता है कि आम आदमी को अपनी आवाज पहुंचाने का यह सरकार पूरा पूरा मौका देती है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि रेलवे के सिस्टम में सुधार की बहुत गुंजाइश है और यूं भी बुजुर्गों को या अन्य जरूरतमंद लोगों को सम्मान और सुविधाएं मुहैया करवाई जानी चाहिए, इसके बावजूद वर्तमान दौर में जिस तरह से डिजिटल इंडिया के प्लेटफार्म का इस्तेमाल गवर्नेंस के लिए किया जा रहा है वह काबिले तारीफ है।

मैं तहे दिल से प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय रेलवे का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मेरे ट्वीट पर त्वरित कार्यवाही करते हुए रसूलन बी को सीट मुहैया करवाई यह बात यहीं खत्म नहीं होती है हम सब कितने जागरूक हैं अपने अधिकारों को और अपने आसपास रहने वाले लोगों के अधिकारों को लेकर यह हमें तय करना है।

विश्वास जानिए यदि आप पूरी तरह से जागरूक हैं और अपनी आवाज को सचमुच सरकार के सामने रखने की इच्छा शक्ति रखते हैं तो आप की आवाज सरकार तक जरूर पहुंचेगी। मुझे यह भी विश्वास है कि यदि आवाज सरकार तक पहुंची तो सरकार वाजिब कदम उठाते हुए न्याय संगत फैसले लेगी जैसा कि इस छोटे से मसले में भी पूरे तंत्र ने किया है।

बात छोटी सी घटना की नहीं है एक उदाहरण की है और यह उदाहरण बताता है कि प्रधानमंत्री मोदी सचमुच डिजिटल इंडिया को गुड गवर्नेंस से जोड़ने के एक अच्छे प्रयास में लगे हुए हैं उन्हें इसके लिए बधाई देता हूं।

याद रहेगा ना “अखण्ड भारत” उद्देश्य है हमारा, केवल सोशल मीडिया पर भगवा झंडे वाली फोटो लगाना नहीं

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