उन्हें भारत की हार में मज़ा था और इन्हें हिंदुओं की हार का इंतज़ार है

1998 कलकत्ता टेस्ट मैच। भारत विरुद्ध पाकिस्तान।

पहली पारी में सचिन तेंडुलकर को यॉर्कर पर बोल्ड करने के बाद दूसरी पारी में दूसरा रन लेने के लिये आ रहे सचिन का रास्ता शोएब अख्तर ने जानबूझकर रोका।

सचिन ने उसकी टाँगों के बीच से बैट घुसाकर क्रीज़ में बैट रखने की कोशिश की लेकिन नही पहुँच पाए। खुद की गलती होते हुए भी अख्तर ने रन आउट की अपील की। नतीजा.. सचिन रन ऑउट।

दर्शकों ने हूटिंग कर, शोर मचाकर मैच रुकवा दिया। सचिन को भी बड़ा गुस्सा आया। उन्हें वसीम अकरम से उम्मीद थी कि वो इस गलती को ठीक करेगा और उन्हें बैटिंग के लिये वापस बुलायेगा।

पाकिस्तान की टीम मीटिंग हुई और अकरम ने सचिन को वापस नहीं बुलाया। बुलाता भी क्यों? पाकिस्तानियों को सचिन से कोई मतलब नहीं था, उन्हें तो मतलब सिर्फ भारत को हराने सा था।

सचिन की जगह अगर कोई पुछल्ला बल्लेबाज़ भी होता तो भी पाकिस्तानी उसे वापस नहीं बुलाते क्योंकि वो पाकिस्तान के लिये सिर्फ एक क्रिकेट मैच नहीं था… दुश्मन से क्रिकेट मैच था। सचिन को बैटिंग के लिये वापस बुलाकर उन्हें महान होने का तमगा नहीं चाहिये था… उन्हें तो बस भारत को हराना था।

पाकिस्तान का मोटिव साफ रहता है… हिन्दुस्तान की हार। चाहे उसके लिये सचिन का रास्ता रोकना पड़े या राहुल द्रविड़ को रनर देने से मना करना पड़े। POK चीन को देना पड़े या कश्मीर मुद्दा ‘यूनाइटेड नेशंस’ में ले जाना पड़े। अरुंधति राय को खरीदना पड़े या मणिशंकर अय्यर को पुचकारना पड़े। उनका लक्ष्य सिर्फ एक है… भारत की हार।

काँग्रेस का शुरू से एक ही लक्ष्य रहा है… हिंदुओं को तोड़ना और हिंदुओं की हार। चाहे उसके लिये महाराणा प्रताप को गाली देना पड़े या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाने का वादा घोषणा पत्र में शामिल करना पड़े।

अगर आपको लगता है कि संघ पर प्रतिबंध की बात से काँग्रेस का मतलब सिर्फ उन शाखाओं से है जिसमें स्वयंसेवक जाते हैं या खाकी पेंट – सफेद शर्ट पहने संघियों से है, तो आप या तो बहुत भोले हैं या महा बेवकूफ।

संघ पर निशाना साधने से मतलब हर राष्ट्रवादी पर निशाना साधना है।

संघ पर पाबंदी से मतलब हिंदूहित के इकलौते संगठन पर पाबंदी लगाकर हिंदुओं को संगठन विहीन करना है।

संघ पर प्रतिबंध से मतलब भाजपा के हर उस वोटर पर प्रतिबंध लगाना है जो संघ की शाखा में तो नहीं जाता लेकिन संघ का सम्मान करता है।

संघ पर बैन लगाने का मतलब मौलवियों और चर्च को खुला मैदान देना है कि करो जो तुम करना चाहो… अब कोई नहीं है जो हिंदुओं को जगा सके।

ना शोएब अख्तर को सचिन से मतलब था और ना ही काँग्रेस को संघ से मतलब है… उसे भारत की हार में मज़ा था और इन्हें हिंदुओं की हार का इंतज़ार है।

सचिन ने आउट होकर पैवेलियन पहुंचकर गुस्से में बैट से ड्रेसिंग रूम का शीशा तोड़ दिया था। BCCI के तब के अध्यक्ष राजसिंह डूंगरपुर भी वहीं मौजूद थे। सचिन ने उनसे शिकायत की तो राजसिंह ने जवाब दिया : ‘अब मैं क्या करूँ? तुम्हें ज़रूरत क्या थी उसकी टाँगों के बीच से बल्ला घुसेड़ने की?’

अभी भी वक्त है। काँग्रेस की टाँगों के बीच से बल्ला घुसेड़ने की ज़रूरत नहीं है… नहीं तो पछतावे में ड्रेसिंग रूम का शीशा तोड़कर भी तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा।

बाकि मर्ज़ी आपकी… आखिर देश है आपका।

गुगली है भैया… अपने स्टंम्प बचाओ

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