गौसेवा के बजाय मंज़ूर है पैसा खर्च करके Cow Cuddling करना

Jpeg

मितरों! मार्केट में अब पढ़े-लिखे मने एकदम भैंकर टेप से एजुकेटेड लोगों के बीच एगो नया चीज आया है, बोले तो एकदम मस्त चीज। काऊ कडलिंग (cow cuddling) नाम है इसका। कडलिंग मने क्या है कि आपको गायों के मध्य समय गुजारना है, उनके साथ खेलना है, आलिंगन करना है आदि आदि।

ये एक थेरेपी है। ई अंग्रेजी का ‘थेरेपी’ शब्द बहुत मस्त लगता है न सुनने में, है न? बस यही तो बिकता है।

तो का है कि आज न दुनिया बहुत फास्ट हो गयली है। बहुत भागम-भाग है, समय नहीं लोगों के पास, भारी व्यस्तता है.. शारीरिक थकावट तो खैर है ही मानसिक रूप से भी बीमार हुए जा रहे हैं ये बड़े दिमागदार वाले लोग सब।

टेंशन, हाइपरटेंशन, स्ट्रेस, तनाव, ब्ला ब्ला.. साला सुकून है हीच नहीं कहीं। स्ट्रेस रिलेक्सेशन का मार्केट केतना बड़ा है मालूम है?? खोज खबर करियेगा तो जरा।

अब इसी स्ट्रेस रिलेक्सेशन में डागदर, वैज्ञानिक लोग ढूंढ़ते-ढूंढ़ते खोजते-खोजते काऊ कडलिंग में आ पहुँचे हैं। सबसे विकसित और शक्तिशाली देश में इसकी शुरुआत हो चुकी है। वैसे शुरुआत उधर से ही होती है और बाकी दुनिया में फैलती है, या अडॉप्ट करने की होड़ लग जाती है।

इस विकसित देश में अभी गायों के मध्य 90 मिनट याने डेढ़ घण्टा समय गुजारने को आपको 300 डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, याने कि डेढ़ घण्टे के 20,000 रुपये के आस पास। अब बताइये भला, गायों के मध्य डेढ़ घण्टा समय गुजारने को 20 हजार रुपये!! अहे तो बात है भैया।

अभी जो बड़के-बड़के शेखुलर लोग बड़के-बड़के वातानुकूलित कमरे में बिसलेरी का बोटल गटकते हुए गौ-भक्तों को गालियां बकते हैं, बीफ की वकालत करते हैं वे लोग कुछ दिनों में इन्हीं फार्म हाउसेस में रिलेक्स होते नजर आयेंगे।

अभी गाय-गरु के साथ फोटो डाल दूँ न तो कूल डुडवेन आर डुडनी सब गंवार, देहाती का टैग लगा देने में जरा सा भी देरी नहीं करेंगे, लेकिन यही लोग जब ‘काऊ कडलिंग थेरेपी’ का wowwwwww करते हुए फोटो डालेंगे तो मस्त एजुकेटेड नजर आयेंगे।

अगेन.. पहले हमारी चीजों का मज़ाक उड़ाओ फिर उसे ही अंग्रेजी का फ्लेवर लगा के हमको ही बेचो।
जय हो! डूडवन की।
जय अमेरिकी बप्पा की।

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