सरदार पटेल प्रतिभा, संकल्प शक्ति, पुरूषार्थ और परमार्थ का प्रकटीकरण : पी एम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि सरदार वल्लभ भाई पटेल का सामर्थ्य उस समय भारत के काम आया था जब देश साढ़े पांच सौ से अधिक रियासतों में बंटा था।

उन्होंने कहा कि उस समय दुनिया में भारत के भविष्य के प्रति गहरी निराशा थी लेकिन ऐसे समय में सरदार पटेल ने अपने पुरूषार्थ से भारत का एकीकरण किया।

श्री मोदी आज सरदार पटेल की जयंती पर गुजरात के नर्मदा जिले के केवडि़यां में सरदार पटेल की प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये प्रतिमा सरदार पटेल की प्रतिभा, उनकी संकल्प शक्ति, पुरूषार्थ और परमार्थ की भावना का प्रकटीकरण है।

182 मीटर लंबी यह प्रतिमा विश्‍व की सबसे ऊंची इस प्रतिमा है। इसका अनावरण करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल की यह प्रतिमा विश्‍व को साहसी पुरूष की याद दिलाएगी जिसने भारत को विखंडित करने के प्रयासों को विफल किया।

उन्‍होंने कहा कि अगर सरदार पटेल ने भारत का एकीकरण न किया होता तो हमें सोमनाथ के दर्शन करने और गिर के जंगलों में शेर देखने या हैदराबाद के चार मीनार को देखने के लिए वीज़ा लेना पड़ता। श्री मोदी ने इस प्रतिमा को देश की इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षमताओं का प्रतीक बताया।

गुजरात के राज्‍यपाल ओ पी कोहली, मुख्‍यमंत्री विजय रूपाणी और भाजपा प्रमुख अमित शाह भी इस अवसर पर उपस्थित थे। गुजरात के नर्मदा जिले में सरदार सरोवर बांध के पास छोटे से द्वीप साधु बेट पर बनी स्‍टेच्‍यू ऑफ यूनिटी ऊंचाई में अमरीका के स्‍टेच्‍यू ऑफ लिबर्टी से दोगुनी है।

प्रतिमा के अंदर एक सौ 35 मीटर की ऊंचाई पर एक गैलरी बनाई गई है जहां से पर्यटक बांध और पास की पर्वत श्रृंखला देख सकेंगे। प्रतिमा के पास श्री मोदी ने वॉल ऑफ यूनिटी का भी अनावरण किया। ये दीवार देशभर में विभिन्‍न राज्‍यों से लाई गई मिट्टी से बनाई गई है।

स्‍टेच्‍यू ऑफ यूनिटी के आसपास के क्षेत्र को पर्यटक स्‍थल के रूप में विकसित करने के लिए फूलों की घाटी और टैंट सिटी जैसी अनेक परियोजनाओं पर काम हुआ है। प्रधानमंत्री सरदार पटेल की प्रतिमा के आधार चबूतरे पर बने प्रदर्शनी कक्ष में ध्‍वनि – प्रकाश कार्यक्रम का भी शुभारंभ करेंगे जिसमें ब्रिटिश शासन के खिलाफ लौह पुरूष का संघर्ष दर्शाया जाएगा।

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