शिकारी हमें चारों ओर से घेरे खड़ा है, और हमने काट रखे हैं अपने नाख़ून भी!

वैदिक काल में आस्था के पीछे एक चिंतन था। यूं तो वेदों की व्याख्या सनातन की तरह अनंत निरंतर हो सकती है, लेकिन एक विशेष दृष्टि से देखने पर वेद आस्था का शास्त्र कहे जा सकते हैं। आर्य अपने उपयोग की हर चीज़ का विशेष ध्यान रखते थे, उसे हर सम्भव संभाल कर रखते, यही … Continue reading शिकारी हमें चारों ओर से घेरे खड़ा है, और हमने काट रखे हैं अपने नाख़ून भी!