किकोड़ा : खेक्सी खाइए, सेहतमंद रहिए

खेक्सी के कई अन्य नाम भी हैं। इसे चठैल, काकोड़ा, कंटोला और जंगली करेला भी कहते हैं। इसका स्वाद खट्टा होता है। इसलिए इसे खट्टा करेला भी कहते हैं।

खेक्सी को अच्छी तरह से धोकर एक खेक्सी के लगभग 6-8 टुकड़े कर लें। कड़ाही में घी गरम करें। उसमें जीरे का छौंक लगाएं। फिर खेक्सी उसमें डालकर उसे अच्छी तरह फेंट लें। मसालें व नमक स्वाद के अनुसार मिलाएं। इसे ढँक कर रख दें।

अच्छी तरह पक जाने पर गरम गरम रोटी के साथ खाएं। प्याज का क्षारीय गुण होता है, जो इसकी अम्लीयता को कम करती है। इसलिए इसका प्याज के साथ मेजन ठीक बैठता है। प्याज और खेक्सी की भुजिया बहुत रुचिकर होती है। इसकी तरीदार सब्जी भी बनाई जाती है।

यह बरसात के मौसम में बहुतायत में होता है। इसकी बेल होती है, जिसे सहारा देकर छत या लकड़ी के ठट्टर पर चढ़ाया जाता है। भारत के अतिरिक्त इसकी खेती अब पूरे विश्व में होने लगी है। इसका वानस्पतिक नाम मोमोकार्डिया चेरेंशिया है। इसे अंग्रेजी में स्पाइनी गार्ड कहते हैं।

खेक्सी का अचार भी बनता है। खेक्सी से रक्त प्रवाह, खांसी, बावासीर, आंखों की समस्या, कैंसर और मधुमेह के रोगों से आराम मिलता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, फाइबर और ढेर सारे खनिज पाए जाते हैं।

खेक्सी की सब्जी की मांग ज्यादा और उत्पादन कम है। इसलिए कहीं कहीं यह 200/- किलो तक भी बिकती है। इसके फायदे को देखते हुए हर आदमी को इसकी खेती करनी चाहिए। शहरों में भी इसे गमलों में रोपित कर इसकी लता छत पर चढ़ाई जा सकती है।

शहर तो ऐसे ही बदनाम है। यदि हम थोड़ा सा उद्यम करें तो शहर में भी गांव को उतारा जा सकता है। फिर किसी को यह कहने की जरुरत नहीं पड़ेगी –

है अजीब शहर की ज़िंदगी,
न सफर है न कयाम है।
कहीं कारोबार सी दोपहर,
कहीं बदमिजाज सी शाम है।

– Er S D Ojha

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