सरस्वती रंगोली का रहस्य

चित्र मेरे घर के आंगन की रंगोली का है। इसमें दर्शाई गई आकृति सरस्वती यंत्र है। आंध्रप्रदेश में गोदावरी के तट पर बासर क्षेत्र, जो व्यास(वेदव्यास) का ही अपभ्रंश है, के ज्ञानसरस्वती मंदिर जिसे स्वयं वेदव्यास ने लक्ष्मी, सरस्वती और गौरी के रूप में स्थापित किया से लिया गया है।

महाराष्ट्र में यह “सरस्वती रंगोली” के रूप में घर घर में प्रचलित है। इसके त्रिकोण, त्रिदेवियों के प्रतिरूप हैं। ऊपर देवनागरी के १ अंक, अद्वैत के सूचक हैं। निचले त्रिकोण तक पहुंचते पहुँचते अनेक रहस्य उद्घाटित होते हैं जो net लिंक पर विस्तार से जान सकते हैं।
https://www.sanatan.org/en/a/94822.html

मेरा परिचय इससे एक वर्ष पुराना है। मैं ज्यों ज्यों सरस्वती यंत्र को बनाता गया, अनेक रहस्य स्वतः उद्घाटित होते जाते हैं। यह अत्यंत गूढ़, पवित्र, सूक्ष्म, शीघ्र फल देने वाला एवम तीव्र मेधावर्धक यंत्र है।

इसकी वळ्यांकित सात रेखाएं, सरस्वती की वीणा के चिह्न हैं। संगीत के सात स्वर हैं। मध्य के चार अंक वेदों के प्रतिनिधि हैं। इसमें आपको लक्ष्मी जी का कमल, दुर्गा का त्रिशूल, सांख्य के तत्व, प्रकृति का विस्तार, सब कुछ दिखेगा।

अनेक प्रकार से विचार करने के बाद, मुझे यह आकृति दीपोत्सव के लिए सर्वश्रेष्ठ लगी। इतना ही नहीं, एक और बात है बचपन में जब घर कच्चे होते थे और गोबर से लीपे होते थे, तब दीपावली के अवसर पर यह रंगोली मांडणे के रूप में घर घर में अंकित थी, यह स्वयं मैंने देखा है!! राजस्थान में इस पर एक मोर बनाया जाता था।

महाराष्ट्र में ऊपरी कुण्डलीकृत शिराओं को सरस्वती के वाहन मयूर के तौर पर ही देखा जाता है। जब इस पर विचार करते हैं तो हमारे पुरातन भारतीय वैभव पर गर्व होता है।

यह अत्यंत आश्चर्य का विषय है कि निपट अनपढ़ गंवार महिलाएं, कश्मीर, राजस्थान, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश तक, एक ही अर्थ में एक ही चित्र को उसी प्रतीक के रूप में, समान रूप से अपना रही थीं, और हम हैं कि आज भी इस खोज में लगे हैं कि क्या भारत में एकात्मकता जैसी कोई चीज थी भी?

बचपन में हमारे घर के मुख्यद्वार पर यह आकृति मेघवाल समाज की महिलाएं अंकित करती थीं। स्वयं उनकी दीवालें, विभिन्न रंगों से निरन्तर इससे चित्रित रहती थीं। मैं प्रायः कभी “ये करो-वो करो” की सलाह नहीं देता, पर इस बार एक निवेदन कर रहा हूँ।

आप दीपावली को यह यंत्र बनाइये। इससे अत्यंत संक्षिप्त में कुछ लाभ बता रहा हूँ।

1. वास्तु दोष शांत होगा।
2. घर में शांति और समृद्धि आएगी।
3. यंत्र के निरन्तर दर्शन से प्रज्ञावान बनेंगे।

जिन अभिभावकों के बच्चे मंदबुद्धि या कमजोर है, उनकी पुस्तकों के कवर पृष्ठ पर इसे अंकित कीजिए। तुरंत लाभ होगा और उसे कमेंट में ज़रूर लिखियेगा।

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