अलग होती है MeToo वालियों की दुनिया

जब तनुश्री को लेकर यह बुलबुला अपने चरम पर था तब एक मित्र ने बहुत पते की बात कही थी कि इन मामलात में दोनों की हैसियत बड़ी होती है, आरोप लगाने वाली भी सामान्य नहीं होती और जिस पर वो आरोप लगाती है वह व्यक्ति उससे भी बड़ा होता है।

शब्द शायद हूबहू ये नहीं थे, लेकिन आशय यही था। बड़े व्यक्ति को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए ही ऐसे सहमति से दफ़न राज़ों में फिर से जान फूंकी जाती है।

फिलहाल अकबर की महानता के किस्से चर्चा में हैं। लेटेस्ट जुड़ी हैं एक महिला पत्रकार पल्लवी गोगोई। यह फिलहाल अमेरिका में पत्रकारिता करती है। उन्होने दो दशक पुराने अपने करियर के शुरुआती दिनों की बात छेड़ते एमजे अकबर पर आरोप लगाए हैं कि उन्होने इन पर बलात्कार किया।

अकबर ने सम्बन्धों से इंकार नहीं किया, लेकिन बलात्कार का आरोप खारिज किया है। उन्होने माना है कि हमारे संबंध थे जो खत्म हुए तो मधुर नहीं रहे। तफसील में न वे गए हैं और न पल्लवी।

यहाँ दो-तीन मुद्दों की चर्चा करूंगा।

पहला यह कि स्त्री के लिए पावर की पोजीशन पर आसीन पुरुष के प्रति एक अलग आकर्षण होता है। अक्सर यहाँ सौदा भी होता है, एक दूसरे को इस्तेमाल किया जाता है लेकिन यह सौदा सहमति का है, दोनों जानते हैं।

कभी कभी वह भी नहीं होता, केवल पावर का आकर्षण ही काफी होता है कुछ महिलाओं के लिए। पूर्व अमेरिकन राष्ट्रपति केनेडी तथा उनके बंधु इस मामले में बहुत ही भाग्यशाली रहे, वे वो परवाने थे जिन पर बुझने को शमाएँ मर मिटती थीं।

ऐसे ही नसीबदार कुछ शायर, कलाकार और क्रिकेटर भी होते हैं, लेकिन यहाँ उनकी बात प्रासंगिक नहीं है। यहाँ सिर्फ राजनेताओं की बात करेंगे।

इसलिए मेरा मानना है कि इस factor को समझकर ही ऐसे मुद्दों पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए, बलात्कार और ऐसे आरोप में फर्क होता है। वैसे समाज समझ भी रहा है, यह अब प्रबुद्ध महिलाओं की प्रतिक्रियाओं से भी समझ में आ रहा है।

ऐसा नहीं है कि वे पुरुषों को माफ कर रही हैं या ऐसे चालचलन को नॉर्मल बता रही हैं; वे इन महिलाओं के आरोपों की वस्तुनिष्ठ चिकित्सा कर रही हैं जो फेमिनिस्टों को नागवार गुज़र रहा है। क्योंकि पुरुष के किए गए सवाल पर फेमिनिस्ट बवाल कर सकती है लेकिन जब वही सवाल एक महिला और ही कटीले ढंग से पूछती है, उसकी बोलती बंद हो जाती है, और बोलती बंद हो जाना किसी महिला को अच्छा नहीं लगता!

दूसरा मुद्दा है जो इसी लेख का शीर्षक भी है। इनकी दुनिया। आम तौर पर तो महिलाएं असली बलात्कार की भी बात नहीं करना चाहती (गुनहगार को सज़ा देने के लिए करनी चाहिए) क्योंकि वो सामाजिक लांछन से डरती हैं जबकि वो विक्टिम है और गुनहगार कोई और है, फिर भी।

तो फिर यहाँ जब इन MeToo वालों के आरोपों की सच्चाई सब समझते हैं, फिर भी ये इस कदर आरोप कैसे लगा पाती हैं? क्या उन्हें अपनी ज़िंदगी का कोई खयाल नहीं? क्या उन्हें ये विचार नहीं आता कि उनका परिवार उनके बारे में क्या सोचेगा, उनका पति, बच्चे क्या सोचेंगे उनके बारे में?

यहीं बात आती है उनकी अलग दुनिया की। ये वह दुनिया है जहां ये मूल्य, ये संस्कार आदि कुछ भी मायने नहीं रखते, बस किए काम का मोल मायने रखता है। इतने सालों बाद यह आरोप लगाने के पीछे उद्देश्य है यह तो साफ है। लेकिन यह आरोप को जो प्रसिद्धि मिलेगी उससे कुछ साध्य होगा। यह सब मुफ्त में नहीं आता। प्रसिद्धि मुफ्त में नहीं आती तो आरोप लगाने के बारे में क्या कहना चाहिए? आरोप लगाने से पहले उन्होंने अपने निजी ज़िंदगी, परिवार आदि के बारे में सोचा ही होगा, पूरी तरह आश्वस्त हो कर ही आरोप लगाया होगा?

यहाँ तीसरे मुद्दे पर आते हैं। वो है इस दुनिया का आम दुनिया के लिए आकर्षण। इनका भाग बनने के लिए, खुद का भोग लगाने हमारे दुनिया में से कितने तैयार बैठे हैं, कभी सोचा है इसका भी परिणाम क्या होगा?

इनकी दौलत शोहरत आदि तो नहीं आयेगी लेकिन उनके इस आचरण की नकल ही होगी और समाज के नीतिमूल्य बदलेंगे। जिसमें हम सब की आनेवाली पीढ़ियां भी सम्मिलित हैं। कुचक्र को गति तो मिल चुकी है, रोक न पाएं तो खुद को बचा लीजिये।

अगर आप को इससे फर्क पड़ता है तो, बाकी जो है सो हईये ही है।

और हाँ, S-400 ट्रायम्फ मिसाइल सिस्टम का ऑर्डर रशिया को दिया गया, अमेरिका का पेट्रीयट मिसाइल सिस्टम न खरीदने से अमेरिका गुस्से में है। ऊपर से मोदी ईरान से तेल खरीद रहे हैं, अमेरिकन धमकी से डर कर ईरान का बहिष्कार नहीं कर रहे। ‘देख लेंगे’, यह तो अमेरिकन कह चुके हैं।

हर हमला सेना द्वारा नहीं होता। और तनुश्री भी अमेरिका से ही आई थी, पल्लवी भी। कई बिन्दु जोड़े बिना संबंध दिखना असंभव होता है, और मेरा ऐसा कोई दावा भी नहीं कि यह संबंध है। लेकिन हर संभावना की पड़ताल करनी चाहिए, सो बता दे रहा हूँ।

ME TOO : क्या हम इसके दीर्घकालीन प्रभावों के लिए तैयार हैं?

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