माफ़ करना सचिन…

उस रोज़ मैंने सचिन के साथ बड़ी नाइंसाफ़ी की थी। भीतर एक टीस टिक गई थी कि अपने प्रिय बल्लेबाज़ को क्यों उतार दिया।

हालांकि, मैं सचिन को उतारने या चढ़ाने वाला कौन होता हूं! वह तो विश्व क्रिकेट का सम्राट रहा है। परंतु वह पूरा लेख ही कुछ लोगों की लगातार टिप्पणियों के विरुद्ध था कि विराट तो कुछ है ही नहीं।

ऐसे लोग जो नायक में देवता देखते हैं, वे वस्तुनिष्ठ आंकलन नहीं कर पाते। वे अपने दौर के साथ दम भरते हैं। उनकी युवावस्था का दौर सचिन के साथ बीता, मैं भी उसी समय का सहचर हूं।

लेकिन मैंने काल की केंचुली उतार फेंकी है और यह देख पा रहा हूं कि भारतीय क्रिकेट के मैदान पर एक अनन्य योद्धा खड़ा हो गया है। जिसने बल्लेबाज़ी की प्रेरणा तो सचिन से ही ली पर सचिन से आगे जाने का सपना भी देख लिय़ा। यह एक तरह की धृष्टता है! वरना सचिन से आगे जाने का सोचना भी अपराध सरीखा ही लगता है!!

मैं आज भी यह मानता हूं कि एक समय में मेरे लिए क्रिकेट का मानी ही सचिन था। और उस दिन भी मैंने लिखा था कि सचिन को पूरी धज के साथ उतरते हुए देखने से बेहतर कुछ नहीं होता था। जब वह अपनी पदचाप और अद्वितीय देहस्थैर्य के साथ मिड ऑफ में चौका जड़ता था, या स्ट्रेट ड्राइव लगाता था तो ऐसा प्रतीत होता था कि क्रिकेट का खेल वहीं रुक गया है।

ठहरो… ज़रा इस बल्लेबाज़ को देख लेने दो… इसकी चाल, इसका चातुर्य… इसकी चमक! सब कुछ तो विस्मयकारी है!! ऐसा लगता था जैसे स्टेडियम कुछ क्षण को थिर होकर थिरकने लगा है। उसके पुल, कट्स और कवर में गेंद पर चढ़कर चौका मारने का वैशिष्ट्य! उफ… क्रिकेट में कविता लिखी गई हो… वैसी ही कविता वीवीएस लक्ष्मण लिखते थे। और कुछ वैसा ही लास्य लारा में था।

सचिन ने निश्चय ही एक कठिन परिस्थिति में बल्ला उठाया था और अनिवार्य रूप से ही उसमें विराट से बड़ी नैसर्गिक प्रतिभा भी थी। ब्रैडमेन और रिचर्ड्स के बाद संभवत: विश्व क्रिकेट में वैसी प्रतिभा वाला बल्लेबाज़ दूसरा न हो सका। ब्रायन लारा बहुत करीब थे और इंज़माम, पोंटिग में बहुत सामर्थ्य था। पर इंज़माम ने अपनी क्षमता के अनुरूप खेल नहीं दिखाया।

सचिन विराट से अपनी दृढ़ता में हलके हैं। निश्चय ही हलके हैं। सचिन में विराट जैसा ज़िद्दी आदमी नहीं था। सचिन विशाल नदी की तरह बहते थे। विराट नदी खोदता है। सचिन में एक किस्म का दीवानापन था, विराट में असंभव सा संतुलन है। वह रंभा को देखकर भी रुक जाय तो कौतुक नहीं! कह देगा कि अभी रन बनाना है, रमण बाद में करेंगे!! अगर उसकी यही रफ्तार बनी रही तो कुछ विचित्र सा रिकार्ड खड़ा हो जाएगा। फिर भी… सचिन वसंत का अग्रदूत रहेगा।

तो सचिन विराट हो जाते…

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